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नजमा हेपतुल्ला: 'तीन तलाक' की गलत व्याख्या हो रही है

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(एजेंसी)

मणिपुर की गवर्नर नजमा हेपतुल्ला ने बुधवार को कहा कि 'तीन तलाक' की परंपरा की गैर इस्लामी है और इसकी गलत व्याख्या हो रही है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में एक बार में तीन तलाक की कोई अवधारणा है ही नहीं.

इस मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से इस परंपरा को खत्म करने का अनुरोध करने के मामले में कोई टिप्पणी करने से बचते हुए नजमा ने कहा, 'यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जहां मैं सकारात्मक या नकारात्मक जवाब दे सकूं कि मैं केंद्र के रुख से सहमत हूं या नहीं. मैं इस मुद्दे पर सिर्फ अपने विचार और जो मैं महसूस कर रही हूं उसे जाहिर कर सकती हूं.'

नजमा गवर्नर बनने से पहले मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री थीं. वह मुसलमानों में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह की परंपरा का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किए जाने के केंद्र के रुख के बारे में अपने विचारों को लेकर सवालों का जवाब दे रही थीं.

हिंदू धर्म की तर्ज पर इस्लाम में बहुविवाह की परंपरा को खत्म करने के बारे में हेपतुल्ला ने कहा कि लोगों को इस बारे में सोचना चाहिए और इस्लाम के नाम पर किया जाने वाला कोई भी अन्याय सही नहीं है.

उन्होंने कहा कि ज्यादातर इस्लामी देशों ने इस्लाम की सही व्याख्या की है. उन्होंने कहा कि कुरान और पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि जिन्होंने इंसान के साथ अन्याय किया है वे ठीक से धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'जो इस्लाम का दुरुपयोग कर रहे हैं और महिलाओं से समान बर्ताव नहीं कर रहे हैं, वे गलत हैं. मैं जो कहती हूं उसमें यकीन रखती हूं. यहां तक कि एक महिला भी निर्ममता, अन्याय और अन्य हालात में शादी तोड़ने की मांग कर सकती है लेकिन इस बारे में कोई बात नहीं करता.'

नजमा ने कहा कि एक साथ 'तीन बार तलाक' कह कर केवल तलाक नहीं दिया जा सकता. इसके लिए तीन महीनों में तीन मौकों पर ऐसा किया जाता है और मध्यस्थता की प्रक्रिया का पालन करना होता है. उसके बाद ही तलाक होता है. जिस तरह से वे इसकी व्याख्या कर रहे हैं वह इस्लामी नहीं है और सही नहीं है.

पाकिस्तान सहित ज्यादातर मुस्लिम देशों ने इसे खारिज कर दिया है. इस विवादित मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए हेपतुल्ला ने कहा कि जो लोग 'तलाक, तलाक, तलाक' की बात कर रहे हैं, वे इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहे हैं और उनके पास धर्म को बदनाम करने का कोई अधिकार नहीं है.

First published: 13 October 2016, 9:27 IST
 
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