Home » इंडिया » Modi-Pompeo meet four points on which everyone's eyes
 

मोदी-पोम्पिओ मुलाकात: वो चार मुद्दे जिन पर टिकी है भारत और अमेरिका की दोस्ती

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2019, 14:09 IST

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो अपनी भारत यात्रा के दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे. बीते दिनों भारत और अमेरिका के बीच शुरू हुए व्यापार तनाव के बीच उनकी इस यात्रा को अहम माना जा रहा है. चार ऐसे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा हो सकती है.

ट्रेड वॉर : बीते दिनों भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव बना हुआ है. ट्रम्प अक्सर हार्ले डेविडसन बाइक सहित कई अमेरिकी उत्पादों पर उच्च टैरिफ का हवाला देते देते रहे हैं. ट्रंप ने भारत को टैरिफ किंग करार दिया था. हालही में अमेरिका से जीएसपी का दर्जा भी छीन लिया. इसके जवाब में 16 जून को भारत ने इसके बदले में कई 28 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगा दिया. अपनी यात्रा के दौरान पोम्पिओ अपने भारतीय समकक्ष के साथ जीएसपी, डेटा स्थानीयकरण और अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापार बाधाओं सहित विषयों पर चर्चा कर सकते हैं.

तेल की कीमतें : कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और भारतीय उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव की संभावना अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल रिचर्ड पोम्पिओ की यात्रा के दौरान चर्चा में रहने की संभावना है. यह यात्रा फ़ारस की खाड़ी में ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा उत्पादन प्रतिबंधों के साथ बढ़ते तनाव को लेकर हो सकती है. भारत 2018-19 में 23.5 मिलियन टन के आयात के साथ ईरान के शीर्ष तेल खरीदारों में शामिल था. हालांकि चीन और भारत सहित आठ देशों को ईरानी तेल आयात पर अमेरिका की सशर्त छूट दी थी. भारत ने ईरान से सभी तेल आयातों को रोक दी है.


चूंकि भारत अपनी जरूरत के 80% से अधिक कच्चे तेल और 18% प्राकृतिक गैस का आयात करता है. इसलिए उच्च ऊर्जा कीमतें महंगाई बढाती हैं और देश की आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाती हैं. देश के सबसे बड़े रिफाइनर इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने पहली बार नॉर्वे के इक्विनोर एएसए और अल्जीरिया की राज्य ऊर्जा कंपनी सोनटैर्च से 2019-20 के लिए कुल कच्चे तेल के 4.6mt के दो टर्म अनुबंधों को शामिल किया है. भारत अमेरिका से तरल प्राकृतिक गैस और तेल का स्रोत भी तैयार कर रहा है, भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी शेल गैस परिसंपत्तियों में 4 बिलियन डॉलर का निवेश किया है.

5G इंटरनेट : भारत वर्तमान में 5G के लिए एक रोड मैप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जो कि वायरलेस संचार के लिए अगली पीढ़ी की तकनीक है जो डेटा गति में सुधार और इंटरनेट ऑफ थिंग्स को बेहतर बनाने की उम्मीद कर रहा है. इससे विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, परिवहन और कृषि को जोड़ने की उम्मीद है. इस महीने की शुरुआत में भारत के दूरसंचार विभाग ने आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी पर सेक्टर नियामक की सिफारिशों की व्यापक समीक्षा करके 5G रोलआउट के लिए प्रक्रिया शुरू की.

अमेरिका चाहता है कि भारत इस प्रक्रिया में चीन की दिग्गज कंपनी हुआवेई को शामिल न होने दे. अमेरिका ने हुआवेई पर कई प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका ने चीनी कंपनी पर जासूसी के आरोप लगाए हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका इस मामले में भारत पर दबाव अल सकता है. ऑस्ट्रेलिया और जापान ने हुआवेई पर प्रतिबंध लगा दिए है, जबकि कनाडा और न्यूजीलैंड को सूट का पालन कर कर सकते हैं. हालांकि रूस, तुर्की, सऊदी अरब ने हालांकि, हुआवेई का स्वागत किया है.

एच 1 बी वीजा: पोम्पिओ की इस यात्रा के दौरान भारत यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या अमेरिका एच 1 बी वीजा की संख्या को सीमित करने की योजना बना रहा है. हालही में कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका भारत के टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में लोकप्रिय एच -1 बी वीजा कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने की योजना बना रहा है. कहा गया कि वह अमेरिका नहीं चाहता कि भारत अमेरिकी कंपनियों दे डेटा को संगृहीत करे. भारत प्रत्येक वर्ष दिए जाने वाले 85,000 अस्थायी वीजा का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है. भारतीयों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए H-1B कार्यक्रम के तहत बहुत बड़ा योगदान दिया है.

मोदी सरकार क्यों लगाना चाहती है अमेज़न-फ्लिपकार्ट की ऑनलाइन छूट पर रोक ?

First published: 26 June 2019, 11:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी