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मोदी-शरीफ मुलाकात: जिंदल, स्टील और व्यापार

अतुल चौरसिया | Updated on: 29 December 2015, 12:13 IST
QUICK PILL
  • 11 साल\r\nबाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री\r\nकी पाकिस्तानी जमीन पर उतरने\r\nकी पृष्ठभूमि तैयार करने वाले\r\nशख्स के तौर पर सलमान बशीर का\r\nनाम सामने आ रहा है. इस\r\nविचार को आगे बढ़ाने का काम\r\nभारत के उद्योगपति सज्जन जिंदल ने किया.
  • प्रधानमंत्री\r\nनवाज़ शरीफ का परिवार भी स्टील के\r\nधंधे में है. उनके\r\nपरिवार की कंपनी \'इत्तेफाक\r\nग्रुप ऑफ कंपनीज़\' स्टील\r\nके व्यापार में है.\r\nपाकिस्तान\r\nके हिस्से वाले पंजाब में इसका\r\nलंबा-चौड़ा\r\nस्टील कारोबार है.

25 नवंबर को क्रिसमस के मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक से पाकिस्तान में ठहरना मीडिया, राजनीति, कूटनीति सबको अचंभे में डाल गया. यह देखते हुए कि नरेंद्र मोदी का ठहराव और भी अजीब लगता है जब उन्होंने सुबह-सुबह ही काबुल में अफगानी संसद भवन का उद्घाटन करते हुए आंतक को शह देने वाले देशों को लताड़ा था.

हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा समझा जा सकता है. और फिर दोपहर को वे लाहौर जा पहुंचे. कूटनीति में इस तरह के कदम यदाकदा देखने को मिलते हैं और जब मामला भारत-पाकिस्तान के बीच हो तो इसकी संभावना और भी कम हो जाती है.

कूटनीति और सुरक्षा के तकाजे से देखें तो एक भारतीय प्रधानमंत्री की पाकिस्तान की सरप्राइज यात्रा संभव नहीं है, वहां के आंतरिक हालात के मद्देनजर. सत्ता के गलियारों में जो चर्चाएं हैं उनकी माने तो मोदी का लाहौर में ढाई घंटे का यह ठहराव बहुत पहले से नियोजित तो नहीं था लेकिन इसकी नींव कई दिन पहले ही पड़ चुकी थी.

इसको अमलीजामा पहनाने का काम एक पाकिस्तानी राजदूत और स्टील उद्योग से जुड़े दो व्यापारिक घरानों ने की. ये वही स्टील परिवार है जिसका इशारा शुक्रवार की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा कर रहे थे.

मोदी-शरीफ के हालिया रिश्तों के पीछे मुंबई के स्टील किंग सज्जन जिंदल का नाम आ रहा है

11 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पाकिस्तानी जमीन पर उतरने की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले शख्स के तौर पर सलमान बशीर का नाम सामने आ रहा है. बशीर पूर्व में भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तौर काम कर चुके हैं. हाल ही में बशीर भारत की यात्रा पर थे. कहा जा रहा है कि अपनी भारत यात्रा के दौरान ही उन्होंने इस औचक मुलाकात का विचार दिया था.

इस विचार को आगे बढ़ाने का काम भारत के एक उद्योगपति परिवार ने किया. इसके पीछे मुंबई के स्टील किंग सज्जन जिंदल का नाम सामने आ रहा है. सज्जन जिंदल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खास मित्रों में हैं. यह भी अजब संयोग है कि प्रधानमंत्री शरीफ का परिवार भी स्टील के धंधे में है.

उनके परिवार की कंपनी 'इत्तेफाक ग्रुप ऑफ कंपनीज़' स्टील के व्यापार में है. पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब में इसका लंबा-चौड़ा स्टील कारोबार है. इस कंपनी की स्थापना नवाज शरीफ के पिता मुहम्मद शरीफ ने की थी.

जिस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मोदी लाहौर में रुके थे उसमें सज्जन जिंदल खुद मौजूद थे. उन्होंने मोदी के लाहौर पहुंचने के दौरान ही अपने ट्विटर एकाउंट पर संदेश लिखा, 'वे भी लाहौर में शरीफ को बधाई देने के लिए मौजूद रहेंगे.' मौका नवाज शरीफ के जन्मदिन के साथ ही उनकी पोती की शादी का भी था जिसमें हिस्सा लेने के लिए सज्जन जिंदल पिछले कुछ दिनों से लाहौर में थे.

