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खुलासा: 'मोदीकेयर' योजना में हो रहे रूट कैनाल जैसे ईलाज, ज्यादातर अस्पताल मान्यताप्राप्त नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 November 2018, 12:12 IST

सरकार द्वारा जुटाए गए आयुष्मान योजना के दो महीनों के आंकड़ों से इस बात का खुलासा हुआ है कि मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई देश की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम आयुष्मान भारत योजना यानी मोदीकेयर के तहत गंभीर बीमारियों से ज्यादा आम बीमारियों का इलाज हो रहा है. रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि मोदीकेयर को लेकर मान्यताप्राप्त अस्पतालों ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट की माने तो आंकडों के अनुसार इस योजना के तहत मोतियाबिंद, डेंटल रूट कैनाल और सामान्य प्रसव जैसे ट्रीटमेंट करवाए जा रहे हैं. इस योजना के तहत 6,900 मरीजों के मोतियाबिंद का इलाज हुआ जबकि 4,900 मरीजों ने रूट कैनाल करवाया. इस योजना के तहत 4,500 महिलाओं का सामान्य प्रसव करवाया गया.

जानकारों की माने तो आयुष्मान भारत योजना में सूचीबद्ध ज्यादातर अस्पताल सामान्य चिकित्सा में विशेषज्ञता वाले हैं. कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज करने वाले अस्पतालों की संख्या इसमें कम है. सामान्य सर्जरी की विशेषज्ञता रखने वाले 7,000 अस्पताल इस योजना में शामिल है. बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार आयुष्मान भारत में सूचीबद्ध अस्पतालों में से 66 फीसदी मान्यताप प्राप्त नहीं हैं.

इसके तहत 11 फीसदी अस्पतालों को एनएबीएच से मान्यता मिली है. जबकि 73 फीसदी अस्पताल इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के शामिल हैं. रिपोर्ट मुताबिक आयुष्मान भारत के तहत ज्यादातर इलाज गुजरात में हुआ जहां 50,000 से अधिक मरीजों ने इलाज करवाया. इस योजना के तहत 50 करोड़ गरीबों को 500,000 रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जाना है. वित्त वर्ष 2018-19 में इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 60 अरब रुपये का बजट रखा है.

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First published: 27 November 2018, 12:08 IST
 
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