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इसाक सू का निधन और अधूरा नगा समझौता

सादिक़ नक़वी | Updated on: 30 June 2016, 8:20 IST
QUICK PILL
  • चरमपंथी नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (इसाक-मुइवा) के संस्थापक इसाक चिशी सू के निधन से नागा समाधान की प्रक्रिया पर कोई खास असर नहीं होगा.
  • फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर करीब 80 दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी और इसमें पांच प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल शामिल रहे. 80 दौर की बातचीत पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दौरान पूरी हुई.

चरमपंथी नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) के संस्थापक इसाक चिशी सू का निधन हो गया. दक्षिणी दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में मंगलवार को उन्होंने आखिरी सांस ली. सू के निधन से हालांकि बातचीत की प्रक्रिया पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि बातचीत का फ्रेमवर्क उनकी ही सहमति से तैयार हुआ था.

सू की मौत के बाद थूइगेलंग मुइवा पर बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी जो इस संगठन के महासचिव और सह-संस्थापक हैं. 

एनएससीएन (आईएम) के चेयरमैन अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर चुके हैं ताकि नागा समस्या का समाधान खोजा जा सके. मुइवा ने 7 रेसकोर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, केंद्रीय वार्ताकार आरएन रवि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किया था. डोभाल ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई थी.

फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर करीब 80 दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी और इसमें पांच प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल शामिल रहे. 80 दौर की बातचीत पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दौरान पूरी हुई.

फ्रेमवर्क एग्रीमेंट की विस्तृत जानकारी कभी सार्वजनिक  नहीं की गई. फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में नागाओं के अनोखे ऐतिहासिक दर्जे को स्वीकार किया गया. समझौते को चार अहम पड़ाव में पूरा किया गया. इसके साथ ही भारत के सबसे पुराने विद्रोह को सुलझा लिया गया. 

केंद्र और नागाओं के बीच संप्रभु शक्तियों की साझेदारी होगी और यह काम नागाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र, राज्य और समवर्ती सूची पर विचार कर किया जाएगा.

दोनों पक्ष वैसे समाधान पर सहमत होंगे जो दोनों को स्वीकार्य हो और इसे आपसी सहमति से तैयार किया जाएगा. इस दौरान दोनों पक्षों की जटिलताओं और परेशानियों का खासा ख्याल रखा जाएगा. 

इसका मतलब यह हुआ कि भारत सरकार नागाओं को समझने की कोशिश कर रही थी ताकि नागा अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति किए जाने के दौरान सरकार की राजनीतिक परेशानियों को समझ सकें.

फ्रेमवर्क के तहत यह बात तय थी कि दोनों पक्ष स्थायी समझौते को लेकर काम करेंगे और अब बातचीत का पहलू साफ हो चुका है. बातचीत की समझ रखने वाले नागा सूत्रों के मुताबिक समझौते के चार बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है.

रीजनल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल बनाई जाएगी जिसमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके शामिल होंगे.

पहले पैन नागा होहो की स्थापना की जाएगी. इस ईकाई के पास विधायी, बजटीय और बातचीत करने की शक्ति होगी. यह एक चुनी हुई संस्था होगी और इसकी कमान नागाओं के हाथों में होगी.

समझौते के तहत पैन नागा होहो की स्थापना की जाएगी, जिसके पास विधायी, बजटीय और बातचीत करने की शक्ति होगी

दूसरा नागालैंड के बाहर के इलाकों के लिए रीजनल ऑटोनॉमस डस्ट्रक्िटि काउंसिल बनाई जाएगी. इसमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके शामिल होंगे.

तीसरा संसद एक विशेष नागा कानून बनाएगी जिसे संविधान में जोड़ा जाएगा. विशेष कानून में विषयों का बंटवारा होगा जो केंद्र और नागाओं के बीच विभाजित होंगे. इस तरह नागा संविधान भारतीय संविधान का ही अभन्नि अंग होगा.

चौथा नागा इलाकों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर नागाओं की मल्कियित होगी. उनके पास इन संसाधनों के दोहन का पूरा अधिकार होगा और अगर वह चाहे तो इस मामले में केंद्र सरकार और उसकी ईकाइयों को साझेदार बना सकते हैं.

