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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड: कॉमन सिविल कोड देश के लिए सही नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
(एएनआई)

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिमों में लागू तीन तलाक़ के मामले पर बृहस्पतिवार को अपनी सफाई दी और अपना पक्ष भी रखा.

बोर्ड के सदस्य ने इस संबंध मे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके कहा कि लॉ कमीशन देश के मुसलमानों के साथ पक्षपात कर रहा है. इसलिए वो लॉ कमीशन का बॉयकॉट करेंगे और इसमें शामिल नहीं होंगे.

बोर्ड ने कहा कि मौजूदा परिस्थियों में यूनिफॉर्म सिविल कोड इस मुल्क के लिए कतई मुनासिब नहीं है. इस देश में तमाम धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं और देश के संविधान ने बिना किसी दबाव के हमें अपने धर्म को मानने की आजादी दी है.

जबकि मोदी सरकार और लॉ कमीशन संविधान के ठीक उल्टा काम कर रही है. यह धर्म की आजादी की भावना के खिलाफ है.

इससे पहले तीन तलाक के विरोध में इसी माह केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके इस परंपरा का विरोध किया था.

केंद्र सरकार ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि तीन तलाक महिलाओं के साथ लैंगिक भेदभाव है और संविधान के मुताबिक लैंगिक आधार पर महिलाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं हो सकता.

गौरतलब है कि तीन तलाक के मसले पर मणिपुर की राज्यपाल और मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री रह चुकीं नजमा हेपतुल्ला ने कहा है कि समाज के कुछ तबके में तीन तलाक की गलत व्याख्या की जा रही है, क्योंकि इस्लाम में एक बार में तो तीन तलाक की कोई अवधारणा नहीं है.

इसके साथ ही गवर्नर नजमा ने यह भी कहा कि वो केंद्र सरकार के रुख से सहमत हैं कि इस्लाम के नाम पर महिलाओं के साथ किए जाने वाला अन्याय कतई सही नहीं है.

First published: 13 October 2016, 3:00 IST
 
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