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मुख्तार अब्बास नकवी: भारत में मुसलमानों को दोयम दर्जे के नागरिक होने का अहसास होता है

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2016, 12:41 IST
(पीटीआई)

केंद्र की मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कहा, 'देश के अल्पसंख्यक कभी-कभी खुद को दोयम दर्जे का नागरिक महसूस करते.'

इस बयान के बाद जब केंद्रीय मंत्री नकवी को  अहसास हुआ कि उनका यह बयान उन्हीं की सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है तो उन्होंने तुरंत ही सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय देश में वोट-बैंक की राजनीति से था.

केंद्रीय मंत्री नकवी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सालाना व्याख्यान में बोलते हुए कहा, 'अल्पसंख्यक अधिकारों के मामले में भारत एक आदर्श देश है. आप अपने पास-पड़ोस में देखिए और आपको पता चल जाएगा. हालांकि हमारे संविधान में समान अधिकार की गारंटी दी गई है लेकिन उस समानता के अहसास में कई बार कमी महसूस होती है, कभी-कभी हमें दोयम दर्जे के नागरिक जैसा लगता है. जो असल मुद्दे हैं वो, अक्सर दब जाते हैं.'

इसके बाद जब नकवी को एहसास हुआ कि वो गलत बयान दे बैठे हैं और विपक्ष उन्हें घेर सकता है तो उन्होंने कहा कि उनका यह बयान अल्पसंख्यकों की सामाजिक स्थिति पर टिप्पणी नहीं है.

गौरतलब है कि यूपीए सरकार के द्वारा गठित सच्चर कमेटी और कुंडू कमेटी की रिपोर्टों समेत कई रिपोर्टों की अनुशंसा के बाद भी विभिन्न सरकारों ने मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बहुत कम काम नहीं किया है.

वहीं नरेंद्र मोदी सरकार लगभग ढाई साल के अपने कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के प्रति उसके रुख को लेकर आलोचना की शिकार होती रही है. असहिष्णुता, घर वापसी, बीफ और गोहत्या जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर अल्पसंख्यक विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं.

नकवी ने कहा, 'हमारी सरकार देश में दंगा न होने देने के लिए प्रतिबद्ध है. भारतीय मुसलमानों को किसी से देशभक्ति का सबूत नहीं चाहिए. उन्हीं की वजह से कट्टरवादी संगठन भारत में जगह नहीं बना पाए हैं.'

First published: 6 October 2016, 12:41 IST
 
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