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शिवपाल के इस्तीफे की धमकी सपा और उसके शीर्ष परिवार के भीतर चल रही खींचतान की निशानी है

अतुल चंद्रा | Updated on: 17 August 2016, 8:41 IST

उत्तर प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री शिवापाल यादव के इस्तीफे की धमकी- ‘अधिकारी मेरी बात नहीं सुनते और मेरे आदेशों की अनदेखी करते हैं,’ के एक दिन बाद उनके बड़े भाई मुलायम सिंह यादव ने अपने छोटे भाई का यह कहते हुए बचाव किया कि वे एक मंत्री हैं जो कुछ अच्छा काम करने का प्रयास कर रहे हैं. उनकी बात बिल्कुल सही है.

मैनपुरी में रविवार को आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए शिवपाल ने कहा, ‘‘हमने पहली बार प्रदेश में अपने बूते पर सरकार बनाई है लेकिन पार्टी के ही अपने कई नेता इसे नुकसान पहुंचा रहे हैं. यहां तक कि इंजीनियर और अधिकारी भी मेरे आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं. अगर भ्रष्टाचार और अवज्ञा जारी रहा तो मैं मंत्रीपद से इस्तीफा देकर पार्टी के लिये काम करने लगूंगा.’’

शिवपाल इस चुनावी वर्ष में पार्टी के राज्य प्रभारी हैं.

अपने भाई के बचाव में उतरे मुलायम को इसमें साजिश की बू आई और उन्होंने बताया कि उन्होंने शिवपाल को इस्तीफा न देने के लिये मना लिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शिवपाल इस्तीफा देते हैं तो स्थितियां काबू से बाहर हो जाएंगी.

वे इतने पर ही नहीं रुके और अपने बेटे, प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पर भूमाफियाओं को खुली छूट देने, पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने और चापलूसों से घिरे रहने के लिए आड़े हाथों लिया. मुलायम ने कहा कि अधिकारी न तो वरिष्ठ मंत्रियों की ही सुन रहे हैं और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं की और मुख्यमंत्री इस स्थिति पर काबू पाने में असफल रहे हैं.

हमने प्रदेश में अपने बूते पर सरकार बनाई है लेकिन पार्टी के कुछ नेता और अधिकारी इसे नुकसान पहुंचा रहे हैं

ऐसा पहली बार नहीं है जब मुलायम सिंह ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश को आड़े हाथों लिया हो. लेकिन रविवार को अखिलेश और शिवपाल के बीच के मतभेद खुलकर सामने आने के बाद उन्होंने शिवपाल को शांत रखने के लिये अखिलेश पर इतना कड़ा जुबानी हमला पहली बार बोला है.

यादव परिवार की एकता में दरार पड़ने के पहले संकेत पिछले वर्ष दिसंबर में उस समय मिले थे जब शिवपाल ने अखिलेश के दो वफादारों, सुनील यादव और आनंद भदौरिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.

इससे नाराज मुख्यमंत्री ने उनका निलंबन वापस होने तक सैफई महोत्सव का बहिष्कार कर दिया था. इसके बाद जेल में बंद माफिया सरगना मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय का मामला सामने आया. एक तरफ जहां शिवपाल पूरी तरह से इसके पक्ष में थे अखिलेश ने इस विलय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने चाचा के इरादों पर पानी फेर दिया.

शिवपाल के मुस्कुराते हुए अफजाल अंसारी के पार्टी में स्वागत करने के एक दिन बाद ही अखिलेश ने इस विलय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया. शिवपाल ने इसके बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी जताई.

दीपक सिंघल की नियुक्ति भी चाचा-भतीजे के बिगड़ते हुए संबंधों का एक बड़ा सबूत बनी. हालांकि अखिलेश को अपने दूसरे चाचा और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव का पूर्ण समर्थन मिला हुआ है.

सुनने में आया है कि अखिलेश यादव मुख्य सचिव के रूप में सिंघल की नियुक्ति के विरोध में थे. माना जाता है कि अपने पूर्ववर्ती अलोक रंजन जैसी स्वच्छ छवि न रखने वाले सिंघल शिवपाल के करीबियों में से हैं.

सिंघल को पद पर आने से रोकने में असफल रहने पर अखिलेश ने रंजन को अपने सलाहकार के रूप में नियुक्त किया.

शिवपाल मुख्तार अंसारी को पार्टी में लाने के पक्ष में थे जबकि अखिलेश ने इस विलय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया

ऐसा होने के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में सत्ता के दो केंद्र हो गए थे जिनमें एक तरफ मुलायम की बेहद करीबी मानी जाने वाली मुख्यमंत्री की प्रधान सचिव अनीता सिंह और दीपक सिंघल हैं वहीं दूसरी तरफ स्वयं मुख्यमंत्री और उनके सलाहकार आलोक रंजन.

