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अब तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजेगी मोदी सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2018, 14:32 IST

तीन तलाक बिल पर राज्यसभा में हुए हंगामे के बाद मोदी सरकार विपक्ष के आगे झुक गई है. एनडीटीवी की वेबसाइट के मुताबिक मोदी सरकार ने विपक्ष की मांग को मान लिया है. मोदी सरकार अब एक बार में तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले बिल को संसद के बजट सत्र में दोबारा पेश करेगी. इससे पहले वो इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजेगी.

एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक तीन तलाक पर बिल संसद के अगले सत्र में ही राज्यसभा में पारित हो पाएगा. मोदी सरकार अब इस बिल पर संसद के सदस्यों की सलेक्ट कमेटी बनाएगी. इसके बाद सेलेक्ट कमेटी के सुझावों के आधार केंद्र सरकार इसमें कुछ संशोधन कर सकती है.

इस मसले पर गतिरोध खत्म करने के लिए कल अरुण जेटली और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू की बीच बैठक हुई. मोदी सरकार तीन तलाक बिल के मामले में गतिरोध खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव लाएगी. ये प्रस्ताव इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के लिए लाया जाएगा. 

गौरतलब है कि बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पेश किया था. प्रसाद ने कहा कि लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित होने के बावजूद एक मुस्लिम महिला को यूपी के मुरादाबाद में दहेज को लेकर एक बार में तीन तलाक दिया गया.

उन्होंने राज्यसभा में इस बिल के विरोध को लेकर कांग्रेस पर निशाना भी साधा था. हालांकि बाद में राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी.

बुधवार को तीन तलाक पर कांग्रेस की तरफ से सीनियर नेता आनंद शर्मा ने संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए इस बिल को सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की, जिस पर सदन में जमकर हंगामा हुआ. दरअसल राज्यसभा में मोदी सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है.

मोदी सरकार की मुश्किलें उसके सहयोगी दलों ने भी बढ़ाई हैं. एनडीए के सहयोगी शिवसेना और तेलगुदेशम पार्टी को भी इस बिल के प्रावधानों में आपत्ति है. कांग्रेस द्वारा जो संसोधन प्रस्तवा दिया गया था उसमें टीडीपी के सांसदों का नाम भी शामिल था.

बीजू जनता दल (बीजेडी) और AIADMK ने कई बार अहम बिलों को पास कराने में केंद्र सरकार का साथ दिया है. ये दल भी तीन तलाक बिल पर अपना विरोध जता चुके हैं. वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी इस बिल पर विपक्ष के साथ खड़ी दिख रही है. ये दल भी चाहते हैं कि इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया जाए. 

मोदी सरकार ने लोकसभा में बहुमत होने की वजह से आसानी से इसे पारित करा लिया था. लोकसभा में विपक्षी पार्टियों के सभी संसोधन खारिज हो गए थे. लोकसभा में हुई वोटिंग में ये बिल ध्वनिमत से पारित हुआ था. इसके बाद इसे केंद्र सरकार ने महिलाओं के सामाजिक अधिकार और न्याय की बड़ी जीत बताया था.

विपक्ष को इन प्रावधानों पर है ऐतराज़

कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्ष को  इस बिल के कुछ प्रावधानों को पर कड़ी आपत्ति है. विपक्ष इस प्रस्तावित कानून में एक बार में तीन तलाक कहने पर पति के ऊपर आपराधिक मुकदमा किए जाने के खिलाफ है. इसके साथ ही उसे प्रस्तावित कानून में होने वाली सजा से भी एतराज है. इसके साथ ही तीन तलाक की पीड़िता महिला को मिलने वाले गुजारे भत्ते को लेकर भी उसकी कुछ शंकाएं हैं, जिनमें वो संशोधन चाहता है.

 राज्यसभा में ये है गणित

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं. इसमें से सात सीटें अभी खाली हैं. 238 सदस्यीय राज्यसभा में कांग्रेस 57 और भाजपा के पास 57 सीटें हैं. इनके अलावा समाजवादी पार्टी के पास 18, अन्नाद्रमुक के पास 13, तृणमूल कांग्रेस के पास 12, बीजेडी के पास 8, लेफ्ट के पास 8, टीडीपी के पास 6, एनसीपी के पास 5, द्रमुक के पास 4, बसपा के पास 4 और राजद के कुल 3 सदस्य हैं. वहीं, भाजपा के पास सहयोगी एनडीए दलों के 20 सांसद हैं.

First published: 4 January 2018, 14:32 IST
 
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