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मोहल्ला क्लीनिकः गली-मोहल्लों में फैल रही एक शांत क्रांति

श्रिया मोहन | Updated on: 8 April 2016, 22:55 IST

पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर में पुरानी अनारकली रोड पर डॉ. सुरूपा रंजन ने अभी-अभी एक 12 साल के बच्चे का चेकअप किया है. उसे शरीर का दर्द और जोड़ों का दर्द है. स्वाभाविक रूप से उसके माता-पिता चिंता में हैं और बताते हैं कि अब उस पर लोकप्रिय पेनकिलर कॉम्बीफ्लेम का कोई असर नहीं हो रहा है. 

जब लड़के को वजन तोलने वाली मशीन पर खड़ा होने को कहा जाता है तो उसका कांटा 73 किलो तक जा पहुंचता है. उस लड़के लिए डॉ. रंजन का नुस्खा साधारण सा है, 'पेनकिलर बंद करो और प्रतिदिन का कोई खेल खेलना शुरू करो.'

नई दिल्ली अपनी भीड़भाड़ वाली तंग गलियों में चुपचाप स्वास्थ्य से जुड़ी एक छोटी-मोटी क्रांति चल रही है. हालांकि अभी यह शुरुआती रूप में है. डॉ. रंजन उन कुछ प्राइवेट डॉक्टरों में से एक हैं जिनको आम आदमी पार्टी ने अपने नए खुले 21 मोहल्ला क्लिनिकों में नियुक्त किया है.

इनका उद्घाटन 27 मार्च को हुआ था. मकसद है, दिल्ली की बीमारियों से पहले ही स्तर पर निपटना. इसके लिए 1000 मोहल्ला क्लिनिकों की शुरुआत हुई है. पिछले साल जून में जब पीरागढ़ी में पहला मोहल्ला क्लिनिक खोला गया था तब मकसद था मरीजों के बोझ से दबे शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों का बोझ कम करना. 

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निश्चित रूप से अब तक का अनुभव बताता है कि 90 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा तो मुहल्ला क्लिनिक स्तर पर ही हो जाता है.

मोहल्ला क्लिनिक स्थापित करने की प्रक्रिया में गति लाने के लिए दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय ने आवासीय भवनों को किराए पर लेकर तत्काल प्रभाव से उनको मोहल्ला क्लिनिक में बदलने का निर्णय लिया है.

ऐसे क्लिनिकों में विजिट के लिए कुछ महीने पहले जब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया तो जिनको चुना गया, डॉ. रंजन भी उन्हीं में से एक हैं. डॉ. रंजन पेशे से प्रसूति विशेषज्ञ हैं, जो सैदाबाद में अपना एक प्राइवेट क्लिनिक चलाती हैं. 

रंजन जैसे डॉक्टर किसी भी प्राइवेट अस्पताल की ओपीडी में सामान्यतः एक मरीज से 300 से 500 रुपए के बीच फीस लेते हैं, लेकिन मोहल्ला क्लिनिक में उनको सामान्य फीस 30 रुपए प्रति मरीज दी जा रही है.

रंजन कहती हैं, “अपने मेडिकल कॉलेज के समय से ही मैं अपनी प्रतिभा का उपयोग जनता की भलाई के लिए करना चाहती थी. मैं सिर्फ दवाएं लेने की सलाह देने की बजाय मरीजों को परामर्श देने में सक्षम होना चाहती थी.” वे मुस्कुराते हुए कहती हैं, “मैं भरोसा दिलाना चाहूंगी कि मोहल्ला क्लिनिक जागरूकता फैला रहे हैं और बीमारियों की रोकथाम में सहयोगी बनेंगे. लंबे समय में ये स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनेंगे.”

अस्थायी क्लिनिकों में बदल गए किराए के घर

पश्चिमी विनोद नगर में एक मकान का ग्राउंड फ्लोर कुरकुरे चिप्स के लिए पैकेजिंग सेंटर और गोदाम के तौर पर उपयोग होता था. अब यह बेढब तरीके से डिजाइन किया गया मोहल्ला क्लिनिक है. इसमें एक लंबा अंधेरा गलियारा है जो हमें डॉ. रंजना सक्सेना तक पहुंचाता है. डॉ. रंजना एक प्राइवेट डॉक्टर हैं जो अब मोहल्ला क्लिनिक में बैठती हैं और रोज 60 मरीज देख रही हैं.