ऐसे मामले में संसाधनों के अन्वेषण और दोहन के लिए दोनों पक्षों के बीच संयुक्त उपक्रम का नर्मिाण किया जाएगा.

समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद नागाओं की तारीफ करते हुए  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैं  दो दशक तक युद्ध विराम रखने के लिए एनएससीएन-आईएम की तारीफ करता हूं. नागा मानवता के सबसे ऊंचे पायदान का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनके पास ग्रामीण स्तरीय प्रशासन है और जमीनी लोकतंत्र. यह बाकी देश के लिए प्रेरणा है.' 

मोदी ने कहा कि सरकार पुराने लंबित मामलों को समाधान करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य से नागा समस्या को सुलझाने में लंबा समय लग गया क्योंकि हम एक दूसरे को समझते नहीं थे.'

नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद नेफ्यो रियो ने कहा, 'ऐसे अहम मौके पर सू की मौत बेहद दुखद है.' रिया ने कहा, 'शांति प्रक्रिया आखिरी चरण में है और इस वक्त पर उनकी ज्यादा जरूरत थी.' उन्होंने कहा, 'वह इस आंदोलन से 1950 में जुड़े और उसके बाद से लागातर सक्रिय रहे.'

पूर्व मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि जल्द ही समझौते को पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा, 'हर हफ्ते एक या दो दौर की बात हो रही है. यह बताता है कि काम तेजी से किया जा रहा है. मुझे उम्मीद है कि जल्द ही परिणाम सामने आएगा क्योंकि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हुए एक साल हो चुका है.'

कुछ लोगों का मानना है कि युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं की वजह से अलग नागा पहचान का मुद्दा कमजोर हो चुका है. वजह यह है कि युवा पीढ़ी शिक्षा और रोजगार की तलाश में देश के अन्य हिस्सों में जा रही है.

असम बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया,'पुरानी पीढ़ी के खत्म होने के बाद यह पूरा मामला खत्म हो जाएगा. पुरानी पीढ़ी का इस मामले में कड़ा रुख रहा है.' सू की भी यही चिंता थी और यही वजह रही कि वह विद्रोह को खत्म करनेे के लिए राजनीतिक समाधान चाहते थे.

कौन थे इसाक सू?

87 वर्षीय सू 1950 में नागा आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंने एनएनसी और भारत सरकार के बीच हुए शिलॉन्ग समझौते के खिलाफ एनएससीएन का गठन किया था. सू एनएनसी के भूमिगत आंदोलन के  दौरान उसके  विदेश सचिव रहे और इस दौरान उन्होंने चीन समेत अन्य देशों से संपर्क किया.

कहा जाता है कि चीन ने नागा आंदोलन में उनकी मदद की. एनएससीएन (आईएम) नागालैंड के सात संगठनों में सबसे बड़ा संगठन है. 

सुमी समुदाय में पैदा हुए सू को वैसे नेता के तौर पर देखा जाता था जो अन्य नागा धड़े को प्रभावित करने की क्षमता रखते थे. साथ ही उनमें नागालैंड के शक्तिशाली चर्च को भी प्रभावित करने की क्षमता थी. वहीं मुइवा थांगुकल समुदाय से आते थे और उनका संबंध मणिपुर के उखरुल जिले से था.

खापलांग धड़ा हिंसक संघर्ष के बाद 1988 में एनएससीएन से अलग हो गया. यह धड़ा अभी भी भारत सरकार से लड़ रहा है जबकि एनएससीएन (आईएम) ने 1997 में युद्ध विराम का फैसला लिया. एनएससीएन (के) का मुख्यालय म्यांमार में है और इसकी कमान हेमी नगा के हाथ में है जो वहीं के नागरिक हैं.

सू पिछले एक साल से अधिक समय से अस्पताल में थे. बाद में कई अंगों के फेल होने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई. उनकी किडनी भी खराब हो गई थी और वह डायलिसिस पर थे. हालांकि यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि उनकी जगह कौन लेगा. 

First published: 30 June 2016, 8:20 IST
 
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