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नोटबंदी ने लकड़ी के पांच लाख कामगारों को बेरोज़गार किया: आरएसएस सदस्य

सुहास मुंशी | Updated on: 11 February 2017, 5:44 IST
(कैच न्यूज़)

उत्तर भारत की इमारती लकड़ी उद्योग के जितने भी हिस्सेदार हैं जैसे किसान, मजदूर, कमीशन एजेंट और लघु उद्योगों के मालिक सभी को नोटबंदी के बाद से अब तक कम से कम 180 करोड़ का नुकसान हुआ है.

हरियाणा एग्रो फॉरेस्ट्री फॉर्मर एसोसिएशन रणजीत रैना, जो कि आरएसएस के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का सदस्य होने का दावा भी करते हैं, के अनुसार 8 नवंबर के बाद से कैश की किल्लत के कारण अब तक कम से कम 5 लाख मजूदर यहां अपना काम गंवा चुके हैं. 

रैना का कहना है कि वे इस बारे में बोल रहे हैं क्योंकि संघ से और कोई इसके बारे में कुछ नहीं बताएगा. रैना सिर्फ यहीं नहीं रुकते हैं. वह अपने वकीलों से चर्चा कर रहे हैं जिससे कि प्रधानमंत्री की बड़ा योजना को चुनौती दी जा सके. जब रैना पिछले दिनों दिल्ली में थे तब कैच टीम ने उनसे बात की.

सवाल-जवाब

आप दावा कर रहे हैं कि नोटबंदी के कारण इमारती लकड़ी का उद्योग तबाह हो गया है. थोड़ा विस्तार से बताएं?

नोटबंदी की घोषणा के सप्ताह भर बाद ही इमारती लकड़ी का पूरा उद्योग बंद हो चुका था. इस क्षेत्र में कम से कम 3000 प्लायवुड बनाने वाली इकाइयां हैं जिसमें 5 लाख कामगर लगे हुए हैं. इन सभी यूनिटों में काम रुक गया है और कामगरों को हटा दिया गया है.

यमनुानगर के जगधारी के इमारती उद्योगों में सिर्फ हरियाणा से ही लकड़ी नहीं आती है बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब, कश्मीर से भी यहां लकड़ी आती है. इसलिए यह समस्त क्षेत्र इससे प्रभावित हुआ है.

यहां लगभग 4 लाख क्विंटल या 6 करोड़ की लागत की इमारती लकड़ी का रोज लेनदेन होता है. इस तरह एक माह की बंदी का मतलब है कि कम से कम 180 से 200 करोड़ रुपये का नुकसान. यह नुकसान इस इंडस्ट्री के सभी हिस्सेदारों का है.

हमने कमीशन एजेंटों से भी बात की है. उनके अनुसार किसान अब जो भी लकड़ी ला रहे हैं उसके एवज में उन्हें पैसे नहीं सिर्फ आईओयू की रसीद मिल रही है. यही नहीं अब कारख़ानों में भी सिर्फ अपनी क्षमता का 30 प्रतिशत ही काम कर रही हैं और मात्र 50 प्रतिशत ही लकड़ी आ रही है.

आपका इस इंडस्ट्री से क्या संबंध है. किस आधार पर आप यह सब दावा कर रहे हैं?

मैं इस इंडस्ट्री को जानता हूं क्योंकि मैं खुद एक किसान हूं. यमुनानगर-जगाधरी नॉर्थ इंडिया में इमारती लकड़ी के उद्योग का हब है. मैं यहां रहता आया हूं और यहां के लोगों का निजी रूप से जानता हूं. मैं हरियाण एग्रोफॉरेस्ट्री फॉर्मर एसोसिएशन का अध्यक्ष हूं. हरियाणा फॉरेस्ट कॉरपोरेशन का नामित सदस्य हूं और फॉरेस्ट रिसर्च एसोसिएशन, देहरादून का सदस्य हूं. मैं खुद भी पहाड़ी पीपल और यूकेलिप्टस उगाता हूं, इसलिए कारोबारी के रूप में भी इमारती लकड़ी और कृषि उद्योगों के बारे में जानता हूं.

आपका दावा है कि आप आरएसएस और भाजपा के भी सदस्य हैं?

मैं 2006 से आरएसएस का सदस्य हूं. मेरा पूरा परिवार हिंदू महासभा से गहरे रूप से जुड़ा रहा है. लाला लाजपत राय के बाद मेरे पिता राजा नरेंद्र नाथ 1926 में हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे हैं. मेरे पिता के संघ से भी गहरे संबंध थे.

लेकिन आप खुद संघ में क्या काम कर चुके हैं और किस हैसियत से संघ से जुड़े हुए हैं?

मैं पिछले दो साल से संघ के राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का सदस्य हूं और इंद्रेश कुमार के अंडर में काम कर चुका हूं. मैं भाजपा का भी सक्रिय सदस्य हूं.

क्या आपने संघ के अंदर लोगों से बात की है. अगर हां, तो ऐसा क्यों कि संघ से सिर्फ आप ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोल रहे हैं?

मैंने संघ के अंदर लोगों से बात की है लेकिन वे अब डिप्लोमैटिक हो रहे हैं. शायद यह वह समय है जब कोई भी नरेंद्र मोदी के दूसरी तरफ खड़ा दिखना नहीं चाहता. किन्हीं कारणों से मैं इस सब के बारे में चिंतित नहीं हूं और न ही इस बारे में अपने साथियों की ओर से बात कर सकता हूं. इसलिए मैं नहीं बता सकता कि सिर्फ मैं ही इस बारे में क्यों बोल रहा हूं.

जिन भी राज्यों के बारे में आपने बात की है कि वे इमारती लकड़ी के उद्योग से जुड़े हुए हैं, उन सभी में कुछ समय में चुनाव होने जा रहे है.. इसलिए जिस समय आप बात कर रहे हैं वो संदेह पैदा करती हैं. यह भी तो हो सकता है कि आप कांग्रेस के एजेंट हों.

मैं कांग्रेस का एजेंट नहीं हूं. यह एक तथ्य है कि मैं भाजपा का सक्रिय सदस्य हूं. जहां तक चुनाव की बात है, तो मेरा पक्का मानना है कि डिमोनेटाइजेशन का भाजपा के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ना तय है.

तो आप प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से इमारती लकड़ी उद्योग की तबाही के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं?

निश्चित रूप से. पीएम ने खुद इसका क्रेडिट लिया है और वे खुद ही इस स्कीम को लेकर आए हैं जिसने कृषि उद्योग की कब्र खोद दी. लाइन में खड़े होकर हजारों लोगों ने अपने रोजगार गंवा दिए. प्रधानमंत्री को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए. मैं तो इस बारे में अपने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से बात भी कर रहा हूं कि कैसे प्रधानमंत्री के खिलाफ जरूरी लीगल कार्रवाई की जा सकती है.

First published: 14 January 2017, 8:26 IST
 
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