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मुलायम सिंह: मेरी बात नहीं टाल सकते अखिलेश, गायत्री प्रजापति दोबारा बनेंगे मंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2016, 13:18 IST
QUICK PILL
  • सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि परिवार में कोई विवाद नहीं है. कुछ लोग शिवपाल और अखिलेश में मतभेद पैदा कर रहे हैं.
  • अखिलेश से मुलाकात के बाद मुलायम ने एलान किया कि गायत्री प्रजापति की मंत्री पद से बर्खास्तगी रद्द कर दी गई है. 12 सितंबर को दो मंत्रियों को अखिलेश ने बर्खास्त किया था.
  • लखनऊ में मुलायम ने कहा कि उनके रहते परिवार में कोई फूट नहीं हो सकती और सीएम अखिलेश यादव उनकी बात नहीं टाल सकते.
  • 15 सितंबर को शिवपाल यादव ने कैबिनेट मंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है. अखिलेश यादव से नाराजगी को इसकी वजह माना जा रहा है.

समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान के बीच पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में मोर्चा संभाला. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुलायम ने कहा कि उनके रहते पार्टी में कोई फूट नहीं हो सकती. 

इससे पहले सीएम अखिलेश यादव मुलायम से मुलाकात करने पहुंचे. इस मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुलायम ने कहा, "समाजवादी पार्टी एक परिवार है. पार्टी में कोई मतभेद नहीं है."

मुलायम ने कहा, "पार्टी में मेरे रहते कोई झगड़ा नहीं हो सकता. शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच कोई विवाद नहीं है. हर पिता और पुत्र बहुत सारे मुद्दों का सामना करते हैं. कोई झगड़ा नहीं है. लेकिन हमारे उन लोगों की गलती है जो मीडिया से बात कर रहे हैं."

'गायत्री प्रजापति की बर्खास्तगी रद्द होगी'

मुलायम ने कहा, "यह चुनाव का वक्त है. हमें एक साथ आकर काम करना चाहिए. अखिलेश, शिवपाल और रामगोपाल यादव के बीच कोई लड़ाई नहीं है. अखिलेश शिवपाल से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे."

सपा सुप्रीमो ने कहा, "अखिलेश हमारी बात टालेगा? अखिलेश हमारी बात नहीं टाल सकते." इस दौरान सपा सुप्रीमो ने मंत्रियों की बर्खास्तगी पर भी बड़ा बयान दिया.

पिता और पुत्र बहुत सारे मुद्दों का सामना करते हैं, अखिलेश, शिवपाल और रामगोपाल यादव में कोई झगड़ा नहीं है.

हाल ही में बर्खास्त हुए खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को लेकर मुलायम ने इस दौरान कहा कि गायत्री प्रजापति की बर्खास्तगी रद्द होगी. 12 सितंबर को सीएम अखिलेश यादव ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह को बर्खास्त कर दिया था.

इससे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आधिकारिक तौर पर कहा कि कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव का इस्तीफा उन्होंने मंजूर नहीं किया है. वहीं इस्तीफा देने के बाद शिवपाल यादव ने सपा सुप्रीमो से आज उनके आवास पर मुलाकात की थी. मुलायम ने प्रदेश अध्यक्ष पद से भी उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया है.

ऐसे बिगड़ी बात

पार्टी अध्यक्ष और अखिलेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के साथ ही शिवपाल ने सरकारी गाड़ी भी छोड़ दी है. बताया जा रहा है कि वो अपना बंगला भी जल्द खाली कर सकते हैं. इस बीच बृहस्पतिवार को शिवपाल से तकरीबन 20 विधायकों ने मुलाकात की.

सपा सूत्रों के मुताबिक शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह से कहा कि जिस तरह से उनसे मंत्रालय छीना गया है उससे उनका काफी अपमान हुआ है और उन्हें अखिलेश से बात करके इस फैसले को पलटवाना चाहिए.

शिवपाल यादव साथ ही मुलायम सिंह से आश्वासन चाहते थे कि उन्हें बतौर प्रदेश अध्यक्ष अपने हिसाब से काम करने की छूट हो और अखिलेश यादव टिकट बंटवारे के अलावा बाकी कामकाज में दखल न दें.

सूत्रों के मुताबिक मुलायम से बातचीत में अखिलेश ने भी साफ शब्दों में कह दिया था कि वह अपना फैसला किसी भी हालत में बदलेंगे नहीं. मुलायम ने शिवपाल से महज इतना कहा कि वह मामले को ठीक कर देंगे और वे मंत्री तथा अध्यक्ष के तौर पर काम करते रहें.

शिवपाल ने मुलायम से कहा कि जिस तरह से उनसे मंत्रालय छीना गया है, उससे उनका काफी अपमान हुआ है.

