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लोकसभा में आज पेश होगा तीन तलाक पर विधेयक, पीएम मोदी ने की ये अपील

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 December 2017, 12:07 IST

मोदी सरकार गुरुवार को लोकसभा में तीन तलाक को अपराध घोषित करने के लिए 'द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ बिल पेश करेगी. मोदी सरकार की तरफ से केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस बिल को लोकसभा में पेश करेंगे. प्रशनकाल के बाद रविशंकर प्रसाद इस बिल को पेश करेंगे.

भाजपा ने इस बिल को लोकसभा से पास कराने के लिए अपने सासंदों को व्हिप जारी किया है. सरकार ने इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पास कराने के 15 दिसंबर को केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में मजूरी दी थी. केंद्रीय संसदीय मंत्री अंनत कुमार ने सभी पार्टियों से इस बिल को पास कराने की अपील की है.

अनंत कुमार ने बताया, "भाजपा की पार्लियामेंट्री मीटिंग में पीएम ने एक बार में तीन तलाक को गलत बताया. पीएम मोदी ने कहा कि इस बिल के पास होने से महिलाओं को सम्मान और सामाजिक न्याय मिलेगा. इस बिल के पास होन से लैंगिक भेदभाव भी कम होगा'. इस बिल का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं का सुरक्षा देना है."

मोदी सरकार ने इस बिल को ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ का नाम दिया है. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बनाए गए मंत्रियों के समूह ने इस बिल को तैयार किया है.

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक के कई मामले सामने आ रहे हैं. इस तरह से तलाक देने पर दंडित किए जाने का प्रावधान नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक देने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है." मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा था, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी.

First published: 28 December 2017, 12:07 IST
 
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