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दो मंगलयान अभियान के बराबर खर्च किया है प्रधानमंत्री ने ढाई साल में अपने विज्ञापनों पर

चारू कार्तिकेय | Updated on: 29 November 2016, 7:32 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि मोदी सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं. 
  • कुछ महीने पहले इसी तरह का आरोप आम आदमी पार्टी पर भी लगा था, तब भाजपा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि आप सिर्फ़ अपने प्रचार में लगी हुई है.

केंद्र सरकार ने पिछले ढाई साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रूपए खर्च कर दिए. आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है. आरटीआई कार्यकर्ता रामवीर सिंह के सवालों पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. यह खर्च एक जून 2014 से 31 अगस्त 2016 के बीच किया गया. 

हिसाब लगाया जाए तो इसका मतलब है कि सिर्फ विज्ञापनों पर सरकार ने 1.4 करोड़ रूपए रोज़ाना खर्च किए हैं. देखा जाए तो यह भारत के मंगल अभियान मंगल यान के खर्च से दोगुना है. इसे दुनिया का सबसे कम खर्चीला अंतरग्रहीय अभियान माना जाता है, जिसकी कीमत सिर्फ 450 करोड़ रुपए है. 

एसएमएस पर 17 करोड़

विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रचार विभाग ने विज्ञापनों पर किए गए इस खर्च को विभिन्न मदों के तहत दिखाया है. इसमें टेलीविजन, रेडियो, सिनेमा, इंटरनेट और एसएमएस तक को शामिल किया गया है. सबसे ज्यादा खर्च प्रसारण में किया गया, जो कि पिछले ढाई साल में करीब 200 करोड़ रुपए है. यहां तक कि सिर्फ एसएमएस पर ही डीएवीपी ने 17 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिया, जो कि अंदाजन 2 लाख रुपए प्रतिदिन है. 

यह ख़र्च सिर्फ़ प्रसारण/टेलीविजन, इंटरनेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का है. इसमें प्रिंट विज्ञापन, होर्डिंग्स, पोस्टर, बुकलेट और कैलेंडर शामिल नहीं हैं. अगर ये खर्च भी जोड़ लिए जाएं तो कुल खर्च की राशि काफी अधिक हो सकती है. मजेदार बात यह है कि इस साल दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार भी इसी तरह के मामले में आलोचना का शिकार हो चुकी है. ऐसे ही एक आरटीआई के सवाल पर यह जानकारी दी गई थी कि आप पार्टी सरकार विज्ञापनों पर प्रतिदिन 16 लाख रुपए खर्च कर रही थी. 

'आप' पर भी आरोप

साल 2015 में आप सरकार ने पूरे वित्तीय वर्ष में विज्ञापनों पर 526 करोड़ रूपए खर्च किए थे. उस वक्त बीजेपी ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर खुद का महिमा मंडन करने का आरोप लगाया था. तब बीजेपी ने कहा था, ‘आप ऐसी पार्टी बन गई है, जिसका काम सिर्फ अपना प्रचार करना रह गया है.’

इंडिया शाइनिंग पार्ट टू?

आरटीआई के तहत हुए इस खुलासे से विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है, वह भी उस वक्त जब सरकार पहले ही नोटबंदी के निर्णय पर घिरी हुई है. सीपीआई (एम) के मोहम्मद सलीम ने कैच से कहा कि सिर्फ एक ही व्यक्ति के उत्थान के लिए सरकार द्वारा किया जा रहा पीआर आपातकाल की याद दिलाता है, जब देश में ‘इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा का नारा बुलंद था. 

उन्होंने कहा सरकार ऐसा इसलिए कर रही है ताकि वह लोगों के जेहन से यह बात हटा सके कि वह आधा कार्यकाल खत्म हो जाने के बावजूद वह अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई है. सलीम ने कहा, सरकार की यह कवायद बेकार जाएगी और भारी भरकम खर्च किए जाने के बावजूद यह प्रचार अभियान भी 1998 के एनडीए 1 के ‘इंडिया शाइनिंग’ की तरह ही बेकार साबित होगा. 

राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता मनोज झा ने कैच से कहा कि उनकी पार्टी तो हमेशा से ही कहती रही है कि इस सरकार का काम कोरा दिखावा करना है और विज्ञापनों पर किया गया खर्च उनके इस तर्क को और पुख्ता करता है. झा ने कहा कि इसे इस संदर्भ में देखना होगा कि सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और मनरेगा पर खर्च में कटौती करके सारा पैसा प्रचार-प्रसार पर लगा रही है. जाहिर है, इस सरकार को बस अपने ही गुण्गान से मतलब है. उन्होंने कहा यह बीजेपी की आत्मप्रशंसा की राजनीति है. 

ग़लत क्या है?

हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जो इसे गलत नहीं मानते और सरकार की आलोचना नहीं करते. बीजू जनता दल के भर्तृहरि मेहताब ने कैच से कहा, यह सरकार कई योजनाएं मिशन के तहत चला रही है, जैसे स्वच्छ भारत अभियान. और प्रधानमंत्री इन योजनाओं के असल प्रणेता हैं. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ भी गलत है.

First published: 29 November 2016, 7:32 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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