Home » इंडिया » Modi government general reservation, mayawati offer support for constitutional amendment bill
 

भारी पड़ा मोदी सरकार का 'आरक्षण दांव', पस्त हुईं 'तिलक-तराजू-तलवार' वाली मायावती

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2019, 12:28 IST

चुनावों के ठीक पहले मोदी सरकार का सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने का फैसला सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. मोदी सरकार के इस दांव ने देश के पांच राज्यसभा चुनावों में हुई भाजपा की हार को लोकसभा चुनाव का आधार बताने वाली अटकलों पर एक तरह से पूर्ण विराम लगा दिया है. इस फैसले को लागू करने के लिए सरकार को इसी शीतकालीन सत्र में इस बिल को पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पास करना जरुरी है. हालांकि लोकसभा में ये बिल पास हो भी जाए तो विधानसभा में इसका पास होना मुश्किल बताया जा रहा है.

लेकिन सदन के आखिरी समय में और चुनावों के ठीक पहले इस बिल का प्रस्ताव लाकर मोदी सरकार ने विपक्ष के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है. जाहिर है की कोई भी पार्टी इस आरक्षण बिल का विरोध करके सवर्णों के एक बड़े वोट बैंक को खोना नहीं चाहेगी. अगर ये बिल विपक्ष के भारी विरोध के चलते पास नहीं हो पाया तो आगामी चुनावों में बीजेपी के पास विपक्ष के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा. जो आने वाले चुनावों के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है.


इन चुनावी समीकरणों को देखते हुए ये जाहिर है कि ऐसे में कांग्रेस सहित, सपा-बसपा जैसे दल भी इस बिल के पारित होने में अटकलें लगाने से बचेंगे. इस बिल को लेकर सवर्णों के खिलाफ 'तिलक-तराजू और तलवार' का नारा देने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस बिल को समर्थन देने की बात कही है. हालांकि इसी के साथ उन्होंने बीजेपी के इस फैसले को चुनावी स्टंट बताया है.

लेकिन विपक्ष की तरह ही मायावती के पास भी आगामी चुनावों को देखते हुए समर्थन न देने का कोई अन्य विकल्प नहीं है. हालांकि उन्होंने इस बिल के समर्थन के साथ कहा है कि इस विधेयक का समर्थन करेंगी क्योंकि बसपा हमेशा से ही आरक्षण की मांग करती आई है. मायावती ने ये भी कहा, ''एससी-एसटी वर्ग की 50 फीसदी आरक्षण सीमा को भी उनकी आबादी को देखते हुए बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए.साथ ही जिन क्षेत्रों में अभी तक आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है, वहां भी इसे लागू करना चाहिए.''

'कांग्रेस का आइडिया था सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण, 8 साल पहले बनाई थी योजना'

मोदी सरकार ने सोमवार को ही आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग के लोगों को नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है. सरकार अब इस आदेश को मंजूरी दिलाने के लिए आज लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक लाएगी.

अभी किस को कितना आरक्षण

मौजूदा व्यवस्था में इस समय अनुसूचित जाति (एससी) को 15 फीसदी आरक्षण मिलता है. वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण है. अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है. इस तरह से इस समय कुल 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है. अगर ये नियम लागू होता है तो कुल आरक्षण 59.5 फ़ीसदी हो जाएगा.

First published: 8 January 2019, 12:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी