Home » इंडिया » Zakura attack: Mushtaq Ahmed Zargar's banned Al-Umar Mujahideen claimed the responsibility
 

घाटी में आतंक की नई आहट: 17 साल बाद सामने आया मुश्ताक अहमद जरगर

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 October 2016, 17:30 IST
(फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जकूरा के पास हुए आतंकी हमले में सशस्त्र सीमा बल के काफिले को निशाना बनाया गया. प्रतिबंधित अल-उमर मुजाहिदीन नाम के आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए भविष्य में इसी तरीके के और हमले करने की चेतावनी दी है.

भले ही इसे घाटी में एक आतंकी घटना की तरह देखा जा रहा हो, लेकिन अगर अतीत पर नजर दौड़ाएं तो इससे 90 के दशक की यादें ताजा हो गई हैं. वजह है इस आतंकी संगठन का मुखिया मुश्ताक अहमद जरगर, जो 17 साल बाद सामने आया है.

मुश्ताक अहमद जरगर वही शख्स है, जिसे 1999 में विमान आईसी-814 के अपहृत यात्रियों को रिहा करने के बदले छोड़ा गया था. यात्रियों की सकुशल रिहाई के लिए तीन खूंखार आतंकियों  को छोड़ा गया था. इनके नाम हैं- मौलाना मसूद अजहर, शेख उमर और मुश्ताक अहमद जरगर.

मौलाना मसूद अजहर ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद नाम के आतंकी संगठन की नींव रखी, जिस पर 2001 में भारतीय संसद, इस साल पठानकोट और उरी में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.

क्या है मुश्ताक अहमद जरगर का अतीत?

मुश्ताक अहमद जरगर के 1999 के बाद सामने आने से घाटी में दहशत की नई दस्तक देखी जा रही है. दो दशक के बाद कश्मीर घाटी में अल-उमर मुजाहिदीन एक बार फिर से सक्रिय हुआ है. जकूरा हमले में एसएसबी का एक जवान शहीद हुआ है.

मुश्ताक अहमद जरगर नाम के कुख्यात आतंकवादी को 1992 में सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया था. इससे पहले 12 अगस्त 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण में उसका नाम सामने आया था.

रूबिया सईद की रिहाई के बदले जदगर ने पांच आतंकवादियों को छोड़ने की मांग की थी. जिसे तत्कालीन सरकार ने मान लिया था. इसके बाद मुश्ताक ने श्रीनगर में हत्या की कई वारदातों को अंजाम दिया.

15 मई 1992 को जरगर सुरक्षाबलों की गिरफ्त में आया. गिरफ्तारी के बाद उसका आतंकी संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन खत्म हो गया. सात साल बाद दिसंबर 1999 में आतंकवादियों ने भारतीय विमान (आईसी-814) को अगवा कर लिया.

इसके बाद विमान को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया. आखिरकार यात्रियों की रिहाई के लिए भारत सरकार को झुकना पड़ा. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली तत्कालीन एनडीए सरकार ने 31 दिसंबर 1999 की रात मसूद अजहर के साथ मुश्ताक जरगर को भी रिहा कर दिया.

रिहा होने के बाद जरगर भी मसूद अजहर की तरह पाकिस्तान चला गया. यहीं से वो लगातार भारत के खिलाफ साजिश रचने लगा. सुरक्षा एजेंसिों की मानें तो कश्मीर के लोगों को जरगर भारत के खिलाफ लगातार भड़काता रहा है. यही नहीं कश्मीरी पंडितों को घाटी से भगाने में भी जरगर का हाथ माना जाता है.

अब जरगर का आतंकी संगठन दो दशक बाद एक बार फिर से हरकत में आ गया है. श्रीनगर के पास जकूरा में एसएसबी काफिले पर हुए आतंकी हमले में राजस्थान का एक जवान शहीद हो गया, जबकि 8 जवान जख्मी हुए हैं.

जरगर की हिस्ट्रीशीट

नाम- मुश्ताक अहमद जरगर

जन्म- 1967

राष्ट्रीयता- भारतीय

जन्मस्थान- जामा मस्जिद इलाका, नौहट्टा, श्रीनगर (कश्मीर)

संगठन- अल-उमर मुजाहिदीन

  • 40 से ज्यादा हत्या के आरोप
  • कश्मीर में आतंकवाद को बढावा देना
  • भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन
  • भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचना

First published: 15 October 2016, 17:30 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी