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तीन बार तलाक: शायरा बानो मामला भी शाह बानो की राह पर!

अतुल चंद्रा | Updated on: 19 April 2016, 9:02 IST

शाह बानो का मामला भारतीय इतिहास में एक नजीर बन चुका है. इंदौर की रहने वाली शाह बानो ने तलाक के बाद अपने शौहर से गुजारे-भत्ते की मांग की थी. भारत की सुप्रीम कोर्ट ने 1985 में 62 वर्षीय शाह बानो के हक़ में फ़ैसला दिया था. उस समय आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने इसका विरोध किया था. बाद में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने संसद में कानून को बदल कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया था.

करीब तीन दशकों बाद एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं के तलाक से जुड़ा अदालत में पहुंच गया है और इस बार भी एआईएमपीएलबी अदालती लड़ाई के लिए तैयार है. शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक़, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की है. तीन तलाक़ व्यवस्था के तहत कोई मुस्लिम पुरुष लगातार तीन बार तलाक़ बोलकर अपनी बीवी को तलाक दे सकता है.

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हलाला निकाह की प्रथा के अनुसार तीन तलाक से अलग हो चुके मुस्लिम दंपत्ति दोबारा शादी नहीं कर सकते. अपने पूर्व शौहर से महिला तभी दोबारा शादी कर सकती है जब तलाक के बाद उसकी किसी और से शादी हो जाए और वो अपने नए शौहर से भी किसी वजह से अलग हो जाए.

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शनिवार को एआईएमपीएलबी ने अदालत में शायरा बानो मामले के विरोध का फैसला किया. एआईएमपीएलबी का कहना है कि वो मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करेगा. वहीं मुस्लिम महिलाएं इस मुद्दे को लेकर लामबंद होती दिख रही हैं. तीन तलाक का विरोध करने वाली महिलाएं इस व्यवस्था को कुरआन की शिक्षा के भी खिलाफ बता रही हैं.

बज़्मे-ख़वातीन की शहनाज़ सिदरत ने तीन तलाक को सामाजिक बुराई और गैर-कानूनी बताया है. उनके अनुसार हलाला निकाह और तीन तलाक एक गलत परंपरा की देन हैं.

आल इंडिया वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा कि इस्लामी कानून में कोई कमी नहीं है बल्कि लोग तलाक के अधिकार का दुरुपयोग करते हैं.

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अंबर कहती हैं, "कुरआन के अनुसार तीन महीने के दौरान तीन बार तलाक कहने पर तलाक होगा. ऐसे में तीन बार तुरंत तलाक तलाक तलाक कहने की क्या जल्दबाजी है? शायरा बानो के संग ज्यादती हुई है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को चाहिए कि वो शायरा और उनके शौहर को बुलाकर उनके बीच समझौता कराएं."

अंबर कहती हैं कि उनका संगठन ऐसे मुद्दों के लिए लड़ाई लड़ रहा है. वो कहती हैं कि अब लोग तीन एसएमएस भेजकर या शराब के नशे में तीन बार तलाक बोल दे रहे हैं और इसे जायज़ ठहराया जा रहा है.

सामाजिक कार्यकर्ता नाइश हसन तीन तलाक पर ज़्यादा तल्ख नजरिया रखती हैं. वो कहती हैं, "कुरआन तीन तलाक के खिलाफ है लेकिन शरिया में इसे जायज़ ठहराया जाता है. इसकी वजह ये है कि शरिया कानून अल्लाह ने नहीं इंसान ने बनाया है. ये मानवता के खिलाफ है."

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नाइश मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को चुनौती देते हुए कहती हैं कि वो उन्हें कुरआन में एक पंक्ति भी ऐसी दिखा दें जिसमें तीन तलाक को जायज़ ठहराया गया हो. नाइश कहती हैं, "जब कुरआन में सुलह और बातचीत की व्यवस्था की गई है तो तीन तलाक की जगह कहां बचती है." वो कहती हैं कि हलाला निकाल इस्लाम-पूर्व संस्कृति का हिस्सा है जो आज तक जारी है.

बेगम इक़्तेदार अली मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य हैं. वो तीन तलाक का विरोध करने वालों को गलत बताती हैं. वो कहती हैं, "तीन तलाक की व्यवस्था है और बहुत साफ शब्दों में है. इसपर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए."

कुछ मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक और हलाला निकाह को कुरआन की शिक्षाओं का विरोधी बता रही हैं

एआईएमपीएलबी के दूसरे सदस्य भी तीन तलाक का विरोध करने वालों को ज्यादा तवज्जो देते नहीं दिख रहे. बोर्ड ने हाल ही में लखनऊ में अपनी बैठक की जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद राबे हसन नदवी ने की. नदवी दारुल उलूम नदवातुल उलेमा के रेक्टर हैं.

बोर्ड ने इस बैठक में फैसला किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक, चार शादियां और तलाक के बाद गुजारे-भत्ते के शरियत कानून पर सुनवाई करना मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखलंदाजी है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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शाह बानो मामले में राजीव गांधी सरकार मुस्लिम रूढ़िवादियों के आगे झुक गयी थी. तब सरकार ने प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डाइवोर्स एक्ट 1986 के तहत मुसलमान औरतों को तलाक के बाद गुजारे-भत्ते के अधिकार से महरूम कर दिया था.

एआईएमपीएलबी के एक्जीक्यूटिव कमिटी के सदस्य ज़फरयाब जिलानी के अनुसार कुरआन के सबसे बड़े और बेहतर व्याख्याकार पैगंबर मोहम्मद थे और उन्होंने तीन तलाक को जायज़ ठहराया है. ये  पूछने पर कि सऊदी अरब, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे दूसरे मुस्लिम देशों में इस बाबत क्या कानून है? जिलानी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं.

First published: 19 April 2016, 9:02 IST
 
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