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जानिए 11 साल बाद जेल से निकले बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन की हिस्ट्रीशीट

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 September 2016, 17:22 IST
(फाइल फोटो)

बिहार के बाहुबली और आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन 11 साल बाद आज भागलपुर सेंट्रल जेल से रिहा होकर बाहर निकले हैं.

पटना हाई कोर्ट ने शहाबुद्दीन को राजीव रोशन हत्या मामले में ज़मानत दी है. जमानत पर बाहर आने के बाद उसने कहा, "सबको पता है कि मुझे फंसाया गया था. अदालत ने मुझे क़ैद की सजा दी थी और अदालत ने ही मुझे रिहा किया है."

शहाबुद्दीन को 2004 के चर्चित तेज़ाब कांड मामले में सीवान के व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश राज और सतीश राज के अपहरण और हत्या के मामले में सजा हुई थी.

वहीं मई में दैनिक अख़बार हिंदुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के बाद बिहार प्रशासन ने शहाबुद्दीन को सीवान जेल से भागलपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया था.

शहाबुद्दीन के रिहाई के बाद बिहार के हर खास-ओ-आम के जुबान पर बस एक ही चर्चा है कि क्या बिहार में एक बार फिर जंगलराज आ गया है. सुशासन का दम भरने वाले बिहार के नीतीश कुमार को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री करार दिया है. जेल से छूटने के बाद शहाबुद्दीन के नेता आज भी लालू यादव ही हैं.

आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के साथ बाहुबली शहाबुद्दीन

सीवान से सियासत का आगाज

बिहार के सीवान जिले के प्रतापपुर गांव का रहने वाले यह कुख्यात अपराधी का केवल नाम ही पूरे सीवान के लिए दहशत से कम नहीं हैं. कहा तो ऐसा भी जाता है सीवान जिले में इसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता है. शहाबुद्दीन  दो बार एमएलए और चार बार सीवान का सांसद रह चुका है.

शहाबुद्दीन का जन्म 10 मई 1967 को सीवान जिले के हुसैनगंज प्रखंड के प्रतापपुर गांव में हुआ था.

साल 1980 में डीएवी कॉलेज से राजनीति में कदम रखने वाले शहाबुद्दीन ने माकपा और भाकपा पार्टियों को सीधे तौर पर टक्कर दी. एक समय था, जब सीवान में दो ही राजनीतिक धुरियां थीं, शहाबुद्दीन और दूसरा भाकपा माले.

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष की हत्या

इसी राजनीतिक दबदबे में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर व वरिष्ठ नेता श्यामनारायण की हत्या से सिवान की जमीन लाल हो गई. इनकी हत्या सीवान शहर में 31 मार्च 1997 को कर दी गई थी.

गुंडई और आपराधिक छवि के बल पर शहाबुद्दीन पहली बार जीरादेई विधानसभा सीट से साल 1990 में निर्दलीय एमएलए बना. तब उसके उपर दर्जन भर मुकदमे दर्ज हो चुके थे, जिनमें तीन हत्या के मामले भी शामिल थे.

साल 1995 में वह दोबारा चुनाव जीत कर एमएलए बना. इसी दौरान शहाबुद्दीन तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का करीबी बन गया.

1996 में एसपी पर गोली चलाई

शहाबुद्दीन इतना दुस्साहसी है कि आरोपों के मुुताबिक उसने साल 1996 के लोकसभा चुनाव में चुनावी बूथ पर गड़बड़ी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार करने निकले तत्कालीन एसपी एसके सिंघल पर गोली चला दी थी.

इस मामले में आरोप था कि खुद शहाबुद्दीन ने गोलियां दागी और एसपी सिंघल को जान बचाकर भागना पड़ा. इस मामले में भी शहाबुद्दीन को दस साल की सजा हो चुकी है.

शहाबुद्दीन पर पहली बार शिकंजा कसा जब बिहार के डीजीपी डीपी ओझा थे. उन्होंने पहली बार शहाबुद्दीन के खिलाफ मुन्ना चौधरी अपहरण मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. इसकी वजह से शहाबुद्दीन को पहली बार 13 अगस्त 2003 को सीवान सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा.

पुलिस के शिकंजे में पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन

2001 में पुलिस अफसर को थप्पड़ मारा

शहाबुद्दीन कितना दुर्दांत है इसका अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 मार्च 2001 में जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची, तो उसने अधिकारी संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था और उनके साथियों ने सभी पुलिस वालों को भी जमकर मारा. इसके बाद बिहार पुलिस ने 16 मार्च 2001 शहाबुद्दीन को पकड़ने के लिए उसके प्रतापपुर के पैतृक घर पर छापा मारा.

इस छापेमारी में शहाबुद्दीन के समर्थक और पुलिस के बीच करीब तीन घंटे तक जमकर गोलीबारी हुई. इस घटना में आठ ग्रामीण मारे गए थे. इसके बाद पुलिस को खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ा था.

सीके अनिल और रत्न संजय से सामना

प्रतापपुर कांड के बाद लालू यादव खुद शहाबुद्दीन के गांव पहुंचे और सीवान के तत्कालीन एसपी बच्चू सिंह मीणा और डीएम रसीद अहमद खां का तबादला कर दिया. इस घटना के बाद शहाबुद्दीन की गिनती बतौर बाहुबली होने लगी.

हालांकि इस संगीन वारदात के बाद भी शहाबुद्दीन के खिलाफ कोई मजबूत केस नहीं बनाया गया था.

उसके बाद साल 2005 में सीवान के तत्कालीन डीएम सीके अनिल और एसपी रत्न संजय ने अप्रैल में शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे पहली बार गिरफ्तार करके सीवान जेल में ठूंस दिया.

First published: 10 September 2016, 17:22 IST
 
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