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1993 सीरियल ब्लास्ट: जेल से आज़ाद हो सकता है मुंबई का मुजरिम

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 June 2017, 10:31 IST
मुस्तफ़ा डोसा/ फाइल फोटो

12 मार्च 1993 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को दहलाने वाले सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड मुस्तफ़ा डोसा जेल से बाहर आ सकता है. 16 जून को मुंबई की टाडा कोर्ट ने डोसा को गुनहगार करार दिया था. अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के क़रीबी डोसा और अबु सलेम समेत छह अभियुक्तों को अदालत ने मुजरिम करार दिया था. अभी सज़ा पर सुनवाई चल रही है. 

मुंबई के जेजे अस्पताल के डीन टीपी लहाणे ने बताया है कि मुस्तफ़ा डोसा को सीने में दर्द और इंफेक्शन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टर लहाणे के मुताबिक डोसा का ब्लड प्रेशर बेकाबू है और साथ ही उसे डायबिटीज भी है.

मुस्तफ़ा को मौत की सज़ा की मांग

मुस्तफ़ा डोसा ने स्पेशल टाडा कोर्ट को जानकारी दी है कि उसे हार्ट की समस्या है लिहाजा वो बाइपास सर्जरी कराना चाहता है. 1993 के मुंबई बम धमाकों में अभियुक्तों को सज़ा सुनाते हुए टाडा कोर्ट के जज गोविंद सानप ने कहा था कि इन विस्फोटों के लिए भारत में आरडीएक्स जैसे घातक विस्फोटक पदार्थ लाने में सबसे बड़ी भूमिका मुस्तफा अहमद उमर डोसा उर्फ मुस्तफा मंजनू की थी.

उसी ने इन विस्फोटों की तैयारी के लिए कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा ताकि वे विस्फोटों को अंजाम देने के लिए हथियारों की ट्रेनिंग ले सकें. विशेष लोक अभियोजक ने मंगलवार को दोषियों की सज़ा पर सुनवाई के दौरान मुस्तफ़ा डोसा को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग की है.

टाडा कोर्ट ने अबु सलेम को भी मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मामले में दोषी करार दिया है.

दाऊद-टाइगर मेमन और डोसा ने रची साज़िश 

अभियोजन पक्ष के मुताबिक छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद बदला लेने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने दुबई में एक बैठक की, जिसमें मुंबई सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची गई. साजिश में दाऊद के साथ टाइगर मेमन, मोहम्मद डोसा और मुस्तफा डोसा भी शामिल थे.

धमाकों को अंजाम देने के लिए गोला बारूद, हथियार और आरडीएक्स चोरी-छिपे भारत मंगाए गए. मुस्तफा डोसा, टाइगर मेमन और छोटा शकील ने इन हथियारों को चलाने और विस्फोटकों को अंजाम देने के लिए कई युवाओं ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान और भारत में ट्रेनिंग कैंप चलाए. बाद में उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया. 

पहली बैठक दुबई में मोहम्मद डोसा के घर

सीबीआई के मुताबिक साजिश रचने के दौरान विस्फोट से पहले 15 बैठकें आयोजित की गईं. जिनका आयोजन डोसा ही करता था. दिसंबर, 1992 में दुबई में मुस्तफा डोसा के भाई और भगोड़े आरोपी मोहम्मद डोसा के घर में पहली बैठक हुई थी. दूसरी बैठक पनवेल होटल में 6 जनवरी, 1993 को हुई थी. यहां फिरोज भी था, जो रायगढ़ जिले में हथियार-गोला बारूद उतारने के लिए कस्टम अधिकारियों से डीलिंग कर चुका था.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट से पहले ही दाऊद इब्राहिम भारत छोड़कर दुबई जा चुका था.

सीबीआई के मुताबिक कस्टम वालों ने 10 लाख रुपये की रिश्वत ली. मुस्तफा डोसा ने अपने भाई मोहम्मद डोसा को बताया कि हथियार भेज दिए गए हैं. फिरोज इसके बाद अलीबाग गया और 9 जनवरी को हथियार और धमाकों से जुड़ी दूसरी खेप उतरवाई गई. बाद में इन्हीं का इस्तेमाल धमाकों के लिए किया गया. 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार 12 धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

First published: 28 June 2017, 10:19 IST
 
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