सपा सुप्रीमो ने शिवपाल को अखिलेश से मिलने की सलाह दी. सूत्रों के मुताबिक यहां बात बनने के बजाय और बिगड़ गई. अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से कहा कि वो अमर सिंह का साथ दे रहे हैं, जो हटाए गए मुख्य सचिव दीपक सिंघल के साथ मिलकर उनकी सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे थे.

आरोपों पर शिवपाल यादव ने अखिलेश से कहा कि अगर उनके पास कोई ठोस सबूत है तो बताएं. शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि कोई कुछ भी कहता हो, लेकिन फैसले मुख्यमंत्री को लेने होते हैं.

हालांकि इस दौरान शिवपाल ने अमर सिंह का बचाव किया. सूत्रों के मुताबिक शिवपाल ने अखिलेश से कहा कि अमर सिंह को पार्टी में लाकर सांसद किसी और ने नहीं, बल्कि खुद नेताजी ने बनाया है.

इस दौरान बात इतनी बिगड़ गई कि महज 20 मिनट की मुलाकात के बाद शिवपाल यादव बाहर आ गए और रात में ही अध्यक्ष के साथ ही मंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर डाला.

विलय पर विवाद

चाचा और भतीजे के बीच विवाद की शुरुआत जून महीने में हुई. 21 जून को लखनऊ में शिवपाल यादव की मौजूदगी में कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया, हालांकि सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्तार अंसारी की पार्टी सपा में नहीं शामिल होगी.

इसी के ठीक बाद सीएम अखिलेश यादव ने विलय के लिए मध्यस्थता निभाने वाले कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. बलराम यादव को मुलायम सिंह का करीबी माना जाता है. कौमी एकता दल के विलय में सक्रिय भूमिका निभाने के चलते बलराम यादव पर कार्रवाई हुई.

इस मामले से शिवपाल और अखिलेश के बीच संबंधों में खटास पर मुहर लग गई. विलय का यह विवाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के पास पहुंचा. जिसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए बलराम यादव की दोबारा कैबिनेट में वापसी हुई, हालांकि कौमी एकता दल के विलय की संभावना खत्म हो गई.

शिवपाल यादव माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय चाहते थे.

दो मंत्रियों और मुख्य सचिव पर गाज

शिवपाल और अखिलेश का विवाद यहीं तक नहीं थमा. 12 सितंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अचानक दो कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया. इसमें से एक खनन मंत्री गायत्री प्रजापति थे, जबकि दूसरे पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह.

गायत्री प्रजापति को मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है, जबकि राजकिशोर सिंह शिवपाल गुट के बताए जाते हैं. गायत्री प्रजापति अवैध खनन को लेकर कठघरे में हैं, वहीं राजकिशोर सिंह पर जमीन हड़पने से लेकर खनन में भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसके ठीक अगले दिन सीएम अखिलेश ने शिवपाल के करीबी माने जाने वाले मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया. गैरतलब है कि महीने भर पहले जब शिवपाल यादव ने सरकार से इस्तीफे की धमकी दी थी, तब इसकी कुछ वजहों में एक वजह दीपक सिंघल भी थे.

जिस समय अखिलेश ने यह सारे फैसले किए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव लखनऊ में थे. दीपक सिंघल की नियुक्ति के पीछे अमर सिंह और शिवपाल यादव की लॉबिंग प्रमुख वजह बताई जा रही थी.

12 सितंबर को अखिलेश यादव ने अचानक दो मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया. अगले ही दिन मुख्य सचिव हटा दिए गए.

सूत्रों के मुताबिक दीपक सिंघल ने गायत्री प्रजापति को हटवाने में भूमिका निभाई. गायत्री प्रजापति ने सपा सुप्रीमो से जब यह बात कही तो उन्होंने दीपक सिंघल को हटाने को कहा. इसके बाद सिंघल भी हटा दिए गए.

सूत्रों के मुताबिक बाद में जब मुलायम ने गायत्री प्रजापति को बहाल करने को कहा, तो अखिलेश ने फैसला पलटने से इनकार कर दिया. सपा सूत्रों के मुताबिक अमर सिंह ने मुलायम को सलाह दी कि अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर वो संदेश दें कि अगर वो मनमर्जी कर सकते हैं तो बतौर सपा सुप्रीमो वे भी स्वतंत्र हैं.

मुलायम ने इसके बाद अखिलेश को हटाकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, लेकिन यह दांव भी उल्टा पड़ गया. इसके ठीक बाद अखिलेश ने शिवपाल यादव से लोकनिर्माण, सिंचाई और राजस्व जैसे अहम विभाग छीन लिए.

दिल्ली में मुलायम से मुलाकात के बाद तो शिवपाल ने संकेत दिए कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जब लखनऊ में अखिलेश से उनकी मुलाकात के बाद यह तय हो गया कि छीने गए विभाग उन्हें वापस नहीं मिलने वाले, तो शिवपाल ने बड़ा कदम उठाते हुए पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

First published: 16 September 2016, 13:18 IST
 
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