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25 हजार लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार कर चुका है ये मुस्लिम शख्स, मोदी सरकार ने दिया पद्मश्री सम्मान

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 January 2020, 17:11 IST

Mohammed Sharif Chacha conferred with Padma Shree : गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर मोदी सरकार (Modi Government) ने देशभर के 118 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया. इन्हीं में से एक नाम है मोहम्मद शरीफ (Mohammad Sharif)  का. जिन्हें लोग प्यार से शरीफ चाचा (Sharif Chacha) भी कहते हैं. मोहम्मद शरीफ के नाम के साथ अब पद्मश्री (Padma Shree) लग गया है और अब वह पद्मश्री मोहम्मद शरीफ हो गए हैं. उन्हें जिस काम के लिए मोदी सरकार ने ये सम्मान (Honour) दिया है वो अपना आप में बहुत बड़ा है, क्योंकि पद्मश्री मोहम्मद शरीफ ने वो काम किया है उसे हर कोई नहीं कर सकता.

दरअसल, अयोध्या के रहने वाले मोहम्मद शरीफ पिछले 25 सालों से ऐसे शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं जिन्हें किसी ने नहीं पहचाना. यानी वो इतने सालों से लावारिश लाशों के मसीहा बन गए और उनका अंतिम संस्कार करते रहे. 25 साल में मोहम्मद शरीफ ने करीब 25,000 लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं. पद्मश्री शरीफ चाचा पेशे से तो साइकिल मैकेनिक हैं. मगर इनके जीवन का ध्येय लावारिस शवों का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना ही है. रविवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा ने उन्हें तिरंगा उढ़ाकर सम्मानित किया. 

मोहम्मद शरीफ अयोध्या के खिड़की अलीबेग मोहल्ले में रहते हैं और लावारिस लाशों के वारिस हैं. ऐसी लाशें जिनका कोई वारिस नहीं होता उन्हें शरीफ चाचा आसरा देते हैं. वे मृतक के धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार करते हैं. शरीफ चाचा के ऐसा करने के पीछे बड़ी ही मार्मिक कहानी भी है, जो व्यवस्था की संवेदनहीनता से उपजी है.

दरअसल, शरीफ चाचा के बेटे मोहम्मद रईस एक बार किसी काम से सुल्तानपुर गये थे. जहां उनकी किसी ने हत्या कर दी. और लाश कहीं फेंक दी. लावारिस लाश होने के कारण उसका कुछ पता ही नहीं चला और शरीफ चचा ढंग से बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए. इस घटना के बाद शरीफ चाचा ने तय किया कि वे लावारिस लाशों को उसका मानवीय हक जरूर देंगे.

शरीफ चाचा कहते हैं कि ‘हर मनुष्य का खून एक जैसा होता है, मैं मनुष्यों के बीच खून के इस रिश्ते में आस्था रखता हूं. इसी वजह से मैं जब तक जिंदा हूं किसी भी मानव शरीर को कुत्तों के लिए या अस्पताल में सड़ने नहीं दूंगा’. उस घटना के बाद से जैसे ही कोई लावारिस शव मिलने की खबर मिलती है, शरीफ चाचा पोस्टमार्टम हाउस पहुंच जाते हैं और पोस्टमार्टम होने तक यदि उसका कोई वारिस नहीं आता तो वह मृतक के धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार करते हैं.

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First published: 26 January 2020, 17:11 IST
 
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