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डाॅ. डेथ संतोष पाॅल ने कबूला 15 हत्याओं का जुर्म

अश्विन अघोर | Updated on: 21 August 2016, 7:16 IST

महाराष्ट्र के सतारा जिले के डाॅ डेथ के नाम से बदनाम डाॅ संतोष पाॅल का भयावह और अजीबोगरीब मामला हर बीतते दिन के साथ और भी पेचीदा होता जा रहा है.

जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है इस मामले में वास्तव में ही गड़े मुर्दे कब्रों से बाहर निकल रहे हैं.

पाॅल ने पहले छह हत्याएं करने की बात कबूली थी जिनमें से पुलिस पांच शवों को बरामद कर चुकी है. एक को अभी भी बरामद किया जाना बाकी है क्योंकि उसने उसे एक बांध में बहा दिया था.

किसी बाॅलीवुड फिल्म के लिये एक आदर्श पटकथा बनने की काबिलियत रखने वाला यह मामला महाराष्ट्र पुलिस के इतिहास में हमेशा जिंदा रहेगा और पूरी संभावना है कि इसके बाद जांच के बुनियादी तौर-तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन आए.

चूंकि पाॅल के सभी शिकार लापता हो गए थे जिसके चलते उनके परिजनों ने सतारा जिले के वई थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी इसलिये गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी किसी भी सूचना या शिकायत की तत्परता और पूरी गंभीरता के साथ जांच करने के सख्त आदेश देने का फैसला किया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, ‘अगर वई पुलिस ने गुमशुदगी की शिकयतों की जांच गंभीरता से की होती तो पाॅल अबसे करीब डेढ़ दशक यानि 15 वर्ष पूर्व ही पुलिस के शिकंजे में होता और बाकी की हत्याओं को होने से रोका जा सकता था. यह किसी भी लापता व्यक्ति की गुमशुदगी जांच में पुलिस की ओर से होने वाली एक प्रमुख चूक है. अब समय आ गया है जब पुलिस को हर शिकायत को गंभीरता से लेना प्रारंभ करना होगा.’

खूनी झोलाछाप

पुलिस सूत्रों के अनुसार एक झोलाछाप डॉक्टर पाॅल ने वास्तव में 2003 के बाद से 15 हत्याएं करने की बात कबूली है.

सतारा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, ‘अब हम उन शवों का पता लगाने और बरामदगी के प्रयासों में लगे हैं जिन्हें पाॅल ने हत्या करने के बाद दफना दिया था.’

जानकारी के अनुसार 2003 के बाद से वई से 15 व्यक्ति लापता हो चुके हैं जिनके पाॅल के शिकार होने की पूरी संभावना है. दिलचस्प बात यह है कि पाॅल ने वई पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक को बधाई भी दी थी.

सतारा के पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल को लिखे एक पत्र में पाॅल ने मामले की शानदार जांच करने और उन्हें गिरफ्तार करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले वई पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विनायक पटेल की प्रशंसा भी की है. पाॅल का कहना है कि उसने समाज को जगाने और भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की पोल खोलने के लिये इन हत्याओं को अंजाम दिया है.

पाॅल के कई चेहरे

इलेक्ट्रोपैथी में डिप्लोमाधारी पाॅल ने वई के एक निजी अस्पताल में करीब दो दशकों तक प्रैक्टिस की है. इसके अलावा वह भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता के रूप में भी काम करता रहा है. वई के निवासी भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों के खिलाफ उनके रवैये को लेकर उनकी काफी इज्जत भी करते थे.

और बीते सप्ताह एक आंगनवाड़ी शिक्षक मंगल झेड़े की हत्या के आरोप में गिरफ्तार होने से पहले तक उनकी छवि एक सम्मानित सामाजिक और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता की थी.

पाटिल के अनुसार यह साबित होने के बाद कि इसी वर्ष 15 जून को लापता होने से पहले झेड़े पाॅल के संपर्क में थी. पाॅल ने पहले-पहल तो पुलिस को गुमराह करने की पूरी कोशिश की. उसने झेड़े के खिलाफ दोगुना करने का आश्वासन देकर 230 ग्राम सोना हड़पने की शिकायत दर्ज करवाई.

अपराध करने का तरीका

11 अगस्त को गिरफ्तार किये जाने के बाद पाॅल ने झेड़े और पांच अन्य की हत्या करने की बात कबूली. इन सभी हत्याओं को अंजाम देने में ज्योति मंधरे नाम की एक नर्स ने उसकी मदद की जो उसके साथ अस्पताल में काम करती थी.

पाटिल ने बताया, ‘डाॅ. पाल अपने शिकार की हत्या करने के लिये निश्चेतक (एनेस्थेटिक) की ओवरडेज देता था. इसके बाद दोनों मिलकर पाॅल के फार्म में शव को दबा देते थे. इन दोनों ने मिलकर 15 जून को वई के एक बस अड्डे से झेड़े का अपहरण किया और उसे धोमें गांव के पास बने पाॅल के मुर्गी फार्म पर ले गए. एक बार फार्म हाउस पर ले जाने के बाद इन्होंने उसे घातक दवा की ओरडोज दी और उसकी हत्या कर दी. इसके बाद उन्होंने मुर्गी फार्म के पास ही उसके शव को दफना दिया.’

उन्होंने आगे बताया कि जब पाॅल को अहसास हुआ कि पुलिस को उसपर शक हो रहा है तो उसने स्वयं ही वई पुलिस से संपर्क किया और झेड़े के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई.

पुलिस से कहां चूक हुई

पाटिल ने बताया कि हर बार किसी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने पाॅल से पूछताछ की क्योंकि लापता हुआ प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में पाॅल के संपर्क में था.

पाटिल कहते हैं, ‘हालांकि उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया. हर बार जब भी उसे खुद पर फंदा कसता हुआ लगता वह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक धरना-प्रदर्शन का आयोजन कर पुलिस पर दबाव बना लेता. पाॅल और मंधारे के काॅल रिकाॅर्ड से उनके झेड़े के संपर्क में होने की बात स्पष्ट होने के बाद पाॅल को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ के दौरान वह न केवल पुलिस को उस जगह पर ले गया जहां उसने झेड़े को दफनाया था बल्कि बीते 15 सालों में किये गए पांच अन्य कत्लों की जानकारी भी दी.’

मिली जानकारी के अनुसार पाॅल ने 20 मई 2003 को सुरेखा चिकने की हत्या की. इसके बाद अगस्त 2006 में वनिता गायकवाड़, 13 अगस्त 2010 को जगाबाई पाॅल, 7 दिसंबर 2015 को नाथामल भंडारी और 17 जनवरी 2016 को सलमा शेख की जान ली.

छठे शिकार मंगल झेड़े की हत्या इसी वर्ष 16 जून को की गई. पाॅल जांचकर्ताओं को खुद ही उस स्थान पर लेकर गया जहां उसने पांच लाशों को दफनाया था जबकि पाॅल का कहना है कि उसने वनिता गायकवाड़ की लाश को धोमे बांध में बहा दिया था.

पाॅल को शुक्रवार को वई न्यायालय में पेश किया जाएगा.

First published: 21 August 2016, 7:16 IST
 
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