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धोनी के बड़े भाई का 'दर्द' शायराना- 'बहार बनकर न आना बहारों ने ही मेरा चमन लूटा है'

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 October 2016, 10:26 IST
(फेसबुक)

महेंद्र सिंह धोनी यानी ऐसा शख्स जो अनहोनी को होनी में तब्दील कर दे. क्रिकेट की दुनिया का चमकता सितारा. भारत को आईसीसी के हर फॉर्मेट में चैंपियन बनाने वाला कप्तान. 28 साल बाद टीम इंडिया को विश्व विजेता बनाने वाला धुरंधर. ऐसी बहुत सी उपमाएं माही को दी जा सकती हैं.

जाहिर है एमएस धोनी के जीवन पर जब बायोपिक बनी, तो उसका बॉक्स ऑफिस पर हिट होना तय था. यही वजह है कि 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' बॉलीवुड में अब तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बायोपिक बन गई.

लेकिन एक कहावत तो आपने सुनी होगी, चिराग तले अंधेरा. कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है जब बात धोनी के बड़े भाई नरेंद्र सिंह धोनी की आती है. धोनी के जीवन पर बनी फिल्म में तरजीह न दिए जाने से नरेंद्र निराशा में डूबे हैं और उनका यह दर्द फेसबुक पर छलक उठा है. अपने कई पोस्ट में उन्होंने दर्द बयां किया है.   

'यारों वक्त ऐसा भी आया'

एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में तरजीह न मिलने पर वे निराशाजनक और शिकायती लहजे में फेसबुक पोस्ट कर रहे हैं. नरेंद्र ने हाल ही में फेसबुक पर सीमेंट और बालू से कुछ ईंटों को जोड़ते हुए फोटो लगाई है.

पढ़ें: बॉक्स ऑफिस भी माही का मुरीद: 'एमएस धोनी' सबसे कामयाब बायोपिक, 11 दिन में कमाए 112 करोड़

धोनी के बड़े भाई ने शायराना अंदाज में अपने दर्द का इजहार करते हुए शायरी लिखी, "वो आये मेरी कब्र पे और कब्र खोद कर चले गए. मेरे जीते जी कहती थी, लगाऊंगी लेप चंदन का, तेरे जख्मों पे, यारों वक्त ऐसा भी आया, कि वो लगा गई नमक और मिर्च मेरे जख्मों पे."

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'नरेंद्रजी कोई बात नहीं'

फेसबुक पर सिलसिलेवार तरीके से नरेंद्र अपना दर्द बयां कर रहे हैं, उनके पोस्ट पर लोगों की ओर से हमदर्दी भी मिल रही है. 

अभय जैन ने उनके पोस्ट पर टिप्पणी की, "मैं माही का फैन हूं पर माही तो बहुत दूर चला गया. उसको अब सब छोटे नजर आते होंगे. नरेंद्रजी कोई बात नहीं. जाने दो माही को."

एक और पोस्ट में नरेंद्र ने लिखा, "कभी बहार बनके मेरे चमन में ना आना, क्योंकि बहारों ने ही मेरा चमन लूटा है, उदास तो हम अब भी रहते हैं, जब से बहारों का साथ छूटा है."

पढ़ें: हर घंटे दो लाख से ज्यादा लोग देख रहे हैं एमएस धोनी की फिल्म का ट्रेलर

धोेनी की बायोपिक में उनकी बड़ी बहन और जीजा का जिक्र तो है, लेकिन नरेंद्र को तरजीह नहीं मिली. ऐसे में बड़े भाई का दर्द रह-रहकर छलक उठता है.

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'जीते-जी हमें पहचान न सके'

दरअसल नरेंद्र सिंह धोनी पहले कारोबार में किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर उन्होंने सियासी पारी खेलते हुए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली.

चुनाव प्रचार के लिए वह बिहार भी गए थे. रांची वनडे में लाइन में खड़े होकर नरेंद्र ने टिकट खरीदा था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी. ऐसे में नरेंद्र के फेसबुक पोस्ट भी उनके दर्द को उजागर कर रहे हैं.

गुरुवार को एक और फेसबुक पोस्ट में नरेंद्र ने लिखा, "गुजारिश हमारी वह मान न सके, मजबूरी हमारी वह जान न सके, कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे, जीते जी जो हमें पहचान न सके."

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First published: 28 October 2016, 10:26 IST
 
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