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तीन तलाक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डः 5 करोड़ महिलाएं शरीयत के पक्ष में

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2017, 16:46 IST

तीन तलाक के ममले में रविवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि वे इस मामले को शरीयत के मुताबिक ही देखेंगे. इसके अलावा एक बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाए तब वे अपनी राय पेश करेंगे. वहीं, तीन तलाक के चलते परेशानी या अन्याय का सामना करने वाली महिलाओं की वे हरसंभव मदद करने को तैयार हैं.

पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक जिस तरह से तीन तलाक के मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, उनके सर्वेक्षण में पता चला कि यह उतना संगीन नहीं है. बोर्ड का कहना है कि दावों से अलग इससे 10 फीसदी भी प्रभावित नहीं हैं.

बोर्ड ने यह भी कहा इस्लाम और शरीयत के खिलाफ सोशल मीडिया का बढ़चढ़ कर इस्तेमाल किया गया और एक भ्रम जैसा माहौल बना दिया गया है जिसे वे जल्द दूर करेंगे.

 

बोर्ड का कहना है, "हमने देश में सबसे बड़ा सिग्नेचर कैंपेन लॉन्च किया है और जो आंकड़ें सामने आए हैं, उनमें 5 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत के साथ रहने पर अपनी सहमति दी है."

इसके अलावा उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शरीयत के कारणों के बिना तीन तलाक देने वाले व्यक्तियों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आगे कहा कि शरीयत के मुताबिक निकाह का रिश्ता हमेशा कायम रहे लेकिन मियां-बीवी में विवाद की स्थिति आने पर आचार संहिता जारी हो रही है.

 

उन्होंने सलाह दी कि मुसलमान शादियों में फिजूलखर्ची से बचें और इसे रोकने की हरसंभव कोशिश करें. जबकि मां-बाप को चाहिए कि वे अपनी बेटियों को शादी के वक्त दहेज देने की बजाय अपनी संपत्ति में हिस्सा दें.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाबरी मस्जिद को लेकर सुझाए गए कोर्ट से बाहर आपसी बातचीत से हल निकालने के बयान पर उन्होंने कहा कि वे सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानेंगे.

First published: 16 April 2017, 16:46 IST
 
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