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डीएल-पासपोर्ट और यूपीएससी परीक्षा की फीस बढ़ सकती है

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 November 2016, 15:36 IST
(एजेंसी)

देश के युवा जिस परीक्षा को पास करके विदेशों में राजदूत, डीएम, एसपी, रेलवे और आयकर सहित तमाम महकमों में शीर्ष अधिकारी बनते हैं, उसे यूपीएससी परीक्षा कहते हैं.

मोदी सरकार अब उसी यूपीएससी परीक्षा की फीस बढ़ाने की योजना बना रही है. इस मामले में अरुण जेटली के वित्‍त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि वे प्रोजेक्‍ट्स पर जो खर्च कर रहे हैं, उसकी भरपाई के लिए उन्हीं लोगों से अब अधिक फीस लें.

लिहाजा अब परीक्षा का सारा बोझ छात्रों पर पड़ने वाला है. वित्‍त मंत्रालय ने अगले साल बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं.

यूपीएससी जो परीक्षाएं लेता है उसके लिए वह परीक्षार्थियों से 100 रुपये प्रति पेपर की दर से फीस वसूलता है जबकि इन परीक्षाओं को कराने की लागत काफी ज्‍यादा है. ऐसे में अब सरकार के उस घाटे की भरपाई उन्हें करनी होगी.

इस मामले में यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों का कहना है कि मोदी सरकार का यह फैसला बहुत ही निराशाजनक और गरीब छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने के लिए है.

यूपीएससी परीक्षा के अलावा सरकार पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली फीस में भी ज्यादा शुल्क लेने की सोच रही है.

वित्त मंत्रालय ने तमाम संबंधित विभागों को ऑनलाइन शुल्क में इजाफा करने के निर्देश दिए हैं. बताया जा रहा है कि ऑनलाइन सेवा को चलाने में बढ़ रहे घाटे की भरपाई के लिए सरकार वृद्धि करने जा रही है.

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जनता के लिए जितनी भी ऑनलाइन सेवाएं हैं, उनके लिए सरकारी विभागों को अलग से कंपनियां हायर करनी पड़ती हैं. उन्हें उनकी सेवा के बदले में बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है.

अधिकारी का कहना है कि लेकिन जितना शुल्क जनता से लिया जाता है, उससे ज्यादा पैसा सरकार को कंपनी को देना पड़ता है.

लिहाजा, घाटे की भरपाई के लिए यह शुल्क वृद्धि की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि हाल में हुई बैठक में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि इन सेवाओं पर सरकार कब तक सब्सिडी देती रहेगी?

बहरहाल वित्त मंत्रालय ने तमाम मंत्रालय के मंत्रियों और अधिकारियों को कहा था कि उनके मंत्रालय को जितना भी बजट मिला है, उतने में ही सब कुछ खर्च किया जाए.

First published: 3 November 2016, 15:36 IST
 
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