चिकित्सीय बुनियादी सुविधाएं जल्द ही पहुंच जाएंगी. तब तक रक्त के नमूने हमारे घर में फ्रीज में रखे जाते हैं

विनोद नगर और कृष्णा नगर के अन्य मोहल्ला क्लिनिकों की तरह इस क्लिनिक को भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है जैसे टेस्ट की सुविधा, कोल्ड स्टोरेज और दवा वितरक मशीन आदि. जिस मकान में प्रताप चौक मोहल्ला क्लीनिक चल रहा है, उसके मालिक वीरेंद्र सिंह बताते हैं, “चिकित्सीय बुनियादी सुविधाएं जल्द ही पहुंच जाएंगी. तब तक रक्त के नमूने हमारे घर में फ्रीज में रखे जाते हैं.” वीरेंद्र को इसका किराया 15000 रुपए महीना मिल रहा है.

प्रताप चौक पर रहने वाली दो बच्चों की मां कविता कहती हैं, “पहले यदि मेरा बच्चा बीमार पड़ जाता था तो मैं किसी नीम-हकीम या प्राइवेट डॉक्टर के पास जाती थी और टेस्ट एवं दवाओं के नाम पर 3000 रुपए तक खर्च करने पड़ जाते थे. अब मुझे सबसे अच्छी चिकित्सा सुविधा पाने के लिए अपने घर से कुछ ही मिनट की दूरी तय करनी पड़ती है.”

थ्योरी और प्रैक्टिकल के बीच का अंतर

पूर्वी दिल्ली में दल्लूपुरा के प्रताप चौक पर चल रहे मोहल्ला क्लिनिक पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार नए सैमसंग टैब को टटोल रहे हैं. 

दो सप्ताह पहले जब इस क्लिनिक का उद्घाटन हुआ और उन्होंने ड्यूटी शुरू की, तब उन्हें सैमसंग का एक टैब दिया गया था और कहा गया था कि क्लिनिक में आने वाले हर मरीज का फोटो इससे लेना है और उसकी पूरी जानकारी एक सॉफ्टवेयर में भरनी है.

रोगियों से खचाखच भरे कमरे के बीच वे कहते हैं, “योजना तो बहुत अच्छी है. लेकिन व्यावहारिक तौर पर इसका मतलब है कि हर मरीज के साथ मुझे दोगुना समय बिताना पड़ेगा.” नाराज दिख रहे कुमार कहते हैं, “यह सब करने के लिए एक अलग सहायक होना चाहिए.”

हालांकि सरकारी समय दोपहर बाद एक बजे तक का है, लेकिन वे रोज ही तीन बजे तक मोहल्ला क्लिनिक में बैठते हैं और रोज 80 रोगियों को परामर्श देते हैं. 

जनता के स्वास्थ्य संबंधी मसलों के लिए मोहल्ला क्लिनिक बहुत शानदार चीज हैं

वे कहते हैं, “हमें ओवरटाइम का भुगतान नहीं होता, फिर भी मेरा दिल ऐसा नहीं है लंबे समय से इंतजार कर रहे मरीजों से कैसे मुंह मोड़ लू.”

मरीजों को दिए जा रहे परामर्श को और प्रभावी बनाने के लिए अधिक स्टाफ का इंतजार करने के मामले में राजन भी कुमार के ही साथी हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन जल्द ही 79 और मोहल्ला क्लिनिक लॉन्च करेंगे. इनमें से अधिकांश तीसरे मॉडल वाले होंगे. 

शहर में प्राइवेट क्लिनिकों को दिन में कुछ घंटे के लिए मोहल्ला क्लिनिकों में बदल दिया जाएगा. अंदर के आदमी ने बताया कि “लेकिन यह सब तब तक के लिए अस्थाई इंतजाम है जब तक कि मोहल्ला क्लिनिक बनकर तैयार नहीं हो जाते. लंबे समय में सभी 1000 मोहल्ला क्लिनिक आम आदमी पार्टी की ही पूर्व निर्मित संरचनाएं होंगी जो लंबी दौड़ में भी टिकी रहेंगी.”

हालांकि जनता के स्वास्थ्य संबंधी मसलों के लिए मोहल्ला क्लिनिक बहुत शानदार चीज हैं, लेकिन गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इनमें जरूरत के अनुरूप स्टाफ और चिकित्सीय बुनियादी सुविधाएं देने की जरूरत है. ऐसा हो जाए तो यह दिल्ली की बीमार जनता के लिए आम आदमी पार्टी का मास्टर स्ट्रोक साबित होगा.

First published: 8 April 2016, 22:55 IST
 
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