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नाभा जेल ब्रेक: मास्टरमाइंड और केएलएफ़ मुखिया गिरफ्तार, पांच अभी भी फरार

सादिक़ नक़वी | Updated on: 29 November 2016, 7:45 IST
(गेटी इमेजेज़ )
QUICK PILL
  • महज़ 24 घंटे के भीतर तीन राज्यों की पुलिस के आपसी तालमेल से नाभा जेल ब्रेक की साज़िश रचने वाले परमिंदर और केएलएफ़ के मुखिया हरमिंदर पुलिस की गिरफ़्त में आ चुके हैं. 
  • पुलिस अब इन मुलज़िमों से पूछताछ कर बाक़ी पांच क़ैदियों तक पहुंचना चाहती है. इनमें से तीन आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं जबकि दो उग्रवादी संगठन केएलएफ़ के सदस्य हैं. 

नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड परमिंदर सिंह पेंदा और केएलएफ़ चीफ़ हरमिंदर सिंह मिंटू पुलिस की गिरफ़्त में आ चुके हैं. इसके बावजूद यह गुत्थी अभी तक अनसुलझी है कि सभी छह क़ैदी नाभा की हाई सिक्योरिटी जेल से किस तरह फ़रार हुए. मीडिया में तमाम कहानियां इनके भागने की आ चुकी हैं मगर सभी में कहीं ना कहीं अहम कड़ियां ग़ायब हैं.   

नाभा जेल से फ़रार होने वाले सर्वाधिक हाई प्रोफ़ाइल क़ैदी हरमिंदर सिंह मिंटू थे. मगर सिर्फ़ 24 घंटे के भीतर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन की पार्किंग में दबोच लिया. हरमिंदर खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के प्रमुख हैं जिसका गठन उन्होंने 2009 में बब्बर खालसा इंटरनेशनल से अलग होने के बाद किया था. 

हरमिंदर उर्फ़ मिंटू कथित तौर पर पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईसीआई के संपर्क में थे. फ़रार होने के बाद पहचान छिपाने के लिए उन्होंने अपनी लंबी दाढ़ी कटवा ली थी. कैथल में अपने साथियों से अलग होने के बाद हरमिंदर वहां से पानीपत पहुंचे. फिर पानीपत से दिल्ली.

ऑपरेशन

स्पेशल सेल के स्पेशल कमिश्नर अरविंद दीप के मुताबिक गिरफ़्तारी के वक़्त हरमिंदर के पास से एक पिस्टल, छह कारतूस और कुछ कैश मिला है. इसके अलावा पनवेल का एक रेल टिकट भी बरामद हुआ है. वह निज़ामुद्दीन से मुंबई, फिर वहां से गोवा जाना चाहते थे. उनकी अंतिम योजना नेपाल भागने की थी. फ़िलहाल पटियाल हाऊस कोर्ट ने उन्हें एक हफ़्ते की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. 

क़ैदियों ने जेल से भागने में कुल चार कारों का इस्तेमाल किया. इनमें से एक कार फॉर्च्यूनर यूपी पुलिस को कैराना चेक पोस्ट पर दिखी. यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गाड़ी का रंग और नंबर प्लेट देखकर उसे पहचान लिया. गाड़ी जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड परमिंदर चला रहे थे. 

यूपी पुलिस का दावा है कि उन्हें परमिंदर के पास से जेल से लूटी गई दो रायफ़ल, दो अन्य रायफ़ल, एक बंदूक, 12 बोर, 30 बोर के भारी मात्रा में कारतूस मिले. प्रतिबंधित .38 बोर रिवॉल्वर के भी कुछ कारतूस बरामद किए गए हैं. 

परमिंदर अपराध के कई गंभीर मामलों में मुलज़िम हैं. तफ़्तीश में पता चला है कि उनके संबंध खालिस्तानी उग्रवादियों के परिवारवालों से भी हैं. परमिंदर ड्रग्स की तस्करी जगदीश भोला के साथ मिलकर करते थे. जगदीश भोला कुश्ती के माहिर खिलाड़ी हैं. उन्होंने पंजाब पुलिस में भी सेवाएं दी हैं लेकिन बाद में ड्रग तस्कर बन गए.

मिंटू को नई दिल्ली स्थित निज़ामुद्दी रेलवे स्टेशन की पार्किंग से गिरफ़्तार किया गया.

