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मदर टेरेसा को संत की उपाधि: सरकार वेटिकन सिटी भेजेगी प्रतिनिधिमंडल, क्या भागवत अफसोस जताएंगे?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 27 August 2016, 7:34 IST

मदर टेरेसा की जन्मतिथि पर एनडीए सरकार ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की, वह भी शीर्ष स्तर पर. यह कोई छोटी बात नहीं है. चार सितंबर को वेटिकन सिटी में मदर को संत की उपाधि दी जाएगी. सरकार ने तय किया है कि इस समारोह में भारत की ओर से विदेश मंत्री स्तर का व्यक्ति भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करेगा.

खैर, सुषमा स्वराज के नेतृत्व में यह प्रतिनिधि मंडल विदेश रवाना हो उससे पहले भाजपा को कुछ सवालों का जवाब देना चाहिए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गत वर्ष 23 फरवरी को कहा था कि मदर टेरेसा का गरीब और वंचितों की मदद करना केवल एक ढकोसला था. इसकी आड़ में वे और उनका संगठन धार्मिक विचारों को फैला रहे थे.

राजस्थान के भरतपुर में एक अनाथालय और एक महिला गृह के उद्घाटन अवसर पर भागवत ने कहा था, ‘यहां हम ऐसी सेवा नहीं करेंगे जैसी कि मदर टेरेसा करती थी.’ कुछ नरमी बरतते हुए उन्होंने कहा, 'जिस प्रकार का काम वे करती थीं, वह अच्छा था. परन्तु उन्होंने इस बात पर ज्यादा जोर दिया कि सेवा के पीछे उनका उद्देश्य क्या था.’ यह उन लोगों को ईसाई बनाना था, जिनकी टेरेसा ने सेवा की थी. भागवत ने अपने भाषण में मदर टेरेसा के बरसों किए गए मानव सेवा के कार्य को एक झटके में ‘बेकार’ बता दिया.

भागवत ने कहा था कि मदर टेरेसा की सेवा के पीछे कुछ छिपे हुए मकसद थे, वे पीड़ितों को ईसाई बनाना चाहती थीं

भागवत का यह बयान संघ के स्वयंसेवकों के लिए एक संकेत था और स्वयंसेवकों की सेना ने मदर और ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटीज’ के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. मदर टेरेसा पर किए गए क्रिस्टोफर हिचेन्स का सारा अध्ययन कार्य ढूंढ निकाला और सोशल मीडिया पर इस संबंध में खूब दुष्प्रचार किया गया. दक्षिण पंथी लेखकों ने टिप्पणियों में लिखा-जांच में टेरेसा की प्रतिष्ठा सही नहीं पाई गई थी.

विपक्षी दलों ने भागवत और केंद्र सरकार पर इसे लेकर हमला बोला और संसद में इस बात पर उनका घेराव भी किया. हालांकि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही सरकार के किसी और प्रतिनिधि ने मदर के पक्ष में आवाज उठाई. केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू संसद में केवल इतना भर बोले, ‘मैं सरकार द्वारा कही गई बात पर स्पष्टीकरण दे सकता हूं, लेकिन किसी पार्टी के प्रमुख या महासचिव की बात का नहीं.’

यह सब बीते समय की बात हो चली है, इसके विपरीत स्वागत योग्य कदम यह है कि मोदी सरकार ने रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा मदर को संत की उपाधि दिए जाने का समर्थन किया है. इसका सीधा सा मतलब है भाजपा चर्च के इस मत से सहमत है कि मदर टेरेसा आधुनिक संत थीं और एक चमत्कारिक कार्यकर्ता भी.

भाजपा के पास इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं है. मदर को चाहने वाले न केवल भारत में थे बल्कि पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय उन्हें प्यार करता था. वे भारत रत्न हैं और नोबेल पुरस्कार विजेता भी. लोकतांत्रिक रूप से चुन कर आई सरकार इस बात को नकार नहीं सकती.

एक कट्टरपंथी संगठन बिना किसी जवाबदेही के भले ही ऐसा करने की हिम्मत करे. भाजपा-संघ संयोजन और समाज के साथ व्यापक रूप में उसके संबंधों में यही फर्क है.

एक ओर जहां संघ अपने पक्ष में अवमानना के मामलों पर कानूनी लड़ाई लड़ता रहता है, भागवत निःस्वार्थ सेवा करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय हस्ती की अवमानना करके आसानी से बच निकलते हैं. मोदी सरकार ने उनके समर्थन में तो कुछ नहीं कहा लेकिन उन्हें कोई चुनौती भी नहीं दी. इससे वे आसानी से इस मामले में बच गए.

मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने वाले समारोह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधि मंडल भेजना संघ प्रमुख को सरकार का देरी से दिया गया जवाब नहीं माना जा सकता. सरकार को भागवत को उसी समय जवाब देना चाहिए था परन्तु इसने नहीं दिया.

सरकार को अब एक और मौका मिला है. वेटिकन सिटी में अगले महीने होने वाले समारोह से पहले सरकार को भागवत से उनके उक्त बयान के बारे में जवाब मांगना चाहिए. इसकी शुरुआत ऐसे की जानी चाहिए कि भागवत को मदर टेरेसा से माफी मांगने के लिए कहा जाए. साथ ही मिशनरीज ऑफ चैरिटीज से और उन लाखों-करोड़ों गरीबों से भी जिनके जीवन को इसने संवारा है.

First published: 27 August 2016, 7:34 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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