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मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, वित्त मंत्रालय के 15 भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन दिया रिटायरमेंट

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 June 2019, 17:17 IST

मोदी सरकार अपना दूसरा कार्यकाल संभालने के बाद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से सख्त है. इसी क्रम में सरकार ने वित्त मंत्रालय के 15 भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट दे दिया. इन अधिकारियों पर  भ्रष्टाचार, रिश्वत लेने और तस्करी तथा आपराधिक साजिश रचने का आरोप है.

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ने नौकरशाही में भ्रष्टाचार की सफाई के लिए जो प्रयास शुरू किए थे वह तेज कर दिए हैं. मोदी सरकार ने पिछले सप्ताह केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) के नियम 56 (जे) के तहत भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न, अनुपातहीन संपत्ति के आरोप में आयकर विभाग के 12 वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों को सेवानिवृत्त कर दिया था.

वहीं अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के 15 आयुक्त स्तर के अधिकारियों को सेवानिवृत्त कर दिया. इस बार की कार्रवाई में मोदी सरकार ने CBIC के प्रिंसिपल कमिश्नर अनूप श्रीवास्तव (1984-बैच IRS), कमिश्नर अतुल दीक्षित (1988-बैच IRS), संसार चंद (1986-बैच IRS), जी श्री हर्ष (1991-बैच) आईआरएस), और विनय बृज (1995-बैच आईआरएस) को सेवानिवृत्त किया है.

अन्य अधिकारियों में CBIC के अतिरिक्त आयुक्त अशोक आर महिदा (1990-बैच आईआरएस), वीरेंद्र कुमार अग्रवाल (1990-बैच आईआरएस), उपायुक्त अमरेश जैन (1992-बैच आईआरएस), संयुक्त आयुक्त नाल कुमार (2005-बैच आईआरएस), सहायक आयुक्त एसएस पबाना (2014-बैच आईआरएस), एसएस बिष्ट (2014-बैच आईआरएस) और विनोद कुमार संघ (2014-बैच आईआरएस) शामिल हैं.

इसके अलावा अतिरिक्त आयुक्त राजू सेकर (1992-बैच आईआरएस), उपायुक्त अशोक कुमार असवाल (2003-बैच आईआरएस) और सहायक आयुक्त मोहम्मद अल्ताफ (2009-बैच आईआरएस) को भी मोदी सरकार ने सेवानिवृत्त कर दिया है.

इन अधिकारियों को जिस नियम के तहत सेवानिवृत्त किया गया है. वह केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के नियम 56 (जे) है. इसमें सरकारी सेवकों के प्रदर्शन की समय-समय पर समीक्षा की जाती है जिससे पता लगाया जा सके कि उन्हें सेवा में बनाए रखना है या जनहित में सेवा से सेवानिवृत्त कर देना चाहिए.

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First published: 18 June 2019, 17:11 IST
 
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