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भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की होगी पढ़ाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 August 2016, 16:12 IST

रूस, इसराइल, चीन, जापान, कोरिया, जर्मनी और दुनिया के अन्य देशों की तरह इंजीनियरिंग और मेडिकल की अपनी भाषा में शिक्षा के महत्व को देखते हुए मध्य प्रदेश के अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय ने चालू सत्र से हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम शुरू किया है.

विश्वविद्यालय ने मैकेनिकल, सिविल, और इलेक्ट्रिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए हैं. इनके लिए 30-30 सीटें रखी गई हैं.

कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने चालू शिक्षा सत्र से हिन्दी में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पूरी तैयारी के साथ शुरू कर दिया है और मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल शाखाओं में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिये प्रवेश प्रक्रिया जारी है.

इंजीनियरिंग कोर्सेस में एडमिशन के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर 20 अगस्त को मेरिट सूची जारी कर दी गई. कुलपति का कहना है, "मेरिट में शामिल छात्रों को एडमिशन के लिए 24 अगस्त को विश्वविद्यालय में फीस जमा करनी होगी. प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम हिन्दी माध्यम में कक्षाएं शुरू कर देंगे."

इसी सत्र से हिंदी माध्यम में पढ़ाई

कुलपति ने कहा कि 31 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जिसके बाद हम चालू सत्र में हिन्दी माध्यम से पढ़ाई शुरू कर देंगे फिर चाहे इसमें केवल एक ही विद्यार्थी क्यों न हो.

कुलपति ने बताया कि हिंदी माध्यम में पढ़ाए जाने वाले इंजीनियरिंग कोर्सेस का सिलेबस मैनिट के प्रोफेसरों से तैयार करा लिया गया है. एडमिशन के बाद संबंधित ब्रांच में पढ़ाने के लिए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की जाएगी.

विश्वविद्यालय ने बीई के लिए सालाना शिक्षण शुल्क 22,300 और अन्य शुल्क 3,900 रुपये रखा है. इसके अलावा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का सालाना शिक्षण शुल्क 20 हजार और अन्य शुल्क 3,900 रुपए है. यह फीस निजी विश्वविद्यालय से आधी है. 

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि लगभग 250 साल से इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा पर अंग्रेजी माध्यम का कब्जा रहा है और इसमें अब हिन्दी माध्यम का विकल्प उपलब्ध कराने का यह प्रयास किया जा रहा है. विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जायेगी.

उन्होंने कहा कि कुछ मुल्कों को छोड़ दिया जाये तो रूस, इसराइल, चीन, जापान, कोरिया, और जर्मनी सहित दुनिया के अन्य देशों में इन पाठ्यक्रमों की शिक्षा इन देशों की अपनी भाषा में दी जाती है और ये सभी देश तरक्की कर रहे हैं.

First published: 20 August 2016, 16:12 IST
 
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