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मायावती का पुराना वीडियो बना सिरदर्द: ‘मुसलमान चरमपंथियों को वोट करते हैं'

सादिक़ नक़वी | Updated on: 6 February 2017, 7:46 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

इन दिनों मायावती का एक पुराना वीडियो क्लिप वॉट्सएप और फेसबुक पर सर्कुलेट हो रहा है. इस वीडियो से उन्हें यूपी चुनावों में झटका लग सकता है. 31 सेकंड के इस वीडियो में बसपा प्रमुख मीडिया को संबोधित करते हुए कह रही हैं कि मुसलमान समुदाय चरमपंथियों को पसंद करता है. इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि मेरठ में चरमपंथी उम्मीदवार नहीं जीते, मेरे निर्देशों पर अनुसूचित जाति, पिछड़े और उच्च वर्ग के मतदाता, जो बसपा के साथ थे, भाजपा को ट्रांसफर कर दिए गए. फिर भी मुसलमानों ने चरमपंथी उम्मीदवार को वोट दिए. 

इस वीडियो से मायावती को नुकसान हो सकता है, क्योंकि यह उस वक्त सर्कुलेट हो रहा है जब वे राज्य में मुसलमान मतदाताओं का समर्थन मांग रही हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पहले आरोप लगाया था कि बसपा प्रमुख ने अपने वोट भाजपा को ट्रांसफर कर दिए थे, जिससे यूपी में बिलकुल सफाया हो गया. तब मायावती ने इन आरोपों का खंडन किया था.

बसपा नेताओं सहित राज्य के कई नेताओं और मतदाताओं ने कैच को बताया कि उन्होंने वीडियो क्लिप देखा है. जिस तरह से उसमें मायावती ने कहा है, उसके दोनों मतलब निकल सकते हैं. इससे मुसलमानों को यह मैसेज जा सकता है कि बसपा सुप्रीमो उन सबको चरमपंथी मानती हैं. दूसरी ओर यह पार्टी के दूसरे आधार-दलित और उच्च जाति के एक वर्ग को विश्वास दिला सकती है कि मायावती यह मानती हैं कि मुसलमान चरमपंथी हैं, फिर भी उनका समर्थन पाने की कोशिश कर रही हैं.

यूट्यूब पर वीडियो

यूट्यूब पर यह वीडियो इस कैप्शन के साथ अपलोड किया हुआ है, ‘किसी समय मायावती ने भी माना था कि मुसलमान चरमपंथियों को रोकने के लिए भाजपा को वोट देना जरूरी है. कुपया इस मैसेज को देश के पूरे दलितों तक पहुंचाएं.’ जिस आक्रामकता के साथ वीडियो को वॉट्सएप और फेसबुक पर डाला गया है, उससे दलित-मुसलमान गठबंधन को रोकने की कोशिश में, बसपा के चुनाव जीतने के आसार खत्म हो सकते हैं. उन्होंने कौमी एकता दल के बसपा में शामिल होने के बाद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी सहित 100 मुसलमान उम्मीदवारों को खड़ा किया है. 

खबर है कि जो बसपा कुछ महीनों पहले एक सशक्त विकेट देख रही थी, तेजी से दम तोड़ रही है. पूर्वी यूपी में बसपा प्रभारी मनकद अली कहते हैं, ‘यह बसपा-विरोधी ताकतों का षडय़ंत्र है, कहना मुश्किल है कि इसे (वीडियो) कौन जारी कर रहा है.’

रामपुर में स्वार निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार काजिम अली खान नवाबों के परिवार से हैं. उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कैच को कहा, ‘वीडियो को आजम खान और समाजवादी पार्टी सर्कुलेट कर रही है. ’

बसपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं, ‘मायावती को अपने पक्ष का खुलासा करना चाहिए.’  इस नेता को यह वीडियो कम से कम तीन बार मिला है. उन्हें 2006 के प्रेस सम्मेलन की याद हो आई , जिसका वीडियो क्लिप हिस्सा है. कहते हैं, ‘मेरठ में स्थानीय निकाय के चुनावों में जबर्दस्त हारने के बाद, मायावती के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी. बसपा प्रमुख ने बचाव में कहा था कि उन्होंने बसपा दलित के वोट भाजपा को ट्रांसफर कर दिए थे.’

दिलचस्प है कि जिस उम्मीदवार को मायावादी ‘चरमपंथी’ बता रही थीं, वे हाजी याकूब कुरैशी की बीवी थीं, जो बाद में बसपा में शामिल कर ली गई थीं. कुरैशी अपने एक बयान के लिए बदनाम हैं, जिसमें उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का चित्र बनाने के लिए दनिश कार्टूनिस्ट के खिलाफ पुरस्कार की घोषणा की थी.

बदल गए हैं समीकरण

काजिम अली खान कहते हैं, ‘वीडियो को बिना किसी प्रसंग के जारी किया गया है. पिछले कुछ सालों में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. किसी को भी मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में आजम खान के रोल को नहीं भूलना चाहिए. आजम खान के बेटे सपा के उम्मीदवार हैं, जो स्वार में काजिम अली खान के विरोध में खड़े हुए हैं.’

बसपा का भाजपा के साथ गठजोड़ का इतिहास रहा है. उसने भगवा पार्टी के साथ दो बार सरकार बनाई है. इसलिए मुसलमान मायावती की पार्टी को वोट देने में चौकस रहते हैं, सिवाय उस निर्वाचन क्षेत्र के जहां लोकप्रिय मुसलमान उम्मीदवार होता है. सर्वे से जानकारी मिली कि यह उस तथ्य का विरोधाभास है कि काफी संख्या में मुसलमान सपा और कांग्रेस सहित अन्य पार्टी के लिए वोट करते हैं. 

सपा, बसपा और कांग्रेस को भाजपा मुसलमानों को तुष्ट करने वाली पार्टी बताती रही है. लोगों का मानना है कि इससे भाजपा के जीतने के आसार मजबूत हो सकते हैं. यही 2014 के चुनावों में हुआ था, जिसमें बसपा का दलित वोट बैंक और सपा का यादव वोट बैंक का रुख भाजपा की ओर हो गया था. 

First published: 6 February 2017, 7:46 IST
 
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