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नरसिम्हा राव ने IB से मांगी थी आर्थिक उदारीकरण के विरोधी कांग्रेसियों की लिस्‍ट!

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 June 2016, 16:48 IST
(फाइल फोटो)

विनय सीतापति की किताब ‘हाफ लायन: हाउ पीवी नरसिम्‍हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया’ में सत्ता के समीकरण के कई दिलचस्प खुलासे हो रहे हैं. किताब के मुताबिक 1991 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्‍हा राव ने खुफिया विभाग से उन कांग्रेसियों की सूची मांगी थी, जो उनके द्वारा लाए गए आर्थिक सुधारों के विरोधी थे.

खुफिया विभाग की ओर से दी गई सूची में लोकसभा और राज्‍यसभा के उन सांसदों के नाम भी थे, जो उदारीकरण बिल के विरोध में थे. 90 के दशक में भारत की गिरती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राव सरकार ने कई अहम आर्थिक फैसले लिए थे.

इनमें उद्योगों से सरकारी पाबंदी को ढीला करना, व्‍यापार और वाणिज्‍य में उदारता, बहुराष्‍ट्रीय कंपनियों और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण को लागू करना और खाद सब्सिडी में कमी लाने के साथ कृषि नीति में बदलाव करना शामिल था.

आईबी ने तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव को उन 55 सांसदों की सूची दी थी, जो उनके व्‍यापार और वाणिज्‍य नीति के विरोधी थे. राव के फैसले के विरोध में माधवराव सिंधिया और बलराम जाखड़ के साथ उनके मंत्रिमंडल के सात मंत्री भी शामिल थे.

केके बिड़ला समेत छह कांग्रेसी सांसद बहुराष्‍ट्रीय कंपनियों के भारत में प्रवेश और निवेश के बड़े विरोधी थे. जबकि 15 सांसद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण के विरोधी थे. वहीं कांग्रेस के 20 सांसद, जिनमें अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता भी शामिल थे, राव के आर्थिक सुधारों के विरोधी थे. 

किताब के मुताबिक पूर्व पीएम राव ने खुफिया एजेंसी की जासूसी के अलावा भी कई अन्‍य उपायों के जरिए कांग्रेस में होने वाली साजिशों का सामना किया.

जब कांग्रेसी सांसदों ने वर्किंग कमिटी की बैठक में आर्थिक‍ सुधारों का विरोध किया, तब राव ने उन सवालों का सामना करने के लिए मनमोहन सिंह को आगे कर दिया.

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह उस समय राव के वित्‍त मंत्री थे. आज नए आर्थिक सुधारों की पैरवी करने वाली बीजेपी भी उस समय इस फैसले खिलाफ खड़ी थी.

First published: 25 June 2016, 16:48 IST
 
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