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शादी करने पर ऐसे दंपति को मोदी सरकार दे रही 2.50 लाख रुपये, जानिए क्या है पूरी स्कीम

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2019, 13:11 IST

मोदी सरकार लोगों की सोच बदलने के लिए और उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए तमाम तरह की स्कीम चला रही है. इन्हीं में से एक है जाति व्यवस्था की सामाजिक बुराई को खत्म करने और अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए चलाई जा रही स्कीम. इस स्कीम के तहत अगर कोई दलित से अंतरजातीय विवाह करता है, तो उस नवदंपति को मोदी सरकार 2.50 लाख रुपये दे रही है.

ये आर्थिक मदद डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज के तहत नवदंपति को दी जाएगी. बता दें कि इस योजना की शुरुआत साल 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने की थी. ये योजना आज भी जारी है. हालांकि इस योजना का लाभ पाने के लिए आपको कुछ शर्तों का पालन करना पड़ेगा.

बता दें कि केंद्र सरकार की इस स्कीम का मकसद समाज में फैली जाति व्यवस्था की बुराई को खत्म करना है. साथ ही ऐसे युवक-युवतियों को प्रोत्साहित करना है जिन्होंने समाज की बेड़ियां तोड़कर अपनी मंजिल खुद चुनी. उन्होंने अंतरजातीय विवाह कर अपना घर बसाया.

सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले नवदंपति को अपने क्षेत्र के मौजूदा सांसद या विधायक की सिफारिश के साथ आवेदन को भरकर डॉ अंबेडकर फाउंडेशन को भेजना होगा. या फिर नवदंपति आवेदन को पूरा भरकर राज्य सरकार या जिला प्रशासन को सौंप सकते हैं. इसके बाद राज्य सरकार या जिला प्रशासन आवेदन को सिफारिश के साथ डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को भेज देते हैं.

बता दें कि इस स्कील का लाभ उन्हीं नवदंपति को मिलेगा जिनमें से कोई एक दलित समुदाय से हो. वहीं दूसरे को दलित समुदाय से बाहर का होना चाहिए. दोनों की शादी को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत रजिस्टर होना चाहिए. इस संबंध में नवदंपति को एक हलफनामा दाखिल करना होगा. इस स्कीम का फायदा उन्हीं नवदंपति को मिलेगा, जिन्होंने पहली बार शादी की है. दूसरी शादी करने वालों को इसका फायदा नहीं मिलेगा.

इस आवेदन को पूरा करके शादी के एक साल के अंदर डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को भेजना होगा. अगर नवदंपति को राज्य या केंद्र सरकार द्वारा किसी तरह की आर्थिक सहायता पहले मिल चुकी है, तो उसको इस ढाई लाख रुपये की धनराशि में घटा दिया जाएगा.

इसके साथ ही नवदंपति में से जो दलित यानि अनुसूचित जाति का होगा उसे अपना जाति प्रमाण पत्र भी आवेदन के साथ लगाना होगा. हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत शादी रजिस्टर करने के बाद जारी मैरिज सर्टिफिकेट भी इसके साथ भेजना होगा. आवेदन के साथ कानूनी रूप से विवाहित होने का हलफनामा देना होगा.

इस आवेदन के साथ ऐसा दस्तावेज भी लगाना होगा, जिससे यह साबित हो कि दोनों की यह पहली शादी है. नवविवाहित पति-पत्नी का आय प्रमाण पत्र भी देना होगा. नवदंपति का संयुक्त बैंक खाते की जानकारी देनी होगी.

जब नवदंपति का आवेदन सही पाया जाएगा तो उनके संयुक्त खाते में डेढ़ लाख रुपये तुरंत भेज दिए जाएंगे. साथ ही बाकी के एक लाख रुपये को उनके संयुक्त खाते में तीन साल के लिए फिक्स डिपोजिट कर दिए जाएंगे. तीन साल बाद डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन की सहमति से यह पैसा ब्याज के साथ दंपति के खाते में भेज दिया जाएगा.

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First published: 7 July 2019, 13:11 IST
 
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