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व लखनऊ में निर्माण की खराब गुणवत्ता के चलते एक पुल और एक फ्लाईओवर के टूटने को लेकर शिवपाल को खासी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. इनका निर्माण शिवपाल के विभागों के इंजीनियरों द्वारा किया गया था. शायद इसीलिये उन्होंने अपने गुस्से का इजहार यह कहते हुए किया कि इंजीनियर उनकी नहीं सुन रहे हैं.

हो सकता है कि यह प्रकरण मुलायम सिंह के पारिवारिक ड्रामे का एक और गंभीर सीन साबित हो लेकिन मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद से ही अखिलेश अपने पिता के शब्दों के बाण झेलते आ रहे हैं.

मुलायम के अखिलेश पर जुबानी हमले

12 अगस्त 2016 को मुलायम ने जमीनों पर कब्जे करने, जबरन वसूली, भ्रष्टाचार, लूटपाट और दबंगई में लिप्त रहने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं को लताड़ा है. मुलायम को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के एक नेता द्वारा संपत्ति हथियाने के लिये लखनऊ के एक कमरे में एक व्यापारी को बंदी बनाए रखने की घटना सामने आने के बाद ऐसा बोलने को मजबूर होना पड़ा है.

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकार की तमाम विफलताओं का ठीकरा अखिलेश के सिर पर ही फूटता आया है. उनके लिये तो यह दोहरी मार झेलने जैसा है क्योंकि प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने में नाकाम रहने पर उनके पिता ने उन्हें सार्वजनिक रूप से फटकारने का भी कोई मौका नहीं छोड़ते.

अगस्त 2012 में अखिलेश के सरकारी आवास पर आयोजित एक बैठक में मुलायम ने मंत्रियों और विधायकों को चुनावों के दौरान मतदाताओं से किये गए वायदे पूरे करने के लिये अधिक मेहनत करने को कहा था. उनके इस रवैये के चलते अखिलेश एक कठपुतली मुख्यमंत्री अधिक प्रतीत होते हैं.

इसके बाद मुलायम ने अखिलेश को नौकरशाही के बेहतर प्रबंधन का सबक दिया. मुलायम ने अपने बेटे को समझाया कि चूंकि अधिकारियों को एक से अधिक विभाग संभालने पड़ रहे हैं इसलिये सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है. उन्होंने सलाह दी, ‘यह बेहद प्रतिकूल तरीके से सरकार के कामकाज पर असर डालता है.’

ऐसा नहीं है कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) मंत्रालय का काम संभाल रहे अपने छोटे भाई को बख्शा हो. एक मौके पर उन्होंने कहा, ‘मैंने शिवपाल को बताया है कि पीडब्लूडी ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है और इसके कामकाज में कई कमियां हैं.’

मुलायम की सार्वजनिक बयानबाजी जारी रही. मार्च 2013 में उन्होंने अपने बेटे को कहा, ‘अखिलेश की सरकार लचीलेपन से नहीं चल रही बल्कि कड़ा रुख अपनाते हुए चल रही है.’

अखिलेश सरकार के कामकाज के प्रति नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा, ‘अपने काम निकलवाने के लिये मंत्री अय्याशी में और अधिकारी चापलूसी में लगे हैं और यह प्रवृति सरकार का नाम खराब कर रही है. ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.’

इसके बाद मुलायम ने पुलिस थानों और तहसीलों को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र कहते हुए मुख्यमंत्री से मांग की कि वे स्वयं समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें.

अक्टूबर 2013 में एक बार फिर मुलायम ने अपने बेटे और उसकी सरकार की खिंचाई की. मुलायम ने अखिलेश और उनके मंत्रियों से कहा, ‘अपने तौर-तरीके सुधार लो या फिर गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहो.’ 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी की दुर्गति से चिंतित होकर मुलायम सिह ने कहा, ‘मैं अखिलेश और दूसरे मंत्रियों को चेतावनी दे रहा हूं कि वे अपनी गलतियों को सुधारें.’

चार वर्ष तक सत्ता में रहने के बाद भी अखिलेश उस प्रकार की गंभीरता या सरकार पर एकछत्र पकड़ प्रदर्शित करने में नाकामयाब रहे हैं जो एक मुख्यमंत्री को दिखानी चाहिये. ऐसा लगता है कि मुलायम, शिवपाल, राम गोपाल और आजम सरकार चला रहे हैं और अखिलेश पांचवें मुख्यमंत्री हैं. यह नेता ही मुख्यमंत्री को कोई भी निर्णय लेने या न लेने के लिये मजबूर करते आ रहे हैं.

मुलायम और शिवपाल के मुंह से भ्रष्टाचार और अपराधीकरण की बात सुनना अपने आप में बड़ी विडंबना है क्योंकि यह दोनों ही भ्रष्टाचारियों और अपराधियों के सबसे बड़े रहनुमा माने जाते हैं. अब जब उनके पांव तले की जमीन तेजी से खिसकती दिख रही है तो हो सकता है कि वे शुचिता और सुशासन दिखाने के लिये चिंता का यह हास्यास्पद खेल खेल रहे हों. आखिरकार यही वह गुण हैं जिनके लिये सपा जानी जाती है.

First published: 17 August 2016, 8:41 IST
 
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