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मुहम्मद दिलकश: पुलिस हमारे ऊपर सुलह के लिए दबाव डाल रही थी

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2016, 16:35 IST
QUICK PILL
बाहरी दिल्ली के बेगमपुर इलाक़े के एक मदरसे में पढ़ने वाले तीन छात्रों की\r\n पिटाई का मामला सामने आया है. मारपीट करने वाले तीनों छात्रों के ऊपर \r\nलगातार \'जय माता दी\' का नारा लगाने का दबाव डाल रहे थे. हमलावरों ने इस \r\nदौरान एक छात्र का हाथ तोड़ दिया. इस छात्र का नाम मुहम्मद दिलकश है.दिलकश\r\n का कहना है कि वे उसे असल में नारा लगाने के लिए नहीं मार रहे थे. \r\nहमलावरों को उनके हुलिए से दिक्कत थी. अगर वे \'जय माता दी\' का नारा लगाते \r\nतब भी आरोपी उन्हें मारते. दिलकश के मुताबिक आरोपी उसे उसके मज़हब की वजह \r\nसे निशाना बना रहे थे. उन्होंने मुसलिम लड़कों की पिटाई की, उनके सिर से \r\nटोपी खींचकर उसे पैरों तले रगड़ते रहे और उन्हें \'जय माता दी\' का नारा \r\nलगाने के लिए मजबूर करते रहे. दिलकश के मुताबिक इस मामले में पुलिस का \r\nरवैया भी निराशाजनक रहा. यह घटना 26 मार्च की है. शुरुआत में पुलिस इनके \r\nऊपर सुलह कर मामला रफा-दफा करने का दबाव डाल रही थी. लेकिन जब वे अपनी बात \r\nपर अड़ गए तब पुलिस ने मामला दर्ज किया. पुलिस ने सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार\r\n कर लिया है. पीड़ित दिलकश ने पुलिस स्टेशन जाकर सभी आरोपियों की पहचान भी \r\nकर ली है. इस पूरा मामले को समझने के लिए कैच ने दिलकश से बातचीत की.

अपने बारे में थोड़ा बताइए. मदरसे में कैसे आए?

मेरा नाम मुहम्मद दिलकश है. मैं बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला हूं. मेरे अब्बा छोटे-मोटे किसान हैं. पिछले साल मैं क़ुरआन का हाफ़िज़ा करने के लिए दिल्ली आया था. यहां आने का मकसद यह था कि मैं ठीक ढंग से हाफिजा कर सकूं. और साथ ही अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे सकूं. घर पर रहकर यह ठीक से संभव नहीं हो पा रहा था.

26 तारीख़ को आपके साथ क्या हुआ था?

हमारे साथ ही मदरसे में पढ़ाई करने वाला साथी नईम हर शाम अस्र की नमाज़ पढ़ने के बाद पास के बांस वाले पार्क में टहलने जाता था. उस दिन मैं और अजमल भी नईम के साथ हो लिए थे. मैं पहली बार नईम के साथ उस पार्क में गया था. वहां हमारे ऊपर हमला हो गया. हमारे मदरसे फैज-उल-उलूम से बांस वाला पार्क तकरीबन एक किलोमीटर दूर है.

क्या आप लोगों के बीच किसी तरह की कहासुनी हुई थी?

हमारे ऊपर हमला करने वाले कुल पांच लोग थे. पार्क में पहुंचने के एक मिनट बाद ही उन लोगों ने हमारे ऊपर हमला कर दिया. एक शब्द भी हमारे बीच में कहासुनी नहीं हुई थी. बिना किसी पूछताछ के उन्होंने हमें मारना शुरू कर दिया. पहले उन्होंने अजमल को एक थप्पड़ मारा, फिर उसे बांस से पीटने लगे. एक लड़का हमारा गला दबाने लगा. हम बेहद डर गए थे. शुक्र है कि हमारी जान बच गई. उस वक्त ऐसा लग रहा था कि वो हमें जान से ही मार देंगे.

बिना किसी उकसावे के उन्होंने हमला कर दिया? वे किसी बात पर गुस्सा थे क्या?

हमें उनके बारे में कुछ भी नहीं पता था. मारपीट के दौरान बस वे यही कह रहे थे कि 'जय माता दी' बोलो, 'जय माता दी' बोलो. बार-बार वे यही बात कह रहे थे. हमने नारा नहीं लगाया. लेकिन मुझे लगता है कि नारा लगाने के बाद भी वो हमें नहीं छोड़ते. पार्क में घुसते ही हमारा हुलिया देख उन्हें हमारे मज़हब का पता चल गया. मैंने नमाजी टोपी लगा रखी थी. उन्होंने पिटाई के दौरान मेरे सिर से टोपी नोचकर पैरों तले रौंदा. जय माता दी के बहाने वे सिर्फ हमें मारना और हमारे धर्म को अपमानित करना चाहते थे. हमें नहीं पता उन्हें किस बात पर गुस्सा था.

क्या 'भारत माता की जय' बोलने के लिए भी कहा गया था?

नहीं, उन्होंने सिर्फ 'जय माता दी' कहने के लिए कहा था.

फिर आप लोग बचे कैसे?

ऊपर वाले का शुक्र है कि हम बच गए. उन लोगों ने हमारा हाथ पकड़ रखा था, एक मेरा गला दबाने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान मेरा हाथ टूट गया. अफरा-तफरी में घबरा कर हम वहां से भागे. पार्क से बाहर निकलकर हमने अपने उस्ताद को खबर दी. वो मौक़े पर आए. उन्होंने 100 नंबर पर फोन करके पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. इसके बाद वहां पर पुलिस आई. पुलिस हमें लेकर संजय हॉस्पिटल गई.

क्या आप हमलावरों को पहचानते हैं?

मदरसे से पार्क काफी दूर है. हम पहली बार वहां गए थे. उनमें से किसी को पहले से नहीं जानते थे. जब हम भाग रहे थे तब हमलावर आपस में एक दूसरे का नाम ले रहे थे. उसी दौरान हमने पिंटू और साहिल का नाम सुना था. बीती रात जब पुलिस हमें थाने लेकर गई तो उसने पहले से ही कुछ लोगों को हिरासत में ले रखा था. ये वही लोग थे जिन्होंने हम पर हमला किया था. हमने सभी को पहचान लिया.

पुलिस का रवैया कैसा रहा इस मामले में?

पुलिस हमें आज सुबह आठ बजे भी थाने लेकर गई थी. सुबह से मैं वहीं था. वहां हमारे ऊपर सुलह करने का दबाव बनाया गया लेकिन हमारे मदरसे के हाफिज़ ने इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि हमारी कोई गलती नहीं थी. वे सुलह के लिए राजी नहीं हुए.

इससे पहले भी इस तरह का कोई वाकया पेश आया था?

मेरी पहचान की वजह से मुझपर पहली बार हमला हुआ है लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि जब एक ही देश में रहना है, यहीं कमाना और खाना है तो फिर ऐसे हमले क्यों हो रहे हैं?

First published: 31 March 2016, 16:35 IST
 
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