सज्जन जिंदल का मोदी और शरीफ दोनों नेताओं से नजदीकी संबंध है

यह मानना, कि मोदी ने काबुल से लौटते हुए बीच रास्ते में लाहौर रुकने की योजना बनाई होगी, थोड़ा मुश्किल है. भारत पाकिस्तान के बीच बैकरूम डिप्लोमेसी हमेशा चलती रहती है. उस स्थिति में भी जब दोनों देशों के रिश्तों में जबर्दस्त तनाव रहता है. चाहे वह 2008 में मुंबई का हमला रहा हो या फिर 1999 में कारगिल युद्ध.

पाकिस्तान में बीबीसी के पूर्व पत्रकार हफीज चाचड़ कहते हैं, 'इतने शीर्ष स्तर की कोई यात्रा अचानक से नहीं हो सकती. परिस्थितियां बताती हैं कि कम से कम हफ्ते भर पहले से इसकी तैयार चल रही थी. जो नई बात इस यात्रा से जुड़ी है वह है व्यापार. शरीफ लंबे समय से भारत के साथ हर तरह के व्यापार के समर्थक रहे हैं, लेकिन फौज के चलते ऐसा कर पाने में असफल रहे हैं. मोदी की इस यात्रा में गौरतलब बात यह भी है कि एक तरफ सज्जन जिंदल का नाम सामने आ रहा है दूसरी तरफ नवाज शरीफ के बेटे का व्यापारिक रिश्ता उनसे सीधे जुड़ा है.'

इस बात को आगे बढ़ाते हुए भाजपा की एनर्जी सेल के राष्ट्रीय प्रमुख नरेंद्र तनेजा कहते हैं, 'आर्थिक, सामरिक और सुरक्षा हित आज की तारीख में कूटनीति को तय करते हैं. आप आर्थिक रिश्तों को मजबूत होने दें और राजनीति और सियासी मुद्दों को सुलझाने का काम राजनेता करेंगे. चीन से हमारे रिश्ते इसका उदाहरण हैं. तापी गैस पाइपलाइन एक और उदाहरण है आर्थिक कूटनीति का'.

अगर आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे तो राजनीति में मौजूद तनाव कम होगा. तनेजा के मुताबिक, 'यह 2015 है. आज की तारीख में पूरी दुनिया में 80 फीसदी कूटनीति आर्थिक हितों से तय होती है.'

हालांकि तनेजा इस बात से पूरी तरह इनकार करते हैं कि कोई बिजनेसमैन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक करवा सकता है. उनके मुताबिक कुछ ही दिन पहले दोनो प्रधानमंत्री पेरिस में मिल चुके हैं, दोनों के बीच हॉटलाइन है. उन्हें आपस में मिलने या बात करने के लिए किसी बिजनेसमैन की जरूरत नहीं है.

मोदी की यात्रा की जानकारी भारत और पाकिस्तान में कुछ बेहद गिने-चुने लोगों को ही थी

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच मुलाकात को अमलीजामा पहनाने की औपचारिकता शुक्रवार की सुबह मोदी ने काबुल से उन्हें फोन करके पूरी की. मोदी ने शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी और बदले में शरीफ ने उन्हें लाहौर रुकने का प्रस्ताव दिया.

जिंदल जिनका नाम इस पूरे घटनाक्रम के सूत्रधार के रूप में उभर रहा है वे भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक हल्के में जाना पहचाना नाम हैं. इससे पहले 2014 के नवंबर महीने में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन में भी दोनों नेताओं की एक गुप्त बैठक हुई थी.

इसे आयोजित करने का श्रेय भी सज्जन जिंदल को ही गया था. पत्रकार बरखा दत्त ने अपनी किताब 'दिस अनक्वाइट लैंड : स्टोरीज़ फ्रॉम इंडियाज़ फॉल्ट लाइन' में इस बैठक के सूत्रधार के रूप में सज्जन जिंदल का विस्तार से वर्णन किया है.

यानी कह सकते हैं कि सज्जन जिंदल का दोनों नेताओं से नजदीकी संबंध है. इस मुलाकात के पूर्वनियोजित होने की ताकीद और भी कुछ चीजों से होती है. मसलन पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचार चैनल जियो टीवी के एक खुलासे के मुताबिक मोदी ने अचानक से ही लाहौर में रुकने का फैसला नहीं किया था. क्योंकि लाहौर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बृहस्पतिवार यानी चौबीस घंटे पहले ही वीवीआईपी मुवमेंट का अलर्ट जारी कर दिया गया था.

