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तीन तलाक बिल राज्यसभा मे लटका, मोदी सरकार और कांग्रेस में नहीं हुई सुलह

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 4 January 2018, 21:42 IST

तीन तलाक बिल पर गुरुवार को भी राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. इस बिल को लेकर मोदी सरकार और कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष के बीच खूब तकरार हुई. दोनों पक्षों में से कोई भी इस मसले पर झुकने को तैयार नहीं हुआ. मोदी सरकार ने गुरुवार को भी तीन तलाक बिल को सुझावों के लिए सेलेक्ट कमेटी में भेजने की विपक्ष की मांग को ठुकरा दिया. इसके बाद हंगामा बढ़ता देख राज्यसभा में उपसभापति पीजे कुरियन राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक स्थगित कर दी. 

शुक्रवार को एक बार में तीन तलाक को अपराध बनाने वाले बिल को पास करने का मोदी सरकार के पास आखिरी मौका है. संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को खत्म हो रहा है. ऐसे में मोदी सरकार के लिए किसी अग्नि-परीक्षा से कम नहीं होगा. वहीं कांग्रेस संसद सत्र के आखिरी दिन भी इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने की अपनी मांग पर अड़े रहेगी, इसकी पूरी संभावना है.

वर्तमान परिस्थितियों में तीन तलाक बिल पास होना मुश्किल लग रहा है. मोदी सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है. इसके अलावा मोदी सरकार की मुश्किलें उसके सहयोगी दलों ने भी बढ़ाई हैं. एनडीए के सहयोगी शिवसेना और तेलगुदेशम पार्टी को भी इस बिल के प्रावधानों में आपत्ति है. कांग्रेस द्वारा जो संशोधन प्रस्ताव दिया गया था उसमें टीडीपी के सांसदों का नाम भी शामिल था.

बीजू जनता दल (बीजेडी) और AIADMK ने कई बार अहम बिलों को पास कराने में केंद्र सरकार का साथ दिया है. लेकिन ये दल भी तीन तलाक बिल के प्रावधानों पर अपना विरोध जता चुके हैं. वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी इस बिल पर विपक्ष के साथ खड़ी दिख रही है. ये सभी दल भी चाहते हैं कि इस विधेयक को सुझावों के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया जाए.

बुधवार को तीन तलाक पर कांग्रेस की तरफ से सीनियर नेता आनंद शर्मा ने संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी. जिसे केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया था. केंद्रीय मंत्री वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये संशोधन 24 घंटे पहले दिए जाने चाहिए थे, इसे अचानक लाने पर सदन आश्चर्यचकित है.

मोदी सरकार ने लोकसभा में बहुमत होने की वजह से आसानी से इसे पारित करा लिया था. लोकसभा में विपक्षी पार्टियों के सभी संसोधन खारिज हो गए थे. लोकसभा में हुई वोटिंग में ये बिल ध्वनिमत से पारित हुआ था. इसके बाद इसे केंद्र सरकार ने महिलाओं के सामाजिक अधिकार और न्याय की बड़ी जीत बताया था.

विपक्ष को इन प्रावधानों पर है ऐतराज़

कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्ष को इस बिल के कुछ प्रावधानों को पर कड़ी आपत्ति है. विपक्ष इस प्रस्तावित कानून में एक बार में तीन तलाक कहने पर पति के ऊपर आपराधिक मुकदमा किए जाने के खिलाफ है. इसके साथ ही उसे प्रस्तावित कानून में होने वाली सजा से भी एतराज है. इसके साथ ही तीन तलाक की पीड़िता महिला को मिलने वाले गुजारे भत्ते को लेकर भी उसकी कुछ शंकाएं हैं, जिनमें वो संशोधन चाहता है.

 राज्यसभा में ये है गणित

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं. इसमें से सात सीटें अभी खाली हैं. 238 सदस्यीय राज्यसभा में कांग्रेस 57 और भाजपा के पास 57 सीटें हैं. इनके अलावा समाजवादी पार्टी के पास 18, अन्नाद्रमुक के पास 13, तृणमूल कांग्रेस के पास 12, बीजेडी के पास 8, लेफ्ट के पास 8, टीडीपी के पास 6, एनसीपी के पास 5, द्रमुक के पास 4, बसपा के पास 4 और राजद के कुल 3 सदस्य हैं. वहीं, भाजपा के पास सहयोगी एनडीए दलों के 20 सांसद हैं.

First published: 4 January 2018, 21:42 IST
 
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