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मोदी सरकार का 'मुस्लिम कार्ड', मेवात से 'प्रगतिशील पंचायत' की होगी शुरुआत

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:24 IST
(पीटीआई)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय की समस्याएं सुनने के लिए एक नई पहल की है. सरकार ने प्रगतिशील पंचायत के नाम से देशभर में मुस्लिम पंचायत आयोजित करने का फैसला लिया है. इसकी शुरुआत हो रही है हरियाणा के मेवात इलाके से.

मुस्लिम समाज की प्रगति और उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए यह पंचायतें आयोजित की जाएंगी. इसके जरिए उनकी समस्याओं का हल ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी. 

गुरुवार को हरियाणा से आगाज

गुरुवार को हरियाणा के मेवात से 'प्रगतिशील पंचायत' का आगाज होने जा रहा है. केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और केंद्र सरकार के कई मंत्री इस आयोजन में शामिल होंगे.

इस पंचायत के जरिए मुस्लिम समुदाय के लोगों की समस्याएं जानने की कोशिश होगी. दरअसल मोदी सरकार का मानना है कि पूर्ववर्ती सरकारों ने मुस्लिम समाज के विकास के लिए ऐसे कदम नहीं उठाए, जिससे उनकी समस्याएं हल हों. 

कांग्रेस ने बताया चुनावी चाल

इस बीच विपक्ष ने मोदी सरकार के इस कदम पर निशाना साधा है. कांग्रेस का मानना है कि यह महज एक चुनावी चाल है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये पंचायतें आयोजित हो रही हैं.

कांग्रेस नेता मीम अफजल ने कहा, "यूपी में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भाजपा इस तरह के आयोजन कर रही है. कांग्रेस ने हमेशा से मुस्लिम समुदाय की भलाई के बारे में सोचा है और काम किया है." 

मेवात से शुरुआत छवि सुधारने की कवायद!

सियासी जानकार यह भी मानते हैं कि केंद्र सरकार का यह कदम मोदी सरकार की छवि चमकाने की कवायद है. दरअसल हाल ही में मुस्लिम समाज पर कथित गोरक्षकों के हमलों में इजाफा हुआ है. ऐसे में समाज की नाराजगी दूर करने के लिए मुस्लिम पंचायत का कार्ड खेला जा रहा है.

खास बात यह है कि इसकी शुरुआत मेवात से हो रही है. मेवात में हाल ही में बीफ के नाम पर मुस्लिमों पर हमलों में इजाफा हुआ है. यही नहीं हरियाणा मेें बीफ तस्करों को गोबर तक खिला दिया गया था.

मेवात के डींगरहेड़ी गांव में मुस्लिम दंपति की हत्या और दो महिलाओं से गैंगरेप की घटना सामने आ चुकी है. इस मामले में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट में कथित गोरक्षकों पर सवाल उठे हैं.

पीड़ितों से मुलाकात के बाद जो रिपोर्ट तैयार की गई है, उसने गोरक्षकों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. डींगरहेड़ी कांड को लेकर यह रिपोर्ट हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी भेजी गई है.  

इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी जब 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे, इसी दौरान गोधरा कांड के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हुए दंगों में मुस्लिमों को निशाना बनाया गया था. हालांकि कई मामलो में दंगे के अभियुक्तों को सजा हो चुकी है, लेकिन विपक्ष इसे अक्सर मुद्दा बनाता रहा है.

First published: 28 September 2016, 3:51 IST
 
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