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मध्य प्रदेश भाजपा में कलह, शिवराज सरकार पर कैलाश विजयवर्गीय का खुला हमला

शैलेंद्र तिवारी | Updated on: 15 September 2016, 8:08 IST

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय लगातार मध्यप्रदेश की अफसरशाही को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. उसे बेलगाम घोड़ा तक बोल रहे हैं. इतना ही नहीं, वह खुलेआम संघ के कार्यक्रम में बोल चुके हैं कि मध्यप्रदेश में अफसरों ने भ्रष्टाचार को ऊपर से लेकर नीचे तक पहुंचा दिया है.

कुल मिलाकर कैलाश निशाना ब्यूरोक्रेसी पर साध रहे हैं, लेकिन यह हमले सीधे तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हो रहे हैं. दरअसल, शिवराज सिंह और कैलाश विजयवर्गीय की खुली अदावत अब सामने आती जा रही है. यह बात और है कि सार्वजनिक मंचों पर अभी भी कैलाश मुख्यमंत्री की तारीफ करना नहीं भूलते हैं, लेकिन पीठ पीछे कोई भी निशाना लगाना नहीं छोड़ते हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पिछले दिनों हुई दो दिनी बैठक से शुरू हुए हमले फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. कुल मिलाकर यहां एक अलग ही सियासत शुरू हो गई है. कैलाश ने सबसे पहले संघ के कार्यक्रम में ही मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए अफसरों पर हमला बोला. भ्रष्टाचारी कहा और कहा कि इन अफसरों ने पंचायत तक भ्रष्टाचार को पहुंचा दिया है.

कैलाश मुख्यमंत्री की तारीफ करना नहीं भूलते हैं, लेकिन पीठ पीछे कोई भी निशाना लगाना नहीं छोड़ते हैं

उसके बाद उन्होंने सवाल मेट्रो के संचालन पर खड़े किए. ट्वीट कर कहा कि प्रदेश में मेट्रो के काम की रफ्तार इतनी धीमी है कि समझ ही नहीं आ रहा है कि प्रदेश में मेट्रो आ रही है या फिर बैलगाड़ी.

इसी तरह कैलाश ने इन्वेस्टर्स समिट पर भी निशाना साधा. हालांकि यहां पर सरकार की बजाय पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कैलाश को उल्टे ही घेरे में ले लिया. हालांकि राजनीतिक जानकार अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि दिग्विजय ने कैलाश पर निशाना साधकर मुख्यमंत्री को राहत देने की कोशिश की या फिर कैलाश पर राजनीतिक हमला किया.

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कैलाश से ही पूछ लिया कि बाकी इन्वेस्टर्स समिट के निवेश की बात को जाने दीजिए, पहले आप यही बता दें कि आपके कार्यकाल के कितने एमओयू जमीन पर आए हैं? उसके बाद कैलाश चुप्पी साध गए. कारण साफ है, कैलाश के उद्योगमंत्री रहते हुए प्रदेश में दो ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट हुई हैं और इनका आंकड़ा बहुत बेहतर नहीं है.

ऐसा नहीं है कि कैलाश के लगातार हमलों को पार्टी समझ नहीं रही है. हफ्ते भर पहले मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने उन्हें उन्ही की भाषा में जवाब देने की कोशिश की. उन्होंने कहा, 'कैलाश यह सब बोलकर सरकार का नहीं बल्कि खुद का नुकसान कर रहे हैं. वह जब से दिल्ली गए हैं, उनकी प्रदेश को लेकर राजनीतिक समझ कम हो गई है.'

कैलाश के उद्योगमंत्री रहते हुए प्रदेश में दो ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट हुई हैं और इनका आंकड़ा बहुत बेहतर नहीं है

इस हमले पर कैलाश ने सोमवार को मुंह खोला और कहा कि नंदकुमार राजधर्म छोड़कर संगठन धर्म निभाएं, वह संगठन में हैं, सत्ता में नहीं. वह यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, 'नंदकुमार को अपनी हैसियत में रहना चाहिए. मेरे मुख्यमंत्री से रिश्ते कैसे हैं, यह सबको अच्छी तरह मालूम है.'

जाहिर है कैलाश का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से शिवराज सिंह चौहान की तरफ भी था. लेकिन स्थिति को समझ कर उन्होंने बात घुमाने की कोशश की और मुख्यमंत्री से अपने रिश्तों के कुछ किस्से भी सुना दिए. इस किस्से में उन्होंने डंपर घोटाले को मैनेज करने का वाकया भी सुना मारा. इसके साथ ही उन्होंने अफसरशाही पर हमला जारी रखा और कहा कि बेलगाम घोड़े की सवारी मुझे अच्छे से आती है.

कुल मिलाकर कैलाश प्रदेश की राजनीति के नेपथ्य में हैं. ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद के प्रदेश की राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखने की है. यही वजह है कि वह किसी न किसी तरह से लोगों के बीच चर्चाओं में बने रहने का प्रयास करते हैं. उन्हें मालूम है कि शिवराज के मित्र के तौर पर तो वह प्रदेश में पहचान नहीं बना सकते हैं. जानकारों के मुताबिक इसी वजह से उन्होंने अब विरोध की राजनीति को ही हवा दी है.

यही वजह है कि मौके-बे-मौके कैलाश प्रदेश में शिवराज विरोधियों के नेता होने का दंभ दिखाते रहते हैं. हालांकि हकीकत इससे थोड़ी अलग है. संघ की बैठक में जब कैलाश ने शिवराज सरकार पर हमला बोला तो सांसद प्रहलाद पटेल, विश्वास सारंग और दूसरे नेताओं ने भी बहती गंगा में हाथ धुल लिए और सरकार के बहाने शिवराज पर निशाना साध लिया.

हालांकि इन सबसे शिवराज इत्तेफाक नहीं रखते हैं. उनका कहना है कि मुझे नहीं मालूम लोग क्या कर रहे हैं. मैं सिर्फ अपने काम पर ध्यान देता हूं और अपना काम कर रहा हूं.

First published: 15 September 2016, 8:08 IST
 
शैलेंद्र तिवारी @catchhindi

लेखक पत्रिका मध्यप्रदेश के स्टेट ब्यूरो चीफ हैं.

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