Home » इंडिया » Namami Bramhaputra Festival expected to open new roads of development in Assam
 

नमामि ब्रह्मपुत्र महोत्सव से जगी असम की नई सुबह की आस

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2017, 19:49 IST

पूर्वोत्तर के राज्यों का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला असम अब नमामि ब्रह्मपुत्र महोत्सव के जरिये न सिर्फ देश के सबसे बड़े नदी महोत्सव का गवाह बना बल्कि सूबे के इतिहास में इसे अब तक का सबसे भव्य आयोजन बताया जा रहा है.

बीते 31 मार्च से लेकर 4 अप्रैल तक ब्रह्मपुत्र के 21 तटवर्ती जिलों के साथ ही गुवाहाटी के राजदुवार तट पर यह 5 दिवसीय रंगारंग महोत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया. इस आयोजन के पीछे सरकार का मकसद देश-दुनिया का ध्यान व्यापार, निवेश, पर्यटन और संस्कृति में असम की क्षमता को प्रदर्शित करना रहा.

नमामि ब्रह्मपुत्र महोत्सव में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, भूटान के प्रधानमंत्री सेरीन टोबगे, नितिन गडकरी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों समेत कई राज्यों के मंत्री, योग गुरु बाबा रामदेव, बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा समेत कई शख्सियतों ने शिरकत की.

इस महोत्सव के दौरान गंगा आरती की ही तरह ब्रह्मपुत्र आरती के बाद एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स-एक्टिविटीज, फूड स्टॉल्स, लोक नृत्य-संगीत के तमाम कार्यक्रमों के साथ ही पपेट-लेजर शो आदि का आयोजन किया गया. जबकि महोत्सव में भारी संख्या में लोग आएं इसलिए आकर्षक झांकियां, जैविक चाय की प्रदर्शनी, हथकरघा और हस्तशिल्प, फिल्म फेस्टिवल समेत व्यवसाय के विकास के लिए सेमिनार भी आयोजित किए गए.

 

सरकार ने इस आयोजन के द्वारा यहां की जीवन रेखा ब्रह्मपुत्र के जरिये क्षेत्र के विकास की रूप-रेखा सामने लाने और दुनिया को इसकी झलक दिखाने का काम किया. लक्ष्य था कि असम को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर व्यवसायिक हब के रूप में भी विकसित किया जाए.

गौरतलब है कि दुनिया की प्रमुख नदियों में शामिल ब्रह्मपुत्र देश के आध्यात्मिक और सभ्यता-संस्कृति का संवाहक होने के साथ ही आर्थिक प्रगति और व्यापार के व्यापक अवसर और संभावनाओं का भी सतत प्रवाह बनी हुई है.

ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत के दक्षिण में मानसरोवर के पास चेमा-युंगदुंग नामक ग्लेशियर से हुआ है. तिब्बत में इसे सांग्पो, अरुणाचल प्रदेश में डिहं और असम में ब्रह्मपुत्र नाम से पुकारा जाता है. संस्कृत में ब्रह्मपुत्र का शाब्दिक अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है. यह नदी चीन में 1625 किलोमीटर तक, भारत में 918 किलोमीटर तक और बांग्लादेश में 337 किलोमीटर तक बहती है.

राष्ट्रीय जलमार्ग-2 असम के सदिया को धुबरी से दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों में भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत जोड़ने का काम करता है. यह जलमार्ग केवल असम-आसियान सहयोग केंद्र ही नहीं है बल्कि विश्व भर के निवेश को अपनी और आकर्षित भी करता है. यह नदी मौजूदा और संभावित पनबिजली उत्पादन का एक बड़ा स्रोत है जो राज्य में बिजली के बुनियादी ढांचे को बढावा देगा.

ब्रह्मपुत्र महोत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ढांचागत सुविधाओं के मामले में असम की जनता को एक साथ कई सौगातें दीं.

इनमें ब्रह्मपुत्र के 848 किलोमीटर वाले राष्ट्रीय जलमार्ग की परिवहन व्यवस्था के लिए सरकार के साथ 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये के आवंटन, 15 फ्लोटिंग टर्मिनल और 5 जगहों पर रोरो टर्मिनल बनाने के अलावा वाटर स्पोर्ट्स के निर्माण, सड़क-पानी पर चलने वाली आधुनिक बसों, वाटर टैक्सी स्टीमर, अत्याधुनिक जल पोर्ट और पर्यावरण हितैषी ईंधन का उपयोग बढ़ाने के लिए एलएनजी बंकर बनाने की योजना भी शामिल है.

केंद्र सरकार ने इस नदी पर 7 नए पुलों और राजमार्ग में 2 हजार किलोमीटर की बढ़ोतरी का भी ऐलान किया. वहीं, बाबा रामदेव ने भी असम में पतंजलि के ज्यादा से ज्यादा उत्पाद केंद्र और डेयरी सेंटर खोलकर स्थानीय लोगों और किसानों को रोजगार मुहैया कराने का वादा किया.

First published: 12 April 2017, 19:49 IST
 
अगली कहानी