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माल्या का राज्यसभा से निष्कासन तय, इस्तीफा हुआ नामंजूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2016, 13:11 IST

राज्यसभा से शराब व्यवसायी विजय माल्या का निष्कासन तय हो गया है. इस मामले में राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मंगलवार को उनके इस्तीफे को नामंजूर कर दिया है.

इसके साथ ही संसद की आचार समिति (एथिक्स कमेटी) ने भी माल्या के इस्तीफे को खारिज कर दिया है.

इस मामले में राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी के ओएसडी गुरदीप सिंह सप्पल ने राज्यसभा महासचिव के पत्र का जिक्र करते हुए ट्विटर पर कहा, "हामिद अंसारी, सभापति, राज्यसभा ने विजय माल्या के इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है."

राज्यसभा के निर्दलीय सांसद विजय माल्या पर एसबीआई समेत 17 बैंकों का 9,400 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज बकाया है. 

प्रक्रिया का पालन नहीं


विजय माल्या ने खुद को उच्च सदन से निष्कासित किए जाने से बचने के प्रयास के तहत ब्रिटेन में अपने निवास से अपने इस्तीफे की प्रति यह कहते हुए भेजी थी कि वे नहीं चाहते कि उनके ‘नाम और प्रतिष्ठा पर और कीचड़ उछाला जाए.

ओएसडी गुरदीप सिंह सप्पल ने राज्यसभा महासचिव के पत्र का जिक्र करते हुए ट्विटर पर कहा कि इसके अलावा महासचिव राज्यसभा ने माल्या को लिखा है कि उनका त्यागपत्र प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है और इस पर वास्तविक हस्ताक्षर नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि राज्यसभा प्रक्रियाओं के नियम-213 के अनुरूप त्यागपत्र स्वेच्छापूर्ण और वास्तविक होना चाहिए.

माल्या ने भेजा था इस्तीफा


आचार समिति जब उनके निष्कासन की सिफारिश करने वाली थी, उससे एक दिन पहले माल्या ने कहा, "क्योंकि हालिया घटनाक्रम ये दर्शाते हैं कि मुझे न्याय नहीं मिलेगा, लिहाजा मैं तत्काल प्रभाव से राज्यसभा के सदस्य के रूप में इस्तीफा दे रहा हूं."

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि माल्या के हस्ताक्षर स्कैन किए हुए थे और नियमों के मुताबिक नहीं थे.

इस मामले में सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा की कर्ण सिंह की अध्यक्षता वाली आचार समिति ने मंगलवार को माल्या के इस्तीफे को खारिज करते हुए उनके द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को गलत बताया था.

समिति के सदस्यों ने कर्ज डिफॉल्ट के बारे में माल्या के जवाब पर भी असंतोष जताया. समिति के सदस्यों ने एक स्वर में माना कि राज्यसभा सदस्य के रूप में विजय माल्या का आचरण ‘अनुचित’ है. सूत्रों के मुताबिक समिति बुधवार को राज्यसभा के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

संसद में किसी भी सांसद की सदस्यता खत्म करने के लिए सदन में समिति द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव लाया जाना जरूरी है. राज्यसभा में विजय माल्या का दूसरा कार्यकाल एक जुलाई को खत्म हो रहा है.

समिति के अध्यक्ष कर्ण सिंह ने बैठक के बादर ये कहकर विस्तृत ब्योरा देने से इनकार कर दिया कि समिति का प्रमुख होने के नाते बैठक में हुए फैसले के बारे में घोषणा करना उनके लिए उचित नहीं होगा.

वहीं विजय माल्या ने अपने निष्कासन पर आचार समिति की ओर से फैसला किए जाने से एक दिन पूर्व फैक्स के जरिए लंदन से राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को अपना इस्तीफा भेज दिया था.

माल्या के निष्कासन पर आम सहमति


विजय माल्या के निष्कासन के मुद्दे पर समिति की 25 अप्रैल को हुई बैठक में आम सहमति बन चुकी थी.

समिति के अध्यक्ष कर्ण सिंह से यह पूछने पर कि जब विजय माल्या पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं तो क्या समिति के पास अब कोई गुंजाइश बची है. इसके जवाब में कर्ण सिंह ने कहा कि 'निस्संदेह इस मामले में पूरी गुंजाइश है. इस्तीफा स्वीकार होने तक वे अब भी सदन के सदस्य हैं'.

केंद्र सरकार ने विजय माल्या की भारत वापसी के लिए कार्यवाही शुरू करते हुए उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विजय माल्या बीते दो मार्च को भारत छोड़कर लंदन चले गए थे.

हाल ही में विदेश मंत्रालय ने माल्या के प्रत्यर्पण के लिए भारत में ब्रिटिश उच्चायोग को पत्र लिखा था.

First published: 4 May 2016, 13:11 IST
 
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