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मोहन भागवत: वाजपेयी के शासनकाल में कश्मीर मुद्दा सुलझने के कगार पर था

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 August 2016, 10:20 IST
(फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते कश्मीर मुद्दा सुलझने के करीब था, लेकिन बाद की सरकारों का इस मामले में रवैया ठीक नहीं रहा.

भागवत ने आगरा में कहा कि वाजपेयी के बाद की सरकारों ने वाजपेयी के प्रयासों को आगे नहीं बढ़ाया. भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक हल ही संभव है. 

भागवत ने रविवार को आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, "कश्मीरी लोग पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते. हमें कश्मीर में लोगों के बीच राष्ट्रीयता की भावना विकसित करनी चाहिए."

सरसंघचालक ने कहा, "वाजपेयी कश्मीर मुद्दे का समाधान करने के करीब पहुंच गए थे, लेकिन बाद की सरकारों ने उनके प्रयासों को आगे नहीं बढ़ाया." आगरा में 2000 युवा दंपतियों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कश्मीर के अलावा गोरक्षा और समान नागरिक संहिता जैसे कई मुद्दों पर जवाब दिए.

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'कानूनी दायरे में हो गोरक्षा'

गोरक्षा के नाम पर हिंसा पर भागवत ने कहा कि गोरक्षा का काम कानूनी दायरे में होना चाहिए. उन्होंने युवाओं को संस्कार दिए जाने की पैरवी करते हुए कहा, "पश्चिमी प्रभाव समाज को प्रभावित कर रहे हैं. हमें अपने पूर्वजों द्वारा दिए गए संस्कारों और मूल्यों का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ना होगा. अगर राष्ट्र को विश्वास के साथ आगे बढ़ना है, तो हमें अपने युवाओं को संस्कार सिखाने होंगे."

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भागवत ने शिवाजी का जिक्र करते हुए कहा कि मराठा योद्धा ने मूल्यों के लिए खड़े रहते हुए अपने परिवार से शक्ति और प्रेरणा ली थी. उन्होंने कहा कि समय के साथ सभ्यताएं बदलती हैं, संस्कृतियां नहीं. बच्चों में मूल्यों को रोपित करना परिवार का दायित्व होता है, जिसे औरों के साथ जीना सीखना चाहिए.

First published: 23 August 2016, 10:20 IST
 
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