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'सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण देना मोदी सरकार का 56 इंची फैसला'

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 January 2019, 17:10 IST

केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सवर्ण जातियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही सरकार के इस फैसले पर राजनीति चालू हो गई है. मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला का कहना है कि इस तरीके का फैसला सिर्फ 56 इंच सीने वाला व्यक्ति ही ले सकता है. ये एक ऐतिहासिक फैसला है.

वहीं विपक्ष मोदी कैबिनेट के इस फैसले पर उन्हें घेर रहा है. कांग्रेस नेता अमी याज्ञनिक ने कहा कि इस प्रकार के आरक्षण पर काफी तकनीकि दिक्कतें हैं. कांग्रेस ने हमला करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले इस प्रकार आरक्षण देने का क्या मकसद है ये भी देखना होगा. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बिल आने और पास होने में काफी समय लग सकता है. सरकार इस मुद्दे को लेकर सीरियस नहीं है.

 

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने सरकार के इस फैसले को मजाक बताया. उन्होंने कहा कि ये लोग जनता को बेवकूफ बना रहे हैं, इस बिल को ये पास भी नहीं करवा सकते हैं. केटीएस तुलसी ने कहा कि अगर कोई साधारण बिल पास नहीं हो पा रहा है तो फिर ये बिल कैसे पास हो पाएगा.

इसके अलावा कांग्रेस नेता संजय सिंह ने कहा कि ये सिर्फ एक चुनावी जुमला है और कुछ नहीं. राजद नेता मनोज झा ने मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस फैसले को लिया गया है. ये सिर्फ एक चुनावी जुमला है.

वहीं गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने सवाल उठाया कि ये सिर्फ एक चुनावी जुमला है. उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से संसद चल रही थी ऐसे में आखिरी दिनों में इस प्रकार का फैसला करना, ये सिर्फ एक सरकार का नया नाटक है.

पढ़ें- मोदी सरकार का बड़ा चुनावी दांव, सवर्ण जातियों को 10 फीसदी आरक्षण की मंजूरी

बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण जाति के लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने का मोदी कैबिनेट ने फैसला किया है. इसके लिए मोदी सरकार मंगलवार को संविधान में संशोधन प्रस्ताव लाएगी. इसके आधार पर आरक्षण दिया जाएगा. हालांकि संविधान के वर्तमान नियमों के अनुसार आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की राह काफी मुश्किल है.

First published: 7 January 2019, 17:10 IST
 
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