परमिंदर 2014 में भी जेल से फ़रार हो चुके हैं. यूपी पुलिस के मुताबिक ड्रग्स की ख़रीद-फरोख़्त के एक मामले में जब वह गिरफ़्तार हुए तो उनके साथ सतनाम कौर की एक महिला भी पकड़ी गई थीं. सतनाम एक खालिस्तानी उग्रवादी की बेटी हैं.

दिल्ली पुलिस फिलहाल कश्मीर सिंह की तलाश कर रही है. कश्मीर भी खालिस्तानी उग्रवादी हैं. माना जा रहा है कि वह दिल्ली के ही किसी इलाक़े में छिपे हो सकते हैं. तीन अन्य अपराधियों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है. 

प्लानिंग

कमाल की बात यह है कि इस केस में पहली कामयाबी उत्तर प्रदेश पुलिस को मिली. शामली के एक सीनियर ऑफिसर के मुताबिक हरियाणा बॉर्डर से सटे कैराना कस्बे के चेक पोस्ट पर हमें संदिग्ध फॉर्च्यूनर दिखाई दी. गाड़ी के रंग और नंबर प्लेट से कार की पहचान हुई. पुलिसवालों को उस वक्त ज़्यादा हैरत हुई जब उन्होंने देखा कि कार इस जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड परमिंदर ख़ुद चला रहे हैं.

इंट्रोगेशन

परमिंदर से पुलिस को बताया कि वह किस तरह दो राज्यों की पुलिस को चकमा देकर उत्तर प्रदेश की सीमा में घुसने में  कामयाब हुए थे. उनके मुताबिक हरमिंदर उर्फ़ मिंटू कैथल तक उनकी ही कार में थे. मगर यहां से हरमिंदर ने पानीपत और फिर वहां से दिल्ली के लिए बस पकड़ ली थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक हरमिंदर और कश्मीर सिंह पुलिस से बचने के लिए तीन घंटे तक कैथल के पास एक गन्ने के खेत में छिपे रहे. परमिंदर के पास से यूपी पुलिस ने तीन ग्राम हेरोइन भी बरामद की है. 

जेल ब्रेक की साज़िश परमिंदर ने अपने एक सहयोगी प्रेमा के साथ मिलकर तैयार की थी. प्रेमा वही हैं जिन्होंने 2014 में परमिंदर को नाभा जेल से भागने में मदद की थी. परमिंदर की मुलाक़ात प्रेमा से गुरप्रीत ने करवाई थी. परमिंदर ने पूछताछ में बताया है कि प्रेमा हरमिंदर और कश्मीर सिंह को जानते हैं और उनके संपर्क में थे. 

परमिंदर ने यूपी पुलिस को यह भी बताया है कि नाभा जेल ब्रेक की शुरुआती साज़िश में सिर्फ़ विकी, गुरप्रीत और नीता देओल को भगाना शामिल था. मगर बाद में तीन खालिस्तानी उग्रवादी भी इसका हिस्सा हो गए. 

यूपी पुलिस ने बताया कि भागने के बाद सभी अलग-अलग हिस्सों में बंट गए थे और मोबाइल की बजाय वॉकी टॉकी का इस्तेमाल कर रहे थे. सभी कैथल पहुंचकर अलग हुए थे. दरअसल, हरियाणा में एक चेकपोस्ट तोड़ने के बाद उन्हें आशंका हो गई थी कि साथ रहने पर पुलिस की नज़र पड़ सकती है. लिहाज़ा सभी का अलग हो जाना ही बेहतर है. 

भीतर का डर

पुलिस के मुताबिक सभी एक साथ भागे ज़रूर थे लेकिन एक साथ आगे तक जाने या छिपने की योजना इनकी नहीं थी. सभी का मानना था एक साथ छिपने की वजह से कोई ना कोई जगह के बारे में अपने जानने वाले को बता सकता है. इसके बाद सभी पकड़ लिए जाएंगे. हरियाणा पुलिस को कैथल के पास दो कारें लावारिस हालत में खड़ी मिली हैं.  

परमिंदर ने पूछताछ में कहा है गुरप्रीत भी उनके साथ फॉर्च्यूनर में थे लेकिन वह पानीपत में उतर गए थे. परमिंदर कैराना से होते हुए देहरादून जाने की फिराक़ में थे लेकिन पकड़े गए. ख़बरों के मुताबिक उत्तराखंड पुलिस ने भी दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.

First published: 29 November 2016, 7:45 IST
 
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