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Muharram 2020: इस वजह से मुहर्रम में मातम मनाते हैं शिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2020, 18:53 IST

इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने को मुहर्रम कहते हैं. इस महीने से इस्लाम का नया साल शुरु हो जाता है. इस गम का महीना भी कहा जाता है. इस महीने मुस्लिम खुशियां नहीं मनाते हैं. बल्कि मातम मनाया जाता है. पूरे महीने का सबसे अहम दिन होता है 10वां मुहर्रम.

इतिहास के मुताबिक 1400 साल पहले तारीख ए इस्लाम में कर्बला की जंग हुई थी. ये जंग जुल्म के खिलाफ इंसाफ के लिए लड़ी गई थी. इस जंग में पैंगबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को शहीद कर दिया गया था.


मुआविया नाम के शासक के निधन के बाद उसकी विरासत उनके बेटे यजीद को मिली. यजीद इस्लाम को अपने तरीके से चलाना चाहता था. यजीद ने पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को अपने मुताबिक चलते को कहा और खुद को उनके खलीफे के रूप में स्वीकार करने का आदेश दिया.

कुरान और प्रोफेट मोहम्मद में शिया और सुन्नी दोनों ही विश्वास रखते हैं. दोनों ही इस्लाम की अधिकतर बातों पर सहमत रहते हैं. दोनों में फर्क इतिहास, विचारधारा और लीडरशिप से जुड़ा हुआ है. इसकी झगड़े की शुरूआत हुई 632 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद की मौत के बाद. मामला ये था कि पैंगबर की अनुपस्थिति में उनका खलीफा कौन होगा.

जहां एक ओर अधिकत्तर लोग पैंगबर के करीबी अबु बकर की तरफ थे, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने हजरत मोहम्मद के दामाद अली को खलीफ बनाने की पैरवी की. उनका कहना था कि पैंगबर ने अली को मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक और धार्मिक लीडर के तौर पर चुना था. जिन लोगों ने अबु बकर में अपना भरोसा दिखाया, वह सुन्नी कहलाए. यह लोग पैंगबर मोहम्मद की परंपरा और विचारधारा को मानते हैं. वहीं दूसरी ओर, जिन लोगों ने अली में भरोसा किया वह शिया कहलाएं.

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अबु बकर पहले खलीफा बने और चौथे खलीफा बने. हालांकि, अली की लीडरशिप को पैंगबर की पत्नी और अबु बकर की बेटी आयशा ने चुनौती दी. इसके बाद इराक के बसरा में 656 ईस्वी में अली और आयशा के बीच युद्ध हुआ. आयशा उस युद्ध में हार गई और शिया-सुन्नी के बीच की खाई और भी गहरी हो गई. इसके बाद दमिश्क के मुस्लिम गवर्नर मुआविया ने भी अली के खिलाफ जंग छेड़ दी, जिसने दोनों के बीच दूरियां और भी अधिक बढ़ा दीं.

आने वाले कुछ सालों ने मुआविया खलीफा बन गए और उन्होंने उम्याद वंश की स्थापना की. इसके बाद अली और पैंगबर मोहम्मद की बेटी फातिमा के बेटे यानी पैगंबर के नवासे हुसैन ने इसाक के कुफा में मुआविा के बेटे यजीद के खिलाफ जंग छेड़ दी.शिया मुस्लिम इसे कर्बला की जंग कहते हैं, जो धार्मिक रूप से बहुत बड़ी अहमियत रखता है. इस जंग में हुसैन की हत्या कर दी गई और उनकी सेना हार गई. शिया समुदाय के लिए हुसैन एक शहीद बन गए.

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First published: 21 August 2020, 18:53 IST
 
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