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SC में जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति को लेकर आमने-सामने आई BJP-कांग्रेस

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 April 2018, 17:35 IST

सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने CJI दीपक मिश्रा को चिट्ठी लिखी है. मोदी सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कोलेजियम सिस्टम के आधार पर जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति करने को कहा है वह संभव नहीं है.

सरकार ने कहा है कि वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस केएम जोसेफ का नंबर 42वां है. हाईकोर्ट के करीब 11 जज उनसे सीनियर हैं. कलकत्ता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और कई हाईकोर्ट के अलावा सिक्किम, मणिपुर, मेघालय के प्रतिनिधि अभी सुप्रीम कोर्ट में नहीं है.

सरकार की तरफ से कहा गया है कि जस्टिस के. एम. जोसेफ केरल से आते हैं, अभी केरल के दो हाईकोर्ट जज सुप्रीम कोर्ट में हैं. पिछले काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में SC/ST का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. कोलेजियम सिस्टम सुप्रीम कोर्ट का ही एक सिस्टम है. अगर केरल के ही एक और हाईकोर्ट जज की नियुक्ति की जाती है तो यह सही नहीं होगा.

वहीं इस पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि हिंदुस्तान की न्यायिक व्यवस्था खतरे में है. उन्होंने कहा कि सरकार अपने लोगों को न्यायिक व्यवस्था में लाना चाहती है. सरकार केवल वही जज चाहती है जिन पर उनकी सहमति हो. सरकार कोलेजियम को नजरअंदाज कर रही. सरकार का एक ही फंडा है कि हम जिनसे समहत नहीं होंगे, उसकी नियुक्ति की मंजूरी नहीं देंगे.

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कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार अपने लोगों को हाईकोर्ट में पैक्ड करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि केएम जोसेफ सबसे काबिल जज हैं. उसके बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हुई. कपिल सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट में जजों की कुल  771 अप्रूव संख्या है. जबकि टोटल 1079. उसमें 410 वैकैंसी है. सरकार जजों के नियुक्ति की मंजूरी नहीं दे रही है.

First published: 26 April 2018, 17:35 IST
 
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