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कमाठीपुरा की गलियों में पढ़ाने वाली रॉबिन दुनिया की टॉप 10 शिक्षकों में शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 February 2016, 17:07 IST

मुंबई के रेड लाइट इलाके कमाठीपुरा में बच्चियों को पढ़ाने वाली रॉबिन चौरसिया देश की इकलौती ऐसी महिला बन गई हैं जो दुनिया के टॉप 10 शिक्षकों की दौड़ में शामिल हैं. यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी स्पर्धा से गुजरना पड़ा है. करीब 7,990 प्रतिभागियों को पीछे छोड़कर वह इस मुकाम तक पहुंची हैं. यौनकर्म के लिए बदनाम कमाठीपुरा की अंधेरी गलियों में शिक्षा की रोशनी बिखेरने वाली रॉबिन देश के शिक्षकों के लिए एक मिसाल बन गई हैं. 

क्रांति नाम से एक संस्था चलाने वाली रॉबिन को उनके अनोखे और साहसी काम के लिए ग्लोबल प्राइज फॉर टीचर्स की सूची के टॉप 10 में जगह मिली है. इस ग्लोबल प्राइज के लिए दुनिया के 148 देशों से 8,000 प्रविष्टियां आई थीं. जिनमें से अब टॉप 10 की सूची जारी की गई है.

दुनिया के दिग्गज वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग्स ने लंदन में टॉप 10 शिक्षकों के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि हर महान कलाकार, दार्शनिक और वैज्ञानिक के पीछे एक गुरु होता है. जिंदगी में आने वाली दिक्कतों के दौरान भी गुरु संभालने के लिए खड़े होते हैं. 

9 दिसंबर 2015 को शिक्षकों के नोबल पुरस्कार कहे जाने वाले वैश्विक पुरस्कार के टॉप 50 में भारत के चार शिक्षकों के नाम शामिल थे

इस ग्लोबल प्राइज की फाउंडर सनी वर्के ने रॉबिन को टॉप 10 में चुने जाने पर बधाई दी है. उन्होंने कहा कि रॉबिन की कहानी सभी के लिए प्रेरणा है. आगामी 13 मार्च को दुबई में ग्लोबल एजुकेशन एंड स्किल्स फोरम के एक समारोह में विजेता शिक्षक की घोषणा की जाएगी. फिलहाल टॉप 10 में ब्रिटेन, अमेरिका, फिलीस्तीन, जापान, नैरोबी, फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के टीचर्स भी शामिल हैं. 

मालूम हो कि रॉबिन एक शिक्षिका हैं और वे मुंबई के रेड लाइट इलाके की 12-20 साल तक की बच्चियों-किशोरियों को पढ़ाती हैं. इस काम के लिए न तो कोई उन्हें वेतन देता है और न ही कोई उनकी आर्थिक मदद करता है. क्रांति संस्था की संस्थापक रॉबिन अपनी छात्राओं को क्रांतिकारी के नाम से पुकारती हैं. इन छात्राओं में से ज्यादातर सेक्स वर्कर्स की बेटियां हैं, बहुत सी लड़कियां मानव तस्करी के जरिए मुंबई पहुंची हैं. 

बीते 9 दिसंबर 2015 को शिक्षकों के नोबल पुरस्कार कहे जाने वाले इस वैश्विक पुरस्कार के टॉप 50 में भारत के चार शिक्षकों के नाम शामिल थे. इनमें रॉबिन के अलावा मुंबई के धवल बाठिया, बंगलुरू ईडी वेंचर की सांथी कारामचेती और दिल्ली स्थित कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल की रश्मि कथूरिया शामिल थीं. 

पुरस्कार के बारे में

इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2014 में वार्की फाउंडेशन एट द ग्लोबल एजुकेशन एंड स्किल फोरम द्वारा की गई. इसका मकसद अध्यापन या शिक्षण पेशे के महत्व को पहचान दिलाना है. विजेता शिक्षक को 10 लाख डॉलर यानी करीब 67 करोड़ रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए जाते हैं.

First published: 18 February 2016, 17:07 IST
 
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