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BJP इसलिए बदलना चाहती थी मुगलसराय स्टेशन का नाम, आज से हुआ दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 August 2018, 15:19 IST

उत्तर प्रदेश का मुगलसराय स्टेशन अब से दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन के नाम से जाना जाएगा. मुगलसराय स्टेशन पूर्वी भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टेशन है. 156 साल पुराने इस रेलवे स्टेशन को पूर्वी भारत का रेलवे गेट माना जाता था.

आज के बाद पूरी तरह से मुगलसराय स्टेशन ख़त्म हो जाएगा, और अब से इससे जुड़े ऐतिहासिक कहानियों के साथ ही इसका नाम भी इतिहास हो जाएगा. गौरतलब है कि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुगलसराय का नाम बदला जाना प्रस्तावित था. मुगलसराय का नाम अब बीजेपी के वैचारिक प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा जाएगा.


 

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कल्याण सिंह ने भी की थी नाम बदलने की कोशिश
मुगलसराय स्टेशन के नाम को बदलने की कोशिश पहले भी की गई थी. लेकिन उस समय केंद्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस सरकार ने ऐसा होने से मना कर दिया. उस समय उत्तर परदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे. ये घटना 1992 की है.

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इस बार मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने के लिए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने शुरुआत की थी. जिसके बाद उन्होंने ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा और इस बार केंद्र की तरफ से भी मंजूरी मिल गयी. और 156 साल पुराने नाम को बदल दिया गया.

क्या है नाम बदलने के पीछे की मंशा

गौरतलब है कि आरएसएस और संघ से जुड़े अन्य संगठन के दस्तावेजों के अनुसार, वे 1970 से मुगलसराय को दीनदयाल उपाध्याय नगर के रूप में संदर्भित कर रहे हैं और दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ही मुगलसराय स्टेशन का नाम चाहते थे.

गौरतलब है कि साल 1968 में आरएसएस-बीजेपी के विचारक और जनसंघ के अध्यक्ष दीनदयाल उपाध्याय का शव मुगलसराय स्टेशन पर संदिग्ध हालत में पाया गया था.

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First published: 5 August 2018, 15:02 IST
 
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