लेकिन भारत और पाकिस्तान में इसकी जानकारी कुछ बेहद गिने-चुने लोगों को ही थी. इस राजदारी के पीछे कूटनीतिक सलीकों और दोनों देशों के संवेदनशील रिश्तों को वजह बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक दोनों ही देशों में बातचीत को पटरी से उतारने वाले कट्टरपंथी तत्वों की बहुतायत है.

किसी तरह की पूर्व घोषणा होने की स्थिति में भारत और पाकिस्तान में इस तरह के तत्वों के सक्रिय होने का डर था. ये तत्व कोई सार्थक पहल शुरू होने से पहले ही बातचीत को पटरी से उतार सकते थे.

इस खतरे को रेखांकित करते हुए पूर्व कैबिनेट सचिव नरेश चंद्रा मीडिया को बताते हैं, 'मीडिया में खबर उड़ने की हालत में आतंकी समूह भी सक्रिय हो सकते थे जो मुलाकात को खराब करने के लिए किसी आंतकी कार्रवाई को अंजाम दे सकते थे. इसके अलावा दोनों देशों की सड़कों पर राजनीतिक समूह धरना-प्रदर्शन आदि भी कर सकते थे.'

इस बैठक की सुगबुगाहट कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सरकार की तरफ से जारी एक एडवाइज़री में भी मिलती है. एक हफ्ते पहले ही नवाज शरीफ ने अपने मंत्रिमंडल और सरकार के सभी सहयोगियों को एक सर्कुलर जारी कर किसी भी तरह की भारत-विरोधी बयानबाजी से दूर रहने की सलाह दी थी.

क्या इसके पीछे इस मुलाकात के लिए सकारात्मक माहौल बनाने की सोच काम कर रही थी. इस बारे में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि कूटनीति की बारीकियों में ये सभी चीजें बहुत मायने रखती हैं.

लाहौर एयरपोर्ट पर मोदी का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ उनके भाई और पाकिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ भी मौजूद थे. पाकिस्तान के वित्तमंत्री और पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त टीसीए राघवन मौजूद थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के दौरानां नवाज की मां के पैर भी छूए

यहां से दोनो प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर के जरिए नवाज शरीफ के आवास रायविंड पहुंचे. प्रधानमत्री ने वहां नवाज की मां के पैर भी छूए. बदले में उनकी मां ने मोदी को आशीर्वाद दिया. सूत्रों के मुताबिक मां ने मोदी को हमेशा के लिए दोनों देशों के टकराव को खत्म करने का आशीर्वाद दिया.

हालांकि भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा नहीं दिया. हाल के एक दो महीनों में हमने दोनों देशों की कूटनीति में कई नाटकीय घटनाक्रम देखे. पहले हुर्रियत को लेकर दोनों देशों ने एनएसए स्तर की बातचीत रद्द कर दिया था. फिर अचानक से ही एक फोटो बैंकॉक से लीक हुई जिसमें दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकार आपस में हाथ मिलाते नजर आए.

30 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में आयोजित विश्व जलवायु सम्मेलन में नवाज शरीफ के साथ अलग से बातचीत करते दिखे. 167 सेकेंड की इस बातचीत का वीडियो बेहद चर्चित हुआ. कहा जा रहा है कि बातचीत का सारा सिलसिला इसी मुलाकात से चल पड़ा.

इस मुलाकात की रोशनी में ही अचानक से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को इस्लामाबाद में आयोजित हार्ट ऑफ एशिया सम्मिट में हिस्सा लेने के लिए भेजा गया. जहां उन्होंने एक बार फिर से विदेश सचिव स्तर की बातचीत फिर से शुरू करने की घोषणा की. जनवरी में दोनों देशों के विदेश सचिव दिल्ली में मिलेंगे.

दोनों देशों के संबंधों में 'अचानकों' की आई इस बाढ़ ने एक बार को तो लोगों को चकित कर दिया लेकिन धीरे-धीरे यह साफ हो रहा है कि सबकुछ इतना भी अचानक नहीं हो रहा.

चाचड़ इसे एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार की ताकत के तौर पर दखते हैं, 'मनमोहन सिंह का पैतृक गांव पाकिस्तान में है लेकिन वे कभी यह साहस नहीं जुटा सके क्योंकि वे इलेक्टेड नहीं अप्वाइंटेड थे. नवाज शरीफ कभी काठमांडू के रास्ते में दिल्ली उतरने की नहीं सोच सकते क्योंकि उनके ऊपर पाकिस्तान की फौज है. यह काम लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार का मुखिया ही कर सकता है.'

First published: 29 December 2015, 12:13 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

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