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आलमगीर मस्जिद की दीवार निर्माण पर मुसलमानों को एतराज

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2016, 12:25 IST
(पत्रिका)

अयोध्या के अड़गड़ा क्षेत्र में स्थित प्राचीन आलमगीर मस्जिद की मरम्मत को लेकर विवाद शुरु हो गया है. कुछ अयोध्यावासी महंत ज्ञानदास के इस प्रयास को सराह रहे हैं तो बाबरी मामले के मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब सहित कुछ अन्य मुस्लिम नेताओं को इस पर आपत्ति जतायी है.

विरोधियों का तर्क है कि महंत महज सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा कर रहे हैं, और इसे मुस्लिम धर्म के विरुद्ध बता रहे हैं. फिलहाल, शुक्रवार की सुबह मस्जिद के सामने उगी झाड़ियों को साफ कर परिसर में बनी दीवार की मरम्मत का काम शुरू हो गया है.

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मस्जिद का निर्माण सिर्फ मुसलमान कर सकते हैं- हाजी महबूब

बाबरी मामले के पक्षकार हाजी महबूब का कहना है कि मंदिर-मस्जिद किसी की बपौती नहीं हैं. मुस्लिम धर्म के नियमानुसार मस्जिद निर्माण और मरम्मत में किसी गैर मुस्लिम का पैसा नहीं लग सकता. इसलिए महंत ज्ञानदास जो कर रहे हैं वह ठीक नहीं है.

किसी जमाने में मुगल बादशाह ने हनुमानगढ़ी को जमीन दी थी. तब भी वहां मस्जिद थी. तब से लेकर आज तक यहां नमाज होती है. मस्जिद मुस्लिम समाज की है इसलिए किसी भी तरह का निर्माण कार्य या परिवर्तन सिर्फ मुस्लिम समाज ही कर सकता है.

मस्जिद मुसलमानों को सौंपे महंत ज्ञानदास

खुर्द मक्का एक्शन कमेटी के चेयरमैन मोहम्मद नईम का कहना है कि यदि महंत ज्ञानदास को हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव की इतनी फिक्र है तो वह मस्जिद और उससे जुड़ी जमीन मुस्लिमों के नाम क्यों नहीं कर देते? दरअसल यह महंत की राजनीति का एक हिस्सा है और सस्ती लोकप्रियता पाने का साधन.

महंत ज्ञानदास (पत्रिका)

आलमगीर मस्जिद से जुड़ी जमीन और इमारत की हकीकत

स्वर्गवासी जगतगुरु हरियाचार्य जी द्वारा लिखित संप्रदाय मंथन नाम की पुस्तक के तथ्यों के अनुसार लगभग 1700 ईसवी में मुगल शासक मंसूर अली ने अयोध्या में प्रसिद्ध सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी का निर्माण कराया. इसके बाद मुगल शासन के अधीन नगर की तमाम जमीनों को हनुमानगढ़ी के नाम कर दिया गया.

जिस स्थान पर आलमगीर मस्जिद है वह जमीन भी दान की हुई उसी जमीन का हिस्सा है जिसे मुगल शासक मंसूर अली ने हनुमानगढ़ी को दिया था. तब से लेकर अब तक इस मस्जिद में नमाज अदा करने के साथ मुसलमानों के अन्य धार्मिक आयोजन होते रहे हैं. हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी को इस पर कभी कोई एतराज नहीं रहा.

पूर्व में मुस्लिमों ने हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी से अनुमति लेकर मस्जिद के रंग रोगन से लेकर उसकी मरम्मत का काम कराया है. लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने कानूनी तौर पर हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी को इस पूरे परिसर और भवन का स्वामी मानते हुए मस्जिद से सटी जर्जर दीवार को गिरा देने या मरम्मत कराने का नोटिस दिया. उसी आधार पर मस्जिद के सामने जमीन पर बने चबूतरे और दीवार का निर्माण कार्य महंत द्वारा कराया जा रहा है.

First published: 3 September 2016, 12:25 IST
 
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