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सवर्ण आरक्षण: अब गरीबों को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी देने की तैयारी में मोदी सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 January 2019, 14:34 IST

आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए मोदी सरकार गरीबों पर बहुत मेहरबान बनी हुई है. हाल ही में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में दस फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है. यही नहीं अब सरकार इसके अंतर्गत गरीब सवर्णों को राज्य सरकार द्वारा संचालित तेल विपणन कंपनियों के तहत पेट्रोल पंप और कुकिंग गैस एजेंसी आवंटित करेगी. दो सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह कंपनियां केंद्र सरकार की आरक्षण नीति का अनुसरण करेंगी.

एक अधिकारी ने कहा कि, 'नए पारित कानून के अधिसूचित होने के बाद EWS श्रेणी को 10 फीसदी आरक्षण (खुदरा दुकानों के आवंटन में) देने का औपचारिक प्रस्ताव उचित समय पर शुरू किया जाएगा.' हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. अधिकारियों ने कहा कि विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा.

राज्य के स्वामित्व वाले ईंधन खुदरा विक्रेता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड में पहले से ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण नीति है. पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसियों के आवंटन में ओबीसी कोटा की शुरुआत मनमोहन सिंह सरकार के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 20 जुलाई, 2012 को की थी.

बता दें कि वर्तमान में इस तरह का आवंटन 22.5 प्रतिशत एससी और एसटी के लिए और 27 प्रतिशत OBC के लिए है. वहीं पूरे देश में सामान्य श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले लोगों के लिए 50.5फीसदी आरक्षण है. हालांकि ये प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम में लागू नहीं है. इन राज्यों में ये आरक्षण अलग से लागू है. पूर्वोत्तर के राज्यों में खुदरा दुकानों के लिए आरक्षण सामाजिक-आर्थिक संरचना के अनुसार अलग-अलग हैं. अरुणाचल में एसटी के लिए 70 प्रतिशत आरक्षण है.

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First published: 12 January 2019, 14:34 IST
 
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