Home » इंडिया » Modi is on first official visit to Russia, have to focus beyond
 

अमेरिका से बेहतर रिश्तोंं के बावजूद भारत-रूस संबंध गाढ़ा बना रहेगा

समीर चौगांवकर | Updated on: 26 December 2015, 0:16 IST
QUICK PILL
  • भारत जहां पश्चिमी देशों को अपने यहां निवेश करने के लिए आमंत्रित कर उनसे दोस्ताना संबंध बनाने में जुटा है, वहीं रूस पश्चिमी देशों के निशाने पर बना हुआ है. 
  • मोदी के सामने पुतिन को यह आश्वस्त करने की चुनौती होगी कि पश्चिमी देशों से उनके प्रगाढ होते संबंधों के बाद भी रूस भारत का स्वाभाविक और पुराना दोस्त है और यह दोस्ती नए दोस्तों के बनने के बाद भी बरकरार रहेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर हैं. मोदी के लिए यह यात्रा काफी अहम है. भारत के अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की अमेरिका से निकटता बढ़ी है. 

मोदी अपने 18 महीने के कार्यकाल में विभिन्न मौकों पर अमेरिका के राष्ट्रपति से मिल चुके हैं और ओबामा ने मोदी को अपना करीबी मित्र बता कर भारत और अमेरिका के संबंधों की गहराई का इजहार भी किया है. जबकि रूस लगातार अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है. 

भारत जहां पश्चिमी देशों को अपने यहां निवेश करने के लिए आमंत्रित कर उनसे दोस्ताना संबंध बनाने में जुटा है, वहीं रूस पश्चिमी देशों के निशाने पर बना हुआ है. जहां चीन और पाकिस्तान द्वारा भारत की सीमा में घुसपैठ कर माहौल खराब करने की लगातार कोशिश की जा रही है. वहीं, रूस, चीन और पाकिस्तान से अपने संबंधों को नए आयाम दे रहा है. 

कुछ माह पूर्व ही रूस ने पाकिस्तान को पहली बार चार जंगी हेलिकॉप्टर देकर इसका संकेत भी दिया है.

भारत-रूस सालाना शिखर सम्मेलन में भाग लेने गए मोदी के सामने पुतिन को यह आश्वस्त करने की चुनौती होगी कि पश्चिमी देशों से उनके प्रगाढ होते संबंधों के बाद भी रूस भारत का स्वाभाविक और पुराना दोस्त है और यह दोस्ती नए दोस्तों के बनने के बाद भी बरकरार रहेगी. 

पश्चिमी देशों की घेरेबंदी से परेशान रूस भारत के बाजार पर नजर गड़ाए हुए है. दुनिया के तमाम देशों के लिए अपना बाजार खोल रहे मोदी रूस के साथ रिश्तोंं को मजबूत करना चाहते हैं. साल 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 67,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,01,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक ले जाने का रास्ता खोजने मे लगे हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिसंबर में मोदी और पुतिन ने दिल्ली में 15वें शिखर सम्मेलन के दौरान वर्ष 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 2,01,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया था. रूस में भारत का निवेश 46,900 करोड़ रुपये के करीब है जबकि भारत में रूस का निवेश 20,100 करोड़ रुपये के करीब है.

रक्षा के क्षेत्र में रूस भारत का सहज सहयोगी बना रहेगा

मोदी सरकार के आने के बाद रक्षा सौदों में भले ही रूस की तुलना में पश्चिमी देशों को ज्यादा तवज्जो दी गई हो. लेकिन रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि रूस ही भारत का रक्षा के क्षेत्र में सहज सहयोगी रहेगा. 

इसके लिए अधिकारी अटल बिहारी वाजपेयी और पुतिन के बीच हुए समझौतेे की याद दिलाते हुए कहते है कि रूस ही वह एकमात्र देश है जो भारत को संवेदनशील प्रौद्योगिकी देने के साथ ही उसके हथियारों पर किसी तरह की पांबदी नहीं लगाता है. 

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जब डीआरडीओ के साथ रूस की रक्षा कंपनियों की 75 से ज्यादा अनुसंधान व विकास परियोजनाएं जारी हों तो उस समय आप रूस के महत्व को कम करने की स्थिति में नहीं हो सकते. भले ही अभी अमेरिका आपका सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिदाता बन गया हो. 

आज भी भारत में विमानवाहक, आईएनएस विक्रमादित्य, लडाकू टैंकों, बख्तरबंद गाड़ियों, पनडुब्बियों, लडाकू विमानों का लगभग पूरा बेड़ा रूस निर्मित है और इन सबकी मरम्मत और सही संचालन के लिए रूस की अहमियत बनी रहेगी. इसलिए किसी और देश द्वारा रूस का स्थान लेना इतनी जल्दी संभव नहीं होगा.

दिग्गज उद्योगपति रक्षा क्षेत्र में उतरने की तैयारी में!

देश के नामचीन उद्योगपति एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में हाथ आजमा सकते हैं. मोदी की रूस यात्रा के दौरान यह उद्योगपति रूस के साथ रक्षा के क्षेत्र में लगनेवाले उपकरणों के निर्माण का समझौता कर सकते हैं. 

टाटा, महिंद्रा, रिलायंस और अडानी जैसे समूहों ने इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई है. अडानी ने हाल ही में अपनी डिफेंस इकाई बनाई है और अडानी ग्रुप अब मेक इन इंडिया के तहत देश में युद्धपोत बनाने की कोशिश में है. 

अडानी अपनी नई इकाई अडानी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड के माध्यम से हेलिकॉप्टर बनाने का लाइसेंस पाने की कोशिश में है. रिलायंस ने पिपावाव शिपयार्ड का अधिग्रहण किया है. वहीं, सुखोई सुपर जेट से जुडे रडार और डायरेक्शन कंट्रोल सिस्टम में टाटा ग्रुप ने दिलचस्पी दिखाई है.

भारत का रूस ने कब-कब दिया साथ

  • कश्मीर मामले पर रूस भारत के साथ रहा.
  • भारत ने जब परमाणु परीक्षण किया तब भी रूस भारत के साथ था.
  • कारगिल युद्ध के समय भी रूस ने भारत का साथ दिया.
  • दुनिया के तमाम देशों के विरोध के बाद भी भारत के परमाणु उर्जा संयत्रों की नीति का रूस ने सहयोग किया.
  • यूएन में भारत की स्थायी सीट का रूस ने समर्थन किया.

रूस के साथ भारत कब-कब खड़ा रहा

  • 1979 में अफगानिस्तान पर रूस के कब्जे पर भारत ने रूस की निंदा नहीं की और मौन समर्थन किया.
  • पिछले साल क्रिमिया पर रूस के कब्जे पर जब पश्चिमी देश रूस के खिलाफ थे तब भी भारत रूस के खिलाफ मुहिम का हिस्सा नहीं बना.
  • रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद भी भारत ने रूस के प्रति हमदर्दी दिखायी.
  • सिरिया में भी रूस के घुसपैठ को भारत ने मौन समर्थन दिया और रूस की निंदा नहीं की.
First published: 26 December 2015, 0:16 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

पिछली कहानी
अगली कहानी