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मुस्लिम डॉक्टर ने की अंगदान की घोषणा तो मदरसे ने जारी कर दिया फतवा

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2018, 15:22 IST

यूूपी के कानपुर के एक मदरसे ने एक मुस्लिम डॉक्टर के खिलाफ सिर्फ इसलिए फतवा जारी कर दिया क्योंकि उस डॉक्टर ने अपनी मृत्युु के बाद अपना पूरा शरीर दान करने की घोषणा कर दी थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर के रामा डेंटल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अर्शद मंसूरी ने अपनी मृत्यु के बाद अपना पूरा शरीर दान करने की बात कही. डॉ. अर्शद ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स के रिसर्च लिए अपना शरीर दान करने की घोषणा की. इसके बाद वहां के मदरसे ने उनके खिलाफ फतवा जारी करते हुए कहा कि अंगदान अवैध और गैर-मुस्लिम कार्य है.

 

अरशद का कहना है कि डेंटल कॉलेज के तमाम छात्र और कर्मचारियों के साथ हमने यह संकल्प लिया है. उन्होंने बताया कि उन्होंने 2006 में इसके संबंध में बकायदा एक फॉर्म भी भरा था कि हम मृत्यु के बाद अपना शरीर रिसर्च कार्य के लिए दान कर देंगे. इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को हमारे अंग भी दान कर दिए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि अल्लाह ने भी कहा है कि व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी किसी के काम आना चाहिए. लेकिन डॉ. अरशद का यह फैसला मदरसा एहसानुल मदारिस को नागवार गुजरा और मदरसे ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया. मदरसा दारूल उलूम कुरान के मौलवी मुफ्ती सईद अजफर हुसैन का कहना है कि हम सिर्फ उन्हीं चीजों को दान दे सकते हैं, जो हमारी है. मौत के बाद भी हमारे शरीर पर अल्लाह का हक है और किसी भी वजह से इसे दान करना गैर इस्लामिक है. मृत्यु के बाद पूरे सम्मान के साथ शव को दफनाया जाना चाहिए.ि

फतवा का समर्थन करते हुए मदरसा के एक अन्य मौलवी मुफ्ती हनीफ बरकती ने कहा कि मनुष्य का शरीर अल्लाह की संपत्ति है, यहां तक कि मौत के बाद भी. शरिया भी यही कहता है और इसमें कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

 

हैरानी की बात तो यह है कि दारूल उलूम देवबंद ने भी इस फतवे का समर्थन किया है. फतवा में कहा गया है कि चूंकि मनुष्य का शरीर अल्लाह की संपत्ति है, इसलिए वह इसे दान नहीं कर सकता.

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फतवा जारी होने और धमकियां मिलने के बाद डॉ. अर्शद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उनका कहना है कि मौलवी गलत संदेश दे रहे हैं और लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. कॉर्निया 300 वर्षों तक ठीक रह सकता है और ईश्वर की भी यही मर्जी है कि मौत के बाद भी हम किसी के काम आएं.

First published: 18 March 2018, 15:22 IST
 
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