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नोटबंदी पर केजरीवाल का हमला: 'मोदी ने बिड़ला और सहारा समूह से ली घूस'

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 February 2017, 8:22 IST
QUICK PILL
  • नोटबंदी पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है. 
  • उन्होंने नोटबंदी के फ़ैसले को वापस लेने की मांग करते हुए पीएम पर आरोप लगाया कि उन्होंने बड़े कॉरपोरेट घरानों बिड़ला और सहारा से रिश्वत ली है. 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी विपक्षी दलों के नेताओं से आगे बढ़कर नोटबंदी को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर उनकी सरकार ने विमुद्रीकरण से ज्यादा मोदी को भला-बुरा कहा. केजरीवाल के तीखे प्रहार का मकसद इस योजना की वापसी के लिए प्रस्ताव लाने से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले करने का था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का नाम बिरला की डायरी में दर्ज है.

प्रधानमंत्री पर रिश्वत के आरोप

उन्होंने कुछ कागजात दिखाते हुए दावा किया कि ये 15 अक्टूबर 2013 को आदित्य बिड़ला समूह पर पड़े आयकर के छापे की रिपोर्ट की प्रतियां हैं. समूह के तत्कालीन उपाध्यक्ष शुभेन्दु अमिताभ ने 25 करोड़ रुपए की रिश्वत गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को दी थी. केन्द्र में भाजपा के सत्ता में आने के तुरंत बाद यह मामला निपटान आयोग के सुपुर्द कर पूरी तरह दफना दिया गया.

फिर केजरीवाल ने सबसे गंभीर आरोप लगाने शुरू किए. उन्होंने दिल्ली की विधानसभा में दावा किया कि आदित्य बिड़ला समूह के ये कागजात मोदी के कार्पोरेट घरानों से रिश्वत लेने के अकेले उदाहरण नहीं हैं. सहारा समूह पर 22 नवंबर 2014 को पड़े छापों में 130 करोड़ से अधिक रुपए और 400-500 करोड़ के लेन-देन के दस्तावेज बरामद हुए थे. इन पर भी नरेंद्र मोदी का नाम दर्ज है. इसके ठीक छह माह बाद मोदी प्रधानमंत्री बन गए. 

हालांकि केजरीवाल के पास ये दस्तावेज मौजूद नहीं थे. उन्होंने सदन को बताया कि जल्दी ही वे इन दस्तावेजों को भी पेश करेंगे. इसके लिए साक्ष्य जुटाने की बजाय चतुरता से उन्होंने इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए मोदी को नैतिकता के आधार पर प्रधानमंत्री पद छोड़ने की मांग की.

केजरीवाल ने जैन हवालाकांड का जिक्र भी किया जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवानी का नाम जुड़ा था. उन्होंने मोदी को अपने उन अग्रज नेताओं से नसीहत लेकर जांच पूरी होने तक इस्तीफा देने की सलाह दी.

विपक्ष में एकजुटता नहीं

केजरीवाल ने यह जुबानी तीर ऐसे समय में छोड़े हैं जब जल्द ही शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए विपक्ष में एकता की कमी की खबरें आ रही थी. अभी तक अन्य विपक्षी दल न केवल एकजुटता दिखाने में नाकाम रहे बल्कि सरकार को अपने कदम वापस लेने को मजबूर करने के लक्ष्य से देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आदि आयोजित कर पाने में भी असफल रहे.

तृणमूल कांग्रेस सिर्फ राष्ट्रपति से मिलने की सोच रही थी और कांग्रेस का विचार महज संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने तक सीमित था. दोनों को सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला.

मृतकों के लिए मौन

मोदी की नोटबंदी की घोषणा के बाद केजरीवाल पहले दिन पूरी तरह चुप रहे. विधानसभा सत्र का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने यह योजना बनाई कि 70 सदस्यीय सदन में बहुमत के बल पर किस तरह तूफान खड़ा किया जा सकता है. वित्त मंत्री सिसोदिया ने कार्यवाही शुरू करते हुए घोषणा की कि विमुद्रीकरण से उत्पन्न परेशानियों के चलते देश में 25 लोगों की मौत हो चुकी है. इन मृतकों के लिए सदन को दो मिनट का मौन रखना चाहिए.

उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश भर के व्यापारी, मजदूर और महिलाएं बहुत मुसीबत में हैं. कालेधन के खतरे से निबटने के लिए प्रधानमंत्री ने पूरे देश को असमंजस में झोंक दिया. विधायक अमानतुल्ला खान ने इसे तुगलकी फरमान कहा.

विधायत अल्का लांबा ने कहा कि इससे आपातकाल के दिनों की राजनीतिक अराजकता की याद ताजा हो गई. अन्य विधायकों ने भाजपा नेताओं से कहा कि वे उनके साथ जेजे कॉलोनी चलें और देखें कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में क्या कहा था? वे सब कालेधन वाले वहां कतार में खड़े हैं.

विजेन्दर गुप्ता ने उड़ाया मज़ाक

तीन सदस्यीय कमजोर विपक्ष के नेता भाजपा विधायक विजेन्दर गुप्ता ने केन्द्र सरकार के बचाव में साहसिक रुख अपनाते हुए 'आप' का सामना किया. उन्होंने आपातकालीन सत्र का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इस तरह के सत्र बुलाना आप सरकार का रिकॉर्ड रहा है. 

गुप्ता ने केजरीवाल से पूछा कि विमुद्रीकरण का मादक पदार्थों के कारोबारियों, नकली नोट चलाने वालों और हवाला धंधेबाजों पर असर क्यों नहीं पड़ेगा? इस कदम का विरोध करके आप ने अपने को उन ताकतों के साथ खड़ा कर लिया है. ज्यादा उग्र रुख अपनाने पर विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने मार्शलों को उन्हें सदन से बाहर निकालने के आदेश दिए.

हालांकि केजरीवाल ने बहस की पहल करते हुए इस बारे में एक प्रस्ताव राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के समक्ष रखने की पेशकश की. उन्होंने मोदी पर हमले के लिए घातक हथियार बहस के अंत तक रोके रखा. उन्होंने कहा तीन दिन से वे यही कह रहे हैं कि काले धन के खिलाफ यह कोई ठोस कार्रवाई नहीं है और प्रधानमंत्री ने अपने चहेतों को बचा लिया है. 

राष्ट्रपति से गुहार

विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव हाथों-हाथ पारित कर सदन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे सरकार को यह योजना वापस लेने के निर्देश दें, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस योजना की जांच कराई जाए और कोर्ट बिड़ला व सहारा समूह के रिश्वतकांड की जांच के आदेश भी दे.

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जल्द ही सोशल मीडिया पर इस मामले में अभियान चलाएगी. आप का कहना है कि पद पर रहते हुए किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ घूसखोरी के आरोप का यह पहला मामला है और इसका जोर-शोर से प्रचार किया जाएगा.

First published: 16 November 2016, 8:00 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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