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मोदी सरकार के तीसरे बजट से हताश किसान निराश

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 5:44 IST

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट को लेकर किसान निराश हैं, जबकि जेटली ने अपनी 10 प्राथमिकताओं में किसानों को सबसे ऊपर रखा था. कृषि विशेषज्ञों ने बजट को किसानों के हित में नहीं बताया. कहा कि बजट में इस क्षेत्र के  लिए कुछ नया नहीं है, बल्कि स्थिति पहले से बदतर ही की है. आइए देखते हैं, कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों पर जेटली ने क्या घोषणाएं कीं...

*1.87 लाख करोड़ रुपए- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल निर्धारित राशि. जेटली ने कहा कि यह पिछले साल के आवंटन से 24 फीसदी ज्यादा है.

* 10 लाख करोड़ रुपए-2017-18 के वित्त वर्ष में कृषि कर्ज के लिए नया लक्ष्य. 

* 60 दिन-किसानों के लिए ब्याज माफी की अवधि, जिसकी घोषणा 31 दिसंबर 2016 को बजट से पहले की गई थी. 

*  40 फीसदी-फसल बीमा योजना स्कीम के अंतर्गत नया कवरेज क्षेत्र. पहले 30 फीसदी था. सरकार ने 2018-19 में इसे 50 फीसदी तक बढ़ाना प्रस्तावित किया है. इस साल के लिए 9000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.

* 648-देश के कृषि विज्ञान केंद्रों की संख्या, जहां मिट्टी की गुणवत्ता की जांच के लिए जल्द नई लघु प्रयोगशालाएं लगाई जाएंगी.  

* 40,000 करोड़ रुपए- लॉन्ग टर्म इरिगेशन फंड (एलटीआईएफ)का नया कोष, जिसकी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में सुविधा पहले से है. यह सौ फीसदी वृद्धि है. 

* 5000 करोड़ रुपए-नाबार्ड में समर्पित लघु सिंचाई फंड का शुरुआती कोष.

* 585-मंडियों की कुल संख्या (एपीएमसी), जहां राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) का विस्तार किया जाएगा. फिलहाल यह 250 मंडियां ही कवर करता है. हर ई-एनएएम को 75 लाख रुपए की सहयोग राशि दी जाएगी.

* 2000 करोड़ रुपए-नाबार्ड में डेयरी प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड की व्यवस्था. तीन साल में यह राशि 8000 करोड़ रुपए तक बढ़ा दी जाएगी. 

बड़ी घोषणा

जेटली ने एक बड़ी घोषणा की है, अलबत्ता आसानी से, जिसका पूरा असर बाद में नजर आएगा. उन्होंने घोषणा की कि सरकार ठेके पर खेती के लिए मॉडल कानून तैयार करेगी, जिसे राज्यों द्वारा अपनाने के लिए भेजा जाएगा. इस कदम का कृषि विशेषज्ञों ने स्वागत नहीं किया. कृषि नीति के जाने-माने टिप्पणीकार देविंदर शर्मा ने कहा कि सरकार ने कारपोरेट खेती की ओर कदम बढ़ा दिए हैं. 

शर्मा ने यह भी कहा कि बजट सरकार के अगले 5 सालों में किसानों की आय दुगुनी करने के वादे को पूरा नहीं कर रहा. 

भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़ ने भी निराशा जताई. संपोषित कृषि केंद्र के कृषि वैज्ञानिक जीवी रमनजनेयूलू ने भी कहा कि बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक के सभी बजटों में किसानों की आय दुगुनी करने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ स्पष्ट नहीं है.

First published: 2 February 2017, 8:16 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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