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मुस्लिम पिता और बेटे ने पेश की भाईचारे की मिसाल, बिना मजदूरी लिए 100 दिन में बना दिया मंदिर

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2019, 13:11 IST

हमारा देश हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल माना जाता है. यही नहीं इसी तरह की तमाम मिसाल आए दिन यहां देखने को भी मिल जाती है. ऐसी ही एक मिसाल पेश की मध्यप्रदेश के इटारसी में एक मुस्लिम पिता-पुत्र ने. जो कारीगर है. दोनों पिता-पुत्रों ने यहां एक मंदिर बनाया और उसके लिए कोई पैसा भी नहीं लिया. दोनों ने 100 दिन लगातार काम कर इस मंदिर का निर्माण किया.

हालांकि मंदिर बनवाने वाली एक टीचर ने दोनों का ये भाव देखकर अपनी छह एकड़ जमीन में से एक एकड़ जमीन को इन कारीगरों के नाम करने का ऐलान किया. बता दें कि सावित्री एक टीचर हैं और केसला के एक्सीलेंस स्कूल में 15 साल से पढ़ा रही हैं. वह बताती हैं कि वह मदर्स डे पर मंदिर बनवाकर अपनी मां की इच्छा पूरी करनी चाहती थीं.

सावित्री बताती हैं कि उन्होंने अपनी जमापूंजी में से 5 लाख रुपए मंदिर के लिए दान दिए थे, जिससे इसका निर्माण किया गया. इस मंदिर को बनाने के लिए मुस्लिम कारीगर पिता-पुत्र रहमान और रिजवान ने भी मदद की दोनों ने मंदिर बनाने का काम किया और मेहनताना के रूप में एक रुपया भी नहीं लिया. रहमान के मुताबिक, मंदिर बनाते समय बेटे को दूसरी जगह काम पर भेज देते थे, जिससे परिवार का गुजारा चलता रहा.

सावित्री बताती हैं कि उनकी मासिक सैलरी भी अच्छी है. इकलौती बेटी की शादी भी कर दी. उसके बाद मंदिर बनाने की ख्वाहिश ही पूूरी करनी थी. मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मंदिर में प्रतिमा की स्थापना की गई.

इस यज्ञशाला में ब्राह्मणों ने रहमान और रिजवान का तिलक भी किया. सावित्री बताती हैं कि उनकी मां भागवती शिवलाल ने 35 साल पहले गांव में मढ़िया बनाकर ईष्ट देवी सिद्धिदात्री की पत्थर की प्रतिमा स्थापित की थी. तभी से मन में इच्छा थी कि मां की ख्वाहिश पूरी की जाए.

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First published: 12 May 2019, 13:11 